संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक पर कोई भी टिप्पणी देने से साफ़ इंकार कर दिया गया है। भारत के निचले सदन में यह बिल पास हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप प्रवक्ता फरहान हक से जब विधेयक के पारित होने के बारे में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ,’जहां तक मुझे जानकारी है, यह कानून एक विधायी प्रक्रिया से गुजर रहा है। जब तक यह विधेयक विधायी प्रक्रिया से गुजर रहा है ,तब तक हम इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’

उन्होंने अपने अपने साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हमारी चिंता केवल यह सुनिश्चित करने की है कि सभी सरकारें गैर-भेदभावकारी कानून बनाए।
नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार,9 दिसंबर को लोकसभा में पास हो गया है। हालाँकि संसद में इस बिल का कई सांसदों ने जमकर विरोध किया ,परन्तु अमित शाह द्वारा सभी को जवाब दिया गया। सोमवार को लोगसभा ने बिल को 311 मतों से पारित कर दिया था जबकि इसके विपक्ष में 80 वोट पड़े थे।
इस विधेयक के अनुसार 2014 तक भारत में पाकिस्तान ,अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी। इसके अलावा इन तीन देशों के सभी छह धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता पाने के नियम में भी छूट दी जाएगी। ऐसे सभी प्रवासी जो छह साल से भारत में रह रहे होंगे उन्हें इस बिल के कारण नागरिकता मिल पाएगी। इससे पहले यह समय सीमा 11 साल थी।

