जम्मू-कश्मीर में जब से धारा 370 हटाई गई तब से वहां बड़े नेताओं को पीएसए कानून के तहत हिरासत में रखा गया था लेकिन अब प्रशासन ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुला को तत्काल प्रभाव से रिहा करने का आदेश दिया है।
Rohit Kansal, Principal Secretary Planning, Jammu & Kashmir: Government issues orders revoking detention of Dr Farooq Abdullah. pic.twitter.com/hgcCOQNzcg
— ANI (@ANI) March 13, 2020
कहा जा रहा है कि सोमवार को फारुक अब्दुला संसद की कार्यवाही में भी भाग ले सकते है। फारुक अब्दुला के अलावा उनके बेटे और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत 9 नेता पीएसए के तहत नजकबंद हैं। हालांकि, दिसंबर महीने में उनके पीएसए में जो तीन माह का विस्तार दिया गया था वह भी आज ही समाप्त हुआ है। अब्दुला की रिहाई के बाद जो नेता बचे है उन्हें भी जल्द रिहा किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे फारुक अब्दुला को 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत प्रशासन ने उन्हें हिरासत में रखा था। जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A को निरस्त किया गया था तब से उन्हें जन सुरक्षा अधिनियम 1978 के तहत बंदी बनाया गया था। अब्दुला को उनके घर में ही कैद रखा गया था। उनके घर को सब-जेल के तौर पर अधिसूचित किया गया था। बाद में उसके पीएसए की अवधि को बढ़ाया गया था।
आज जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक सूचना जारी करके उन्हें रिहा कर दिया। जम्मू कश्मीर जन सुरक्षा अधिनियम 1978 की धारा 19 की उपधारा एक के तहत जम्मू कश्मीर सरकार 15 सितंबर, 2019 को जिला मैजिस्ट्रेट श्रीनगर द्वारा फारूक अब्दुल्ला को बंदी बनाए जाने के आदेश संख्या: डीएमएस पीएसए 120 2019, जिसे 13 दिसंबर, 2019 को गृह विभाग के एक आदेश जारी कर, तीन माह के लिए विस्तार दिया था, को वापस लिया जाता है।
लगभग पांच दिन पहले राकंपा अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्षा ममता बनर्जी, माकपा प्रमुख सीता राम येचुरी समेत विपक्ष के सभी प्रमुख नेताओं ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को एक संयुक्त पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत सभी प्रमुख राजनीतिक नेताओं की रिहाई का आग्रह किया था।

