सियासी संकट से जूझ रहे नेपाल में इन दिनों संसद भंग होने से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज तीन फरवरी को संविधानिक परिषद की बैठक बुलाई है। इससे देश में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गई है। दरअसल संसद भंग करने के खिलाफ एक फरवरी को संसद के पास विरोध कर रहे छात्रों की पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद यह बैठक बुलाई गई है।
बता दें कि एक फरवरी को यह झड़प सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के ऑल नेपाल नेशनल फ्री स्टूडेंट यूनियन (एएनएनएफएसयू) से जुड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई थी। इससे पहले 31 जनवरी को तीन पूर्व नेपाली प्रधानमंत्रियों पुष्प कमल दहल, माधव कुमार नेपाल और झलनाथ खनल ने रविवार को संसद भंग किए जाने के खिलाफ काठमांडो के मैत्रीघर में विरोध प्रदर्शन किया था ।
इन तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों में से दहल और माधव कुमार नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। पार्टी में अब दो फाड़ हो चुके है। पिछले साल 20 दिसंबर को पीएम ओली ने संसद को भंग करने का फैसला किया था, जिसके बाद पार्टी में कलह और बढ़ गई। ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा संसद को भंग करने के बाद पीएम ने 30 अप्रैल और 10 मई को चुनाव प्रस्तावित किया है।
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनल ने बताया कि हम अपना विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रखेंगे, जब तक प्रतिनिधि सभा बहाल नहीं हो जाती। हम इस लड़ाई को अनंतकाल तक जारी रखेंगे। इसके लिए हम धरना, सामूहिक रैलियां, जनसभाएं आयोजित करेंगे। इस बीच, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष गणेश तिमिल्सीना ने ओली के कदम पर कहा कि इस पर इंतजार किया जाना चाहिए।
एनसीपी से निकाले जा चुके हैं ओली
ओली के संसद भंग करने के फैसले के बाद सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने ओली को ही पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि, बाद में नेपाल के चुनाव आयोग ने ओली को पद से हटाए जाने और पार्टी से निकाले जाने के नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के फैसले को भी खारिज कर दिया था।

