महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में मौत के आकड़े बढ़ते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार अब तक 45 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ , छत्रपति संभाजीनगर में के बाद यह आकड़ा नागपुर के सरकारी अस्पतालों में आ पहुंचा है। पिछले 24 घंटों में दो मेडिकल कॉलेज अस्पताल – इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज और सरकारी मेडिकल कॉलेज में 25 मरीजों की मौत हो गई है। नागपुर के मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने इसे स्वीकार किया है।
जीएमसीएच के डीन डॉ. राज गजभिए ने कहा है कि नागपुर में हुई मौतों की तुलना नांदेड़ प्रकरण से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जीएमसीएच में 1,900 बिस्तरों की क्षमता है और अस्पताल प्रतिदिन औसतन 10 से 12 मरीजों की मौत की रिपोर्ट करता है। बरसात के मौसम में मौसमी बीमारियों के कारण मासिक मृत्यु का यह आंकड़ा औसतन 15 तक बढ़ जाता है।
नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में टूटी उम्मीद
महाराष्ट्र के अस्पताल में लोगों की उस उम्मीद की मौत होते दिखी है जिसमें लोग डॉक्टर को भगवान मानते थे। नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में अबतक 31 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 12 नवजात शिशु भी शामिल हैं। वहीं 70 लोगों की हालत गंभीर है। महराष्ट्र में मौतों की खबरें आने के बाद सनसनी फैल हो गई है।
महाराष्ट्र में इसी बीच सियासत करने के हेर फेर में भी नेता नजर आ रहे हैं। नेताओं की आवाजाही अस्पताल में हो रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस सरकारी अस्पताल में दवाओं की कमी ने लोगों की जान ली है।

कांग्रेस ने चार अक्टूबर को इस मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने सरकार और अस्पताल की ओर संकेत करते हुए कहा कि मरीजों के लिए दवाएं समय पर क्यों नहीं खरीदी गई।
पूरी जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई
इन आरोपों को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि मौत के कारणों की पूरी जांच करने के बाद ही कार्यवाइ की जाएगी। इसके अतिरिक्त सरकार ने अस्पताल में दवाओं की कमी को इंकार किया है।
इसी बीच सियासी हमला करते हुए कांग्रेस नेता अजॉय कुमार ने भाजपा-शिवसेना सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे दवाएं नहीं खरीद सकते वो केवल विधायक खरीदने में व्यस्त होंगे।

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उनके अनुसार नांदेड़ में दवाओं की कमी से बच्चों और लोगों की मौत हुई है । कांग्रेस नेता ने दावा करते हुए कहा कि अस्पताल में ऐसी मौते इसलिए हुई क्योकि सरकार ने चार महीने पहले दवाओं के आपूर्तिकर्ता को बदल दिया था।
15 दिनों के भीतर अस्पताल की सुविधाओं में सुधार
इस मामले के बाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा है कि वजह पता चलने के बाद 15 दिनों के भीतर अस्पताल में सुधार होगा। महाराष्ट्र के चिकिस्ता मंत्री के अनुसार अस्पताल में कोई कमी नहीं हैं लेकिन यदि ये मौते अस्पताल की लापरवाही के कारण हुई हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सांसद के खिलाफ मामला हुआ दर्ज
3 अक्टूबर को शिवसेना सांसद ने अस्पताल के डीन से खुद वहां मौजूद होकर टॉयलेट की सफाई करवाई थी। जिसे लेकर डीन ने सांसद के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया। इस मामले को लेकर सांसद का कहना है कि “सफाई ही तो करवाई थी। इसके अतिरिक्त राहुल गांधी ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा। शरद पवार ने भी इस घटना को दर्दनाक बताते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की है ।

खबरों अनुसार हाफकिन संस्था द्वारा दवाओं की खरीद- बंद के चलते महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी हो रही है। इस मामले में अस्पताल के अधीक्षक वाकोडे द्वारा कहा गया है कि तबादले होने की वजह से थोड़ी परेशानी हो रही है। हाफकिन नाम की संस्था से दवाइयों की खरीद होने वाली थी, लेकिन वह खरीद नहीं हो सकी जिससे इस तरह परेशानी हुई। दवाओं के लिए जारी बजट को देखते हुए मरीजों की संख्या बढ़ गई। इस कारण बजट में थोड़ी कमी आई।
अस्पताल प्रशासन और सरकार को ठहराया जिम्मेदार
गौरतलब है कि ( महाराष्ट्र ) नांदेड़ के इस सरकारी अस्पताल में 30 सितंबर की रात से लेकर लेकर 1 अक्टूबर की रात 12 बजे तक 24 मरीजों की मौत हो चुकी थी। इसमें नवजात शिशु भी शामिल थे। इसके बाद मौतों का सिलसिला बढ़ता चला गया।
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घटना की खबर पाते ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण अस्पताल पहुंचे। उनके मुताबिक इस घटना को सरकार को गंभीरता से लेनी चाहिए और इसकी जांच भी करवानी चाहिए । उन्होंने अस्पताल में हुई मौतों का जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन और सरकार है ठहराया है।

