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उज्ज्वला से उज्जवल हुआ भविष्य

उज्ज्वला से उज्जवल हुआ भविष्य
कुमार गुंज
‘स्वस्थ रहेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ को अपना ब्रह्मवाक्य मानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कार्यकाल में उज्जवला योजना की शुरुआत की थी। गरीब महिलाओं को धुंआ और लकड़ी चूल्हे से निजात दिलाने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी। दावे के मुताबिक सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में आठ करोड़ के करीब गैस कनेक्शन बांटे। अब इसका परिणाम सामने आने लगा है। हाल में किए गए एक शोध में सामने आया है कि इस योजना के बाद महिलाओं को सांस, फेंफड़ों आदि बीमारियों में कमी आई है। यह शोध रिपोर्ट मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर लेकर आई है। अब देखना यह है कि क्या इस योजना के बाद सही में लोगों ने लकड़ी आदि के चूल्हे को पूरी तरह छोड़ा या नहीं।
प्रभावी तरीके से सरकारी योजनाएं लागू होने पर उसके परिणाम अच्छे आते ही हैं। उज्ज्वला योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ऐसी ही योजना है, जिसे प्रभावी तरीके से शुरू किया गया। अब इसके सकारात्मक नतीजे आने लगे हैं। यह योजना महिलाओं के लिए शारीरिक तौर पर वरदान साबित हुई है। दरअसल गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना उज्जवला को लेकर जो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं वह बताते हैं कि उज्ज्वला की वजह से पिछले दो वर्षों में ग्रामीण इलाकों की गरीब महिलाओं की बीमारी दर में गिरावट आई है।
बताया जा रहा है इस योजना के बाद भोजन पकाने के लिए जिस तरह से एलपीजी का इस्तेमाल हुआ उससे सबसे ज्यादा बदलाव फेफड़े और सांस से जुडी टीबी, दमा व दूसरी बीमारियों में हुआ है। इस संबंध में प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ तारिक महमूद ने अमेरिका में एक शोध पत्र पेश किया। इस शोध पत्र के मुताबिक ग्रामीण महिलाएं लकड़ी-कंडी और राठ के धुएं से बच रही हैं और यही उन्हें बीमार होने से बचाने में सबसे बड़ा सबब भी बन रहा है। कहा जा सकता है कि इस महत्वाकांक्षी योजना से महिलाओं को तमाम बीमारियों से निजात मिल रही है जो उन्हें सेहतमंद बनाने में मदद कर रही है। दरअसल अमेरिका के टेक्सास शहर में पेश किए गए रिसर्च के मुताबिक ग्रामीण इलाके की गरीब महिलाओं में बीमारी की सबसे बड़ी वजह धुआं होता है। लकड़ी, कंडी और राठ पर खाना बनाने के दौरान निकलने वाला धुआं कई बार धूम्रपान से भी ज्यादा खतरनाक होता है। खासकर फेफड़े और सांस से होने वाली ज्यादातर बीमारियां इसी धुएं की वजह से ही होती हैं।
रिसर्च में महिलाओं की बीमारी के जो कारण बताये गए हैं। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी की उज्जवला योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री ने इस योजना का जोर-शोर से प्रचार भी किया था। रिसर्च में यह पाया गया कि दो साल पहले तक ग्रामीण इलाके की 89 फीसदी गरीब महिलाएं लकड़ी-गोबर से तैयार कंडी और राठ से खाना बनाती थीं। इनमें से तमाम महिलाएं अब उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन पा चुकी हैं। गैस के इस्तेमाल से उन्हें न सिर्फ सहूलियत हो रही है। उनका वक्त बच रहा है। डॉ. तारिक महमूद ने पहले चरण में चार सौ महिलाओं पर रिसर्च किया और उसके बाद उनका काम ग्रामीण इलाके की गरीब एवं औसत आय वाली पांच हजार
महिलाओं पर चल रहा है। उन्होंने रिसर्च के आधार पर अमेरिका में जो शोधपत्र पेश किया, उसके मुताबिक पिछले दो सालों में ग्रामीण इलाके की गरीब महिलाओं में फेफड़े और सांस से जुडी बीमारियों में दस फीसदी की कमी आई। यही नहीं बीमार महिलाएं धुंए से दूर रहने के कारण तेजी से ठीक भी हो रही हैं।  रिसर्च के यह आंकड़े खुद मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध प्रयागराज के एसआरएन हॉस्पिटल में भी देखने को मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये आंकड़ा तो शुरुआती है। उज्ज्वला योजना के तहत जब तमाम दूसरी महिलाओं को गैस कनेक्शन मिल जाएंगे और वह लकड़ी व कंडी से पूरी तरह निजात पाने लगेंगी तो फेफड़े एवं सांस की बीमारी से परेशान महिलाओं की संख्या पचास फीसदी तक कम हो सकती है।
शोध बताता है कि धुएं की वजह से महिलाओं में सिर्फ फेफड़े से जुड़ी बीमारियां ही नहीं, बल्कि कैंसर जैसे कई दूसरे गंभीर रोग भी होते हैं। शोधकर्ता ने अमेरिका में पेश की गई अपनी रिसर्च में साफ तौर पर कहा है कि ग्रामीण इलाके में रहने वाली भारतीय महिलाओं की सेहत को लेकर यह योजना क्रांतिकारी कदम हो सकती है। बहरहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पिछले कार्यकाल में एक मई 2016 को गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने की जो शुरुआत की थी आज वह लाभदायक परिणाम दे रही है। यह सरकार के लिए सुखद खबर है। साथ ही पांच सालों में सात करोड़ से ज्यादा महिलाओं के लिए भी सुखद बात है जिन्होंने इसे पाकर धुएं से निजात पाई है। कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री उज्ज्जवला योजना गरीब महिलाओं को धुएं की कालिख से सेहत के उजाले की ओर ले जा रही है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) को पीएम ने 1 मई, 2016 को बलिया, उत्तर प्रदेश से शुरू किया था। शुरूआत में इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने मार्च 2019 तक देश में गरीबी रेखा के नीचे आने वाले पांच करोड़ गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन बांटने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन इस लक्ष्य को समय से पहले ही पूरा कर लिया गया, जिसके बाद लक्ष्य बढ़ाकर 2020 तक 8 करोड़ कर दिया गया। सरकार इस लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक जो भी परिवार बीपीएल कैटेगरी के अंतर्गत आते हैं उन्हें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का सीधा लाभ मिलता है।
 
‘महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए वरदान’
 
संसद में पूछे गए सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जवाब।
उज्जवला योजना से महिलाओं को कितना लाभ हुआ है?
उज्ज्वला योजना देश की गरीब महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए वरदान है। इस योजना की वजह से महिलाओं का स्वास्थ्य पहले से बेहतर हुआ और आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। ग्रामीण इलाकों में या कहें गरीब परिवार की महिलाएं पहले लकड़ी का इस्तेमाल कर चूल्हे में खाना बनाती थीं। जिसके चलते बहुत-सी महिलाओं को दमा-खांसी से जूझना पड़ता था। लेकिन केंद्र सरकार की उज्ज्वला गैस योजना की वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य में आ रही गिरावट के मामलों में कमी देखने को मिली है। यह देश के लिए सुखद खबर है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है।
अब तक इस योजना के तहत कितने परिवारों को कनेक्शन दिए गए हैं?
अब तक सरकार ने देशभर में 7 करोड़ 34 लाख परिवारों को गैस कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध करा दी है। इसके तहत अकेले उत्तर प्रदेश में ही 1 लाख 34 हजार कनेक्शन बांटे गए। कई लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया कि महिलाएं अभी भी लकड़ी या अन्य चूल्हे पर ही खाना बना रही है। उन मित्रों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि सरकार द्वारा बांटे गए कलेक्शनों के 86 फीसदी लाभार्थियों ने पहला सिलेण्डर वापस कर दूसरा सिलेण्डर खरीदा। जिसके बाद दूसरा सिलेण्डर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी उनके खाते में भी डाल दी गई। सरकार इस योजना को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार ने पांच सालों में 9 हजार से अधिक एलपीजी वितरण केंद्र खोले हैं।

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