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कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने से नाराज श्रमिक संगठन करेगा देशव्यापी हड़ताल

कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने से नाराज श्रमिक संगठन करेंगा देशव्यापी हड़ताल

कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ श्रमिक संगठन एकजुट हो गया है। संगठन कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) में 2 जुलाई से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जाने का निर्णय करते हुए नोटिस भेजा है। हालांकि, हड़ताल को लेकर अभी यह साफ नहीं हुआ है कि अधिकारी शमिल होंगे या नहीं। बताया जा रहा है कि इनके हड़ताल पर जाने से करीब 40 लाख टन उत्पादन का नुकसान होगा।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 41 कोयला ब्लॉक के वाणिज्यिक खनन को लेकर नीलामी प्रक्रिया की शुरूआत की है। सरकार ने देश के कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिया है। साथ ही ऐसा कहा जा रहा है कि कोयला खदानों की वाणिज्यिक खनन के लिए इस नीलामी से देश में अगले पांच से सात साल में 33,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश होगी।

ट्रेड यूनियनों ने कहा कि अनुषंगी इकाइयों के उनके संगठनों ने हड़ताल को लेकर नोटिस भेज दिया है या भेजने की प्रक्रिया में हैं। वहीं ‘ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन’ के महासचिव डीडी रामनंदन ने कहा, “हम दो जुलाई से प्रस्तावित हड़ताल पर आगे बढ़ रहे हैं। कोल इंडिया और एससीसीएल के सभी स्थायी और ठेका कर्मचारी हड़ताल में शमिल होंगे।”

श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगों में कोयला खानों की वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी पर रोक, कोल इंडिया की परामर्श इकाई सीएमपीडीआईएल के कंपनी से अलगाव पर रोक, संविदा कर्मचारियों को उच्च शक्ति प्राप्त समिति द्वारा तय वेतन को देना और एक जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच सेवानिवृत्त लोगों के लिए ग्रेच्युटी राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाना आदि शामिल है।

खबर यह भी है कि इस प्रस्तावित हड़ताल के जरिए सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को कोल इंडिया से अलग करने का भी विरोध किया जाएगा। यह कोल इंडिया की अनुषंगी है और तकनीकी परामर्श से जुड़ी है। वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने कहा है कि वे हड़ताल में शामिल होंगे।

गौरतलब हो कि 15 जून को ही कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी के बड़े श्रमिक संगठन निजी कंपनियों के लिए खोलने और वाणिज्यिक खनन को मंजूरी देने के निर्णय के खिलाफ 2 जुलाई से तीन दिन की हड़ताल पर जाने की बात कही थी। जबकि केंद्रीय श्रमिक संगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने 14 जून को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस किया था जिसमें भारतीय मजदूर संघ, हिंद मजदूर सभा, इंटक, एटक और सीटू के नेता शामिल हुए थे।

जिसमें हिंद मजदूर सभा से संबद्ध हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के अध्यक्ष नाथूलाल पांडे ने कहा था कि भारतीय मजदूर संघ समेत सभी केंद्रीय श्रमिक संगठन कोयला क्षेत्र में निजी कंपनियों के खनन को रोकने के लिए भविष्य में सभी लड़ाइयों में साथ रहेंगे। वहीं, छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य क्षेत्र के नौ सरपंचों ने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खनन नीलामी पर गहरी चिंता जाहिर की थी।
उन्होंने कहा था कि यहां का समुदाय पूर्णतया जंगल पर आश्रित है, जिसके विनाश से यहां के लोगों का पूरा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। दूसरी तरफ ग्राम प्रधानों का कहना था कि एक तरफ प्रधानमंत्री आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ खनन नीलामी की इजाजत देकर आदिवासियों और वन में रहने वाले समुदायों की आजीविका, जीवनशैली और संस्कृति पर हमला करवा रहे हैं।

हालांकि, इन सभी चिंताओं को दरकिनार करते हुए नरेंद्र मोदी ने खनन नीलामी प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है। उनका साफ कहना है कि देश कोरोना वायरस संक्रमण से अपनी लड़ाई जीत लेगा और इस संकट को एक अवसर में बदलेगा। यह महामारी भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मोदी का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत होना देश के कोयला क्षेत्र को ‘दशकों के लॉकडाउन’ से बाहर निकालने जैसा है।

उन्होंने कहा था, “जो देश कोयला भंडार के हिसाब से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश हो और जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक हो। वो देश कोयले का निर्यात नहीं करता, बल्कि हमारा देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला आयातक है। बड़ा सवाल ये है कि जब हम दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक बन रहे हैं तो हम सबसे बड़े निर्यातक क्यों नहीं बन सकते?”

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नीलामी प्रक्रिया का उद्घाटन किया था। उसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन भी शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “हमने साल 2030 तक, मतलब आने वाले दशक में करीब 10 करोड़ टन कोयले को गैस में बदलने का लक्ष्य रखा है। मुझे बताया गया है कि इसके लिए 4 परियोजनाओं की पहचान हो चुकी है और इन पर करीब-करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।”

बता दें कि यह नीलामी कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की गई है। सरकार के मुताबिक, इन कोयला खदानों से होने वाला उत्पादन देश के 2025-26 तक अनुमानित कोयला उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत का योगदान करेगा। साथ ही इससे 2.8 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें करीब 70,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 2.10 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

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