वीमेंस प्रीमियर लीग के दूसरे संस्करण की नीलामी में कर्नाटक से घरेलू क्रिकेट खेलने वाली 20 साल की वृंदा दिनेश करोड़पति बन गईं। उन्हें यूपी वॉरियर्ज ने 1.30 करोड़ रुपए में खरीदा। इसके साथ ही वे वीपीएल इतिहास में एक करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने वाली पहली तो काशवी गौतम दूसरी करोड़पति खिलाड़ी बन गई हैं
वीमेंस प्रीमीयर लीग यानी वीपीएल के दूसरे संस्करण में खिलाड़ियों की नीलामी हो चुकी है। इस सीजन में एक ओर जहां ऑस्ट्रेलियाई आलराउंडर सदरलैंड और कर्नाटक की आलराउंडर काशवी गौतम 2-2 करोड़ रुपए के साथ सबसे महंगी खिलाड़ी रहीं तो कई खिलाड़ी अपने बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा कीमत पर बिकीं। काशवी को गुजरात जायंट्स ने दो करोड़ तो वृंदा को यूपी वॉरियर्ज ने 1 .3 करोड़ में खरीदा। वहीं सबसे बड़ा आश्चर्य श्रीलंका की कप्तान चमारी अट्टापट्टू के लिए हुआ। वो भी तब जब पिछली बार डब्ल्यूवीपीएल में वह दूसरी सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज रही थी। वह एक्लेरिड राउंड में भी जगह पाने में कामयाब नहीं हो पाईं। 50 लाख के बेस प्राइस में आक्शन में शामिल होने वाली ड्रिएंड्रा डॉटिन, किम गार्थ को भी खरीददार नहीं मिले। जबकि स्कॉटलैंड की कैथरीन ब्रेस ऐसोसिएट देश की अकेली ऐसी खिलाड़ी बनी जिनको 10 लाख में गुजरात ने खरीदा।
दूसरी तरफ एकता बिष्ट पर आरसीबी ने 60 लाख की बोली लगाई जो कैप्ड भारतीय खिलाड़ियों में सबसे अधिक रही। इसके अलावा वेदा कृष्णमूर्ति को गुजरात और एस मेघना को आरसीबी ने उनके बेस प्राइस 30 लाख में ख़रीदा। भारतीय खिलाड़ियों में देविका वैघ को भी कोई खरीददार नहीं मिला। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा भारत की अनकैप्ड खिलाड़ी काशवी गौतम और वृंदा दिनेश की हो रही है। काशवी डिमांड में रही क्योंकि उन्होंने लगातार अपनी गेंदबाजी और डेथ ओवरों में बल्लेबाजी से प्रभावित किया है। पिछले दिनों खेली गई महिला टी-20 ट्रॉफी में उन्होंने सात मैचों में 4.14 की इकॉनमी से 12 विकेट लिए थे। वह इंडिया ए में भी चुनी गई और जून में हांगकांग में हुई एसीसी एमर्जिंग टूर्नामेंट की अंडर-23 टीम का भी हिस्सा रहीं।
काशवी की तरह, वृंदा भी चयनकर्ताओं और स्काउट्स के रडार पर रही हैं। अगस्त में वृंदा ने सभी पांच फ्रेंचाइजी के साथ ट्रायल किया। उनके लिए गृह राज्य की फ्रेंचाइजी आरसीबी ने सबसे पहले बोली लगाई इसके बाद गुजरात भी आगे आई, लेकिन अंत में वह 1 .3 करोड़ रुपए में यूपी वॉरियर्ज के साथ गईं। पिछले दो घरेलू सीजन में वृंदा ने पावर हिटर के तौर पर नाम कमाया है। 22 साल की उम्र में वह इंडिया-ए के लिए चुनी गई और इंग्लैंड ए के लिए तीनों मैच खेलीं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने कर्नाटक को सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वह टूर्नामेंट में पांचवीं सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज थीं, जिसमें सेमीफाइनल में राजस्थान के खिलाफ 81 रन की पारी भी शामिल थी। ऑस्ट्रेलिया की फीब लिचफील्ड पहली खिलाड़ी थी जिन्हें गुजरात जायंट्स ने एक करोड़ रुपए में खरीदा। बांए हाथ की यह बल्लेबाज जिसने 2019 में 16 साल की उम्र में सनसनी फैलाई थी। उन्होंने इस डब्ल्यूबीबीएल सीजन में भी काफी रन बनाए थे। इसके अलावा डैनी वायट को यूपी वॉरियर्ज ने उनके बेस प्राइज और कैट क्रॉस को आरसीबी ने खरीदा। साउथ अफ्रीका की तेज गेंदबाज शबनिम इस्माइल को मुंबई इंडियंस ने 1 .2 करोड़ में खरीदा।
रकम को लेकर कन्फ्यूज हो गई थीं वृंदा
एक साक्षात्कार में वृंदा ने कहा जब मैं नेट्स में बॉलिंग कर रही थीं, तब साथी खिलाड़ी शिशिरा गौडा टीम एनालिस्ट माला रंगास्वामी के कान में कुछ बोलते नजर आईं। वृंदा को लगा कि कुछ बड़ा हुआ है। इसके बाद पूरी कर्नाटक टीम उन्हें बधाई देने के लिए पहुंच गईं। वृंदा ने बताया, ‘हम ट्रेनिंग कर रहे थे, मैं बॉलिंग कर रही थी। मैंने मेरी टीम-मेट को दूसरी साथी से बात करते सुना, ‘उन्होंने 1 .30 में ले लिया है’ मैं बीच में आई और पूछा क्या, ‘क्या! 1 ़3 लाख?’ तो उन्होंने जवाब दिया ‘नहीं’। मैं भी जानती थी कि 1 .3 लाख तो नामुमकिन है। फिर मैंने पूछा श्क्या? 1 .3 करोड़?’ तब उसने कहा, ‘हां’। तब अचानक से सभी बल्लेबाज, विकेटकीपर मेरे पास आए और मुझे गले लगा लिया।
आक्शन की तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी बनीं वृंदा
वृंदा अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी हैं, उन्होंने इंटरनेशनल डेब्यू नहीं किया है। उनकी बेस प्राइस 10 लाख थी और किसी को उम्मीद नहीं थी कि उनकी कीमत एक करोड़ को छू जाएगी। लेकिन वह 1.30 करोड़ रुपए में

बिकीं और सभी को चौंकाकर इस आक्शन की तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी बन गईं। वृंदा की वीपीएल में एंट्री का सबसे बड़ा कारण घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और वीपीएल टीम को दिए ट्रायल्स रहे। पहले सीजन के बाद वीपीएल टीमों ने ऑफ सीजन ट्रायल्स रखे, इनमें वृंदा भी शामिल हुईं। हिस्सा लेने के कारण टैलेंट हंट स्काउट्स का ध्यान वृंदा पर गया और आक्शन में उन पर बोली लग गई।
वृंदा ने बताया कि जून में उन्हें सभी पांच फ्रेंचाइजी ने ट्रायल के लिए बुलाया। इससे पहले स्काउट्स ने हांगकांग में एसीसी विमेंस एमर्जिंग टीम कप टूर्नामेंट के फाइनल में उनकी बैटिंग भी देखी थी। एसीसी विमेंस एमर्जिंग टीम एशिया कप टूर्नामेंट का फाइनल इंडिया और बांग्लादेश के बीच खेला गया था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने 29 बाल में 36 रन की पारी खेली और भारत की जीत में अहम रोल निभाया। वृंदा इस टीम का शुरू से हिस्सा नहीं थी, एस यशस्त्री के चोटिल होने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया। फाइनल की प्लेइंग-11 में भी उनके शामिल होने की संभावनाएं बहुत कम लग रही थीं, लेकिन समय पर मुस्कान मलिक ग्राउंड में नहीं पहुंच पाई थी तो वृंदा को मौका मिल गया। इस साल वृंदा ने डोमेस्टिक वनडे टूर्नामेंट में भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। सीनियर वनडे में वृंदा तीसरी टॉप रन स्कोरर रहीं। उन्होंने 11 परियों में 477 रन बनाए हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल वीपीएल का पहला संस्करण केवल मुंबई में दो स्थानों पर खेला गया था और वर्तमान में इंग्लैंड महिला टीम के खिलाफ खेली जा रही टी-20 सीरीज का आयोजन भी सिर्फ मुंबई में ही किया जा रहा है। पिछली बार महिला प्रीमियर लीग के मुकाबले 4 मार्च से शुरू हुए थे। वहीं, 26 मार्च को लीग का फाइनल मुकाबला खेला गया था जो मुंबई इंडियंस ने जीता था। इस बार वीपीएल लीग के दूसरे संस्करण के मुकाबलों को लेकर संभावना जताई जा रही थी कि इस बार इसका आयोजन अलग-अलग प्रदेशों में होगा लेकिन अब बताया जा रहा है कि महिला प्रीमियर लीग का दूसरा सीजन अगले साल 22 फरवरी से 17 मार्च के बीच खेला जा सकता है। यह जानकारी बीसीसीआई की ओर से सभी फ्रेंचाइजियों को दे दी गई है। हालांकि आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संभवतः जनवरी में इस लीग का पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। इस बीच बीसीसीआई सचिव जय शाह ने नीलामी के बाद कहा कि ‘‘यह तय हो गया है कि हम फरवरी में इस टूर्नामेंट का आयोजन करेंगे। संभवतः फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से यह शुरू होगा। जहां तक आयोजन स्थल का सवाल है, यह केवल एक राज्य में आयोजित किया जाएगा ताकि खेल से जुड़े हुए सभी जरूरी चीजों को उपलब्ध कराया जा सके। हम अगले संस्करण में लॉजिस्टिक के दृष्टिकोण से अलग-अलग जगहों पर इसके आयोजन के बारे में विचार करेंगे। ‘हम इस टूर्नामेंट का आयोजन बेंगलुरु, कर्नाटक या उत्तर प्रदेश में भी कर सकते हैं। हमारे पास बहुत विकल्प हैं, यहां तक कि गुजरात में भी इसके आयोजन के बारे में सोचा जा सकता है।

