दिल्ली विधानसभा चुनाव का कार्यकाल अगले साल 23 फरवरी को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां इसकी तैयारी में जोर- शोर से जुट गई हैं। पिछले एक दशक से दिल्ली में काबिज आम आदमी पार्टी जहां हैट्रिक लगाने का दंभ भर रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस भी इस बार सरकार बनाने का दावा जोर-शोर से कर रही है। आम आदमी पार्टी अलग-अलग विधानसभाओं में जाकर ‘पदयात्रा’ कर रही है तो कांग्रेस ‘न्याय यात्रा’ कर रही है। इसकी रणनीतिक काट में भाजपा भी ‘परिवर्तन यात्रा’ पर है। इन यात्राओं और एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोपों के चलते सियासत गरमा गई है। देश की राजनीतिक गलियारों से लेकर चौपालों तक कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या आम आदमी पार्टी दिल्ली में जीत की हैट्रिक लगाकर अपनी सत्ता बरकरार रख पाएगी? या फिर राज्य में सत्ता परिवर्तन देखने को मिलेगा? ऐसे तमाम सवाल इन दिनों आम से खास तक की जुबां पर हैं।
कहा जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा में पिछले दो बार से आम आदमी पार्टी एकतरफा चुनाव जीतती जरूर आ रही है लेकिन इस बार के चुनाव में उसकी राह आसान नहीं होने वाली है। पार्टी लगातार कई चुनौतियों का सामना कर रही है जिसको लेकर लोगों के मन में भी संशय बना हुआ है। खासकर भ्रष्टाचार के मामले में सरकार की काफी आलोचना हुई है। जिस पार्टी का उदय ही भ्रष्टाचार के खिलाफ हुआ था लेकिन लगातार उसके नेताओं पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी पर लोगों के विश्वास को कमजोर करने का काम किया है।
वहीं चुनाव से ठीक पहले कई नेताओं का पार्टी छोड़ना भी उसकी जीत की हैट्रिक लगाने में अड़ंगा लगा सकता है। चाहे अब्दुल रहमान हों, कैलाश गहलोत हों, दोनों का पार्टी छोड़ जाना इस चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। कैलाश गहलोत अरविंद केजरीवाल के पसंदीदा मंत्रियों में से एक थे। साथ ही दिल्ली में पार्टी के बड़े जाट नेता भी थे। जहां तक सवाल है सत्ता परिवर्तन और सरकार बरकरार का तो बीजेपी ने लगातार अरविंद केजरीवाल की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। कथित शराब नीति घोटाले में सीएम और डिप्टी सीएम से लेकर आप के सांसद और कई नेताओं तक को जेल जाना पड़ा। वहीं उसके एक और मंत्री को भी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी है। उसके कुछ विधायक भी ऐसे ही आरोपों में जेल में हैं। बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर सड़क पर है।
भाजपा नेता सतीश उपाध्याय का कहना है कि दिल्ली में एक भ्रष्ट सरकार चल रही है लेकिन अब तो रंगदारी, वसूली, फिरौती और आम नागरिकों के बीच डर पैदा करने की भी कोशिश की जा रही है। इसके चलते दिल्ली की जनता अब सत्ता परिवर्तन के मूड में है और देश-विरोधी मानसिकता वाली सरकार को इस बार विधानसभा से उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है। इस ‘परिवर्तन यात्रा’ के माध्यम से बीजेपी जनता तक सीधे अपना संदेश पहुंचाएगी। जिसका लाभ उसे विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। वहीं कांग्रेस इन सालों में केजरीवाल सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आ पाई है। उसके नेता बयानबाजी तक ही सीमित रहे हैं। जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। हालांकि चुनाव नजदीक आता देख दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना शुरू कर कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान आम आदमी पार्टी और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हर गुजरते दिन दिल्ली कांग्रेस की न्याय यात्रा में लोग जुड़ते जा रहे हैं इससे आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को डर लग रहा है। साथ ही उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने का मन बना चुकी है। उन्होंने दिल्ली की जनता को धोखा देने के अलावा कुछ भी नहीं किया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी जैसे-जैसे मजबूत होते चली गई है वैसे ही कांग्रेस का प्रभाव दिल्ली की राजनीति में कम हुआ है। दलित वोट से लेकर अल्पसंख्यक वोटों में बड़ा बदलाव देखा गया था। लेकिन अब कांग्रेस दिल्ली में खुद को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और अब तक 21 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भी कर चुकी है। ऐसे में अगर कांग्रेस मजबूत हुई तो इसका खामियाजा आम आदमी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। यही नहीं लगातार सरकार में रहने पर कई बार जनता के बीच एंटी इंनकम्बेंसी का सामना करना पड़ जाता है। आप सरकार के कुछ नीतियों को लेकर जनता के बीच असंतोष की भावना भी देखी जा सकती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस कारण पार्टी को चुनाव में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

