Editorial

जो खानदानी रईस हैं वो…

मेरी बात

जो खानदानी रईस हैं वे मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है
ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा की आके बैठे हो पहली सफ़ में
अभी क्यों उड़ने लगे हवा में, अभी तो शोहरत नई-नई है

-शबीना अदीब

सड़सठ वर्षीय मुकेश धीरूभाई अंबानी देश के सबसे दौलतमंद व्यक्ति हैं। उनकी कंपनी रिलाइंस इंडस्ट्रीज की सालाना कमाई 9 लाख करोड़ (109.4 बिलियन डॉलर) है। उनके दूसरे बेटे अनंत अंबानी का विवाह समारोह इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दो से पांच हजार करोड़ रुपए बीते आठ महीनों के दौरान इस विवाह से जुड़े समारोहों पर खर्च कर दिए गए हैं। भारत में विवाहों पर अपनी हैसियात से ज्यादा खर्च करने, दहेज देने आदि की कुप्रथा सदियों से है। इस दृष्टि से यदि एक धनकुबेर अपनी संतान की शादी में हजारों करोड़ स्वाह करता है तो इसमें आश्चर्य कैसा? विक्षोभ क्यों? और यह भी कि इसमें गलत क्या है? मैं इसे किस दृष्टि से देखता हूं, समझता हूं यह मेरा निजी दृष्टिकोण है। अंबानी को या फिर इस देश के रहनुमाओं को इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं। फिर भी एक पत्रकार बतौर यह मेरा दायित्व है कि मैं इस पर अपनी बात कहूं। मेरा दृढ़ मत है कि यह सारा आयोजन हर दृष्टि से बेहद भौड़ा और इस मुल्क के गरीब-गुरबा की संवेदनाओं पर नमक छिड़कने समान है। हालांकि यह भी सच है कि मुल्क की अवाम इस आयोजन पर मुदित है और ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ की तर्ज पर इस आयोजन की चर्चा गली-गली कूचे-कूचे हो रही है। जिस समाज की चेतना पर कब्जा हो चुका हो वहां ऐसा होना स्वभाविक है। यदि ऐसा न होता तो ट्टार्म और जाति के नाम पर, छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर, फ्री राशन के नाम पर आमजन अपने असली मुद्दों को न भुलाता, न झांसे में आता। इस सच को भली-भांति समझते हुए भी मैं अंबानी परिवार की शादी पर लिखना जरूरी समझता हूं, खुद की तसल्ली के लिए।

मेरी नजर में हजारों करोड़ का यह जश्न अनैतिकता, असंवेदनशीलता यहां तक कि अश्लीलता की श्रेणी में आता है क्योंकि यह अय्याशी ऐसे समय में हो रही है जब आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और युवाओं मध्य दिशाहीनता अपने चरम् पर जा पहुंची है। कभी स्वदेशी की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब पूंजीवादी व्यवस्था की सबसे बड़ी पैरोकार बन चुकी है और बीते दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में काबिज उसकी सरकार विघृतगति से समाजवादी अवधारणा को जड़ से समाप्त करने का काम कर रही है। अंबानी अपने ऐश्वर्य का नग्न नाच ऐसे समय में कर रहे हैं जब जीएसटी का 67 प्रतिशत देश की वह 50 प्रतिशत जनता देती है जो सबसे गरीब है। यह जश्न ऐसे समय में हो रहा है जब देश की लगभग आधी संपदा पर 1 प्रतिशत अंबानी सरीखे धन कुबेरों का कब्जा है और जब 80 करोड़  जनता मुफ्त का राशन खा जिंदा है। ऐसे कठिन समय में लाखों की कीमत वाला शादी का आमंत्रण पत्र केवल वही बनाने का दुस्साहस कर सकता है जो पूरी तरह से अमानुष हो। 100 से अधिक प्राइवेट हवाई जहाज भेज विदेशों से मेहमान वही बुला सकता है जिसकी संवेदनशीलता शून्य हो चुकी हो, सौ करोड़ गायकों पर वही लूटा सकता है जो इस देश की संपदा का दोहन कर खरबपति बना हो। इसलिए मैं मानता हूं कि इस प्रकार का आयोजन न केवल बेहद भौड़ा और शर्मनाक है, बल्कि यह आमजन के  साथ किए जा रहे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। स्मरण रहे आधी रात मिली आजादी के वक्त नेहरू ने कहा था- ‘…The service of India means, the service of the millions who suffer. It means the ending of poverty and ignorance and poverty of disease and in equality of opportunity'(…राष्ट्रसेवा का अर्थ है उन लाखों की सेवा जो पीड़ित हैं। इसका अर्थ है गरीबी की समाप्ति, अज्ञानता की समाप्ति और अवसर की असमानता की समाप्ति) ऐसा लेकिन कर पाने में हम बतौर राष्ट्र सर्वथा विफल रहे। हद यह कि समाजवाद की अवधारणा को मूर्त रूप देने के बजाए हमारे रहनुमा पूरी बेशर्मी के साथ अंबानी के ऐश्वर्य के नग्न नृत्य में शामिल होना खुद का सौभाग्य समझते हैं। मुकेश अंबानी ने इन आयोजनों के जरिए देश को, अपने प्रतिद्वंदियों को और अपने आलोलचकों को यह संदेश देने का काम भी सफलतापूर्वक कर दिखाया कि देश की सत्ता पर उनका पूरा नियंत्रण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का इस विवाह समारोह में शामिल होना, शंकराचार्यों का वहां जाना, फिल्मी सितारों की वहां उपस्थिति इत्यादि अंबानी की उस ताकत को सामने लाता है जिसका जिक्र कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से करते आ रहे हैं। मुकेश अंबानी ने अपनी अकूत संपदा का नंगा-नाच दिखा यह भी संदेश स्पष्ट तौर पर दे दिया है कि वे अपनी आलोचनाओं से न तो भयभीत होते हैं, न ही उससे कोई सबक लेने के इच्छुक हैं। वह सर्वशक्तिमान हैं और सत्ता उनके ईद-गिर्द सलाम रकती है इसको उन्होंने इन समारोहों के जरिए स्थापित करने में जरा भी गुरेज नहीं किया है।

मैं नेहरू-गांधी परिवार को देश की कई व्याधियों के लिए कसूरवार मानता आया हूं। मुस्लिम तृष्टिकरण, 1984 के सिख विरोधी दंगे, देश में भ्रष्टाचार को शिष्टाचार की संज्ञा देना आदि कांग्रेस की ही देन हैं लेकिन मैं खुलेमन से गांधी परिवार को साधुवाद देना चाहता हूं, विशेषकर राहुल गांधी को कि उन्होंने अंबानी परिवार के जश्न से दूरी बनाए रखी। भले ही कांग्रेस के कई दिग्गज इन समारोहों का हिस्सा बने, राहुल-प्रियंका और सोनिया गांधी व्यक्तिगत् तौर पर आमंत्रित किए जाने बाद भी इनमें शामिल नहीं हुए। यह गांधी परिवार का अहंकार नहीं बल्कि यह उनके सही और गलत के फर्क को समझने का परिचायक है। राहुल हरेक मंच से प्रधानमंत्री मोदी पर अंबानी-अडानी को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहते हैं। ऐसे में यह नैतिक तौर पर गलत होता यदि वे अथवा उनके परिवार का कोई अन्य इन समारोहों का हिस्सा बनता। राहुल इस दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व नजर आते हैं। दूसरी तरफ कुछ अर्सा पहले ही कांग्रेस पर अंबानी समूह से करोड़ों की वसूली किए जाने का आरोप लगाने वाले मोदी जी ने इस समारोह में शामिल हो यह प्रमाणित करने का काम किया कि उनकी कथनी और करनी में भारी अंतर है। उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप को भी सही साबित कर दिया कि उनकी सरकार अडानी-अंबानी की सरकार है। समाजवाद का राग अलापने वाले अखिलेश यादव, उनकी पत्नी डिम्पल यादव, गरीब-गुरबा की बात करने वाले लालू यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे कांग्रेस नेता कमलनाथ, सचिन पायलट, डीके शिवकुमार, राष्ट्रवादी कांग्रेस के शरद पवार आदि ने भी इन समारोहों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा अंबानी की सत्ता को प्रणाम कर यह स्पष्ट कर दिया कि वे असल में कितने समाजवादी हैं और उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता कितनी खोखली है।

इसमें कोई शक-शुबहा नहीं कि खरबों रुपए खर्च कर अंबानी ने अपना सामाजिक रुतबा बढ़ाने का काम किया है। उनका व्यापारिक साम्राज्य केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका व्यापार फैला हुआ है। इस दृष्टि से यह विवाह समारोह उनके लिए एक बड़ा जनसंपर्क अभियान भी है। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए था कि इस प्रकार का वैभव प्रदर्शन अंततः समाज में विघटन और आक्रोश का कारण बन कई खरबपतियों को गहरे संकट में डालने का कारण बन चुका है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से निकल तीन गुप्ता बंधुओं ने दक्षिण अफ्रीका में अकूत संपदा कमाई और विशाल आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया। अंबानी-अडानी की तरह उनकी भी तूती दक्षिण अफ्रीका के सत्ता गलियारों में बोलती थी। फिर 2013 में इन भाइयों ने अपने वैभव का भौड़ा प्रदर्शन कर सब कुछ बर्बाद कर डाला था। जिन्हें याद नहीं उन्हें स्मरण करा दूं कि गुप्ता भाइयों ने अपनी भांजी का विवाह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया था। कई सौ करोड़ रूपए का यह आयोजन था जिसने आम दक्षिण अफ्रीकी के मन में इन भाइयों के प्रति खासा आक्रोश पैदा करने का काम किया। नतीजा इन भाइयों के अर्श से फर्श में आने तक सीमित नहीं रहा था, दक्षिण अफ्रीका के ताकतवर राष्ट्रपति जैकब जुमा का राजनीतिक भविष्य भी इसकी चपेट में आया, वे जेल तक भेजे गए और गुप्ता बंधु अंरराष्ट्रीय भगौड़े बन दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो गए। कुछ दिन पूर्व ही इन भाइयों में से एक को देहरादून की पुलिस ने एक आत्महत्या से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। स्मरण रहे अंबानियों की भांति ही गुप्ताओं की आर्थिक ताकत के समक्ष कई बड़े भारतीय राजनेता, धर्मगुरु, फिल्मी सितारे नतमस्तक रहा करते थे। आज इनसे मिलने तक से ऐसे सभी ‘गणमान्य’ बचते हैं। सारांश यह कि आर्थिक असमानता के शिखर पर पहुंचे देश में किसी धन कुबेर का अपने पारिवारिक समारोह में खरबों खर्च करना मेरी नजरों में निंदनीय है। मेरी नजरों में देश के कर्णधारों और धर्मगुरुओं का ऐसे समारोहों में शामिल होना भी निंदनीय है। आज नहीं तो कल, कभी न कभी यह आर्थिक असमानता वर्ग संघर्ष को जन्म देगी ही देगी और तब हालात इस कदर बिगड़ेंगे कि तमाम बल प्रयोग करके भी सत्ता इस वर्ग संघर्ष को काबू नहीं कर पाएगी। अभी जनता जनार्दन मुगालते में है कि भारत विश्व गुरु बनने, विश्व की बड़ी आर्थिक ताकतों में से एक बनने की राह पर है और आने वाला समय भारत का है। जब यह मुगालता खत्म होगा तब वर्ग संघर्ष गुरू होगा ही होगा। मैं इसी संभावना से आक्रांत हूं इसलिए ऐश्वर्य के ऐसे नग्न प्रदर्शन के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज करा रहा हूं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD