वर्तमान में पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने कहा है कि वह संविधान के अनुसार काम करेंगे और बिलों को स्वीकार करने में देरी के लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। तृणमूल ने कहा कि राज्यपाल ने जानभूझकर कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दी है। वही धनखड़ ने सरकार पर धीमी गति से काम करने और उनके सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और राज्यपाल के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच विधानसभा का शीतकालीन सत्र मंगलवार को अचानक स्थगित कर दिया गया। तृणमूल ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ द्वारा जानभूझकर कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दी गई। वही जवाब में धनखड़ ने आरोप लगाया कि सरकार धीमी गति से काम करती है साथ ही सवालों का जवाब भी नहीं दिया जाता है।
राजनीतिक विवाद बन चुके इस मामले को लेकर संसद में भी हंगामा हुआ। इस मुद्दे को तृणमूल पार्टी द्वारा दोनों सदनों में उठाया गया। राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति न मिलने पर उन्होंने सदन से बहिर्गमन किया। तृणमूल सांसदों द्वारा विधेयकों को मंजूरी देने में कथित तौर पर देरी को लेकर धनखड़ की कड़ी आलोचना की और उन्हें हटाने की मांग भी की। जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा में वरिष्ठ मंत्रियों सहित टीएमसी विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया और बिलों को मंजूरी देने में देरी पर धनखड़ को फटकार लगाई।

