आम चुनाव के तीसरे चरण के बीच गत सप्ताह विपक्षी गठबंधन की सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत के सहारे बड़ा दांव खेला तो वहीं दूसरी तरफ इससे पहले दूसरे चरण के मतदान के दौरान भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वो मुसलमानों का सिर्फ इस्तेमाल कर उनके हित को दांव पर लगाकर उनकी बात करती है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के चलते सवाल उठ रहा है कि मुसलमानों का असली हितैषी कौन है?
आम चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है राजनीतिक दल एक-दूसरे पर और ज्यादा आक्रामक होते जा रहे हैं। सभी पार्टियां एक के बाद एक दांव चलकर अपने विरोधियों के हौसलों को पस्त करने की
कोशिश में जुटे हैं। इसी क्रम में गत सप्ताह राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुसलमानों के लिए आरक्षण की वकालत करके सियासी भूचाल ला दिया। जिसके बाद पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता लालू यादव के बयान की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि लालू ने तीसरे चरण के मतदान समाप्त होने से पहले अपने इस बयान पर यू-टर्न ले लिया हो लेकिन उन्होंने इसके सहारे बड़ा दांव खेला है।
वहीं दूसरी तरफ इससे पहले दूसरे चरण के मतदान के बीच भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगा कि वो मुसलमानों का सिर्फ इस्तेमाल कर उनके हित को दांव पर लगाकर उनके हित की बात करती है। यही नहीं चुनाव से पहले और चुनाव के आगाज के दौरान पीएम मोदी की कई ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जो चर्चा का विषय रहीं। खासकर बोहरा समाज के लोगों के साथ पीएम मोदी। एक दिवसीय क्रिकेट विश्वकप फाइनल में भारत की हार पर टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में मोहम्मद शमी को गले लगाते पीएम मोदी। सऊदी अरब, यूएई के नेताओं से गले मिलते पीएम मोदी। कश्मीरी बच्चों से भी मिलते दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठता कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन मुसलमानों के लिए किस हद तक गंभीर है? क्या देश का मुसलमान वाकई बीजेपी के करीब आया है? देश में मुसलमानों का असली हितैषी कौन है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आम चुनाव के अन्य चरणों में विपक्षी गठबंधन पुरजोर तरीके से बीजेपी को टक्कर देना चाहता है। यही कारण है कि लालू यादव ने तीसरे चरण के मतदान के बीच मुस्लिम आरक्षण का दांव खेला और मतदान खत्म होने से पहले पलटी भी मार ली। लालू के बयान के पीछे सिर्फ बीजेपी को मुस्लिम विरोधी जाहिर करने की मंशा हो सकती है। हालांकि लालू के इस बयान से भाजपा को कुछ खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन इंडिया गठबंधन के नेताओं के पास बीजेपी को मुस्लिम विरोधी बताने का एक और मौका मिल गया है। गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान के बांसवाड़ा में देश की संपत्ति मुस्लिमों में बांटने को लेकर पीएम मोदी के दिए बयान की कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने आलोचना की थी। बयान के अगले दिन कांग्रेस नेताओं का एक दल चुनाव आयोग के पास पहुंचा और मोदी के भाषण को लेकर आयोग के सामने अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। इस मामले ने बहुत तूल पकड़ा। विपक्षी दलों ने बीजेपी को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की।
अब पीएम नरेंद्र मोदी ने लालू प्रसाद की मुसलमानों को आरक्षण के बारे में टिप्पणी पर कहा कि विपक्षी गठबंधन खतरनाक खेल खेल रहा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने की योजना बना रहा है। संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता है लेकिन इंडिया गठबंधन संविधान को बदलना चाहता है।
लालू प्रसाद की टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ता में आने पर विपक्षी गठबंधन संविधान के मौलिक ढांचे में बदलाव करके अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण प्रदान करेगा। ‘इंडियन अलायंस’ के खिलाफ बीजेपी का आरोप राजद अध्यक्ष के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मुसलमानों को आरक्षण का लाभ देने के पक्ष में हैं।
मुस्लिमों के प्रति कांग्रेस कितनी गंभीर?
कर्नाटक में कांग्रेस ने ओबीसी कैटेगरी से मुसलमानों को 4 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया है। इसे लेकर बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के एक बयान को पीएम मोदी चुनावी रैलियों में खूब उठा रहे हैं। भाजपा और मोदी का दावा है कि मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है, पीएम ने जनता को संबोधित करते समय कहा कि ‘इन्हें ऐसा सबक सिखाइए कि ये लोग आरक्षण में छेड़छाड़ करने से डर जाएं।’
भाजपा ने किया डॉ. अंबेडकर की आपत्ति का जिक्र
कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए बीजेपी ने एक वीडियो जारी किया। इसमें दावा किया गया कि मनमोहन सिंह ने साल 2006 में मुसलमानों को लेकर जो बयान दिया था, उस पर वो 2009 में भी कायम थे। इन बयानों को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वो एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकार छीनकर उसे मुसलमानों को देना चाहती है। खुद डॉ. भीमराव अंबेडकर ने पंडित जवाहर लाल नेहरू पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाया था।
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक चुनावी सभा में कहा, ‘बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा था कि पंडित नेहरू ने 2000 भाषण दिए, लेकिन एक बार भी अनुसूचित जाति के कल्याण की बात नहीं की।’
कांग्रेस ने कब-कब किया मुसलमानों के लिए आरक्षण का ऐलान यह पहला मामला नहीं है, जब कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को आरक्षण देने और उस पर उपजे विवादों की वजह से चर्चा में है। बीते 30 साल में मुस्लिम आरक्षण को लेकर कांग्रेस 5 बार बैकफुट पर जा चुकी है।
सबसे पहले कांग्रेस ने वर्ष 1994 में पहली बार मुसलमानों को अलग से आरक्षण देने का वादा किया था। उस समय आंध्र प्रदेश में विजय भास्कर रेड्डी की सरकार ने मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। रेड्डी ने अपने आदेश में कहा था- ‘हम फिर से सरकार में आते हैं तो मुसलमानों के 14 जातियों को ओबीसी के सब कोटे से 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।’ रेड्डी के इस फैसले का आंध्र प्रदेश में भारी विरोध हुआ और आखिरकार कांग्रेस विधानसभा चुनाव हार गई थी।
दूसरा 2004 में कांग्रेस ने अलग से मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी। सरकार बनने के बाद इसे लागू भी किया गया। हालांकि 2010 में इस पर रोक लगा दी गई और फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के पास है।
तीसरा ऐलान कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में अपने मेनिफेस्टो में रंगनाथ मिश्र और अमिताभ कुंडू कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण देने की बात कही थी। जिसे बीजेपी ने चुनावी मुद्दा बनाया था। रंगनाथ मिश्र आयोग ने देशभर में मुसलमानों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की थी। कमीशन ने यह भी कहा था कि मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए दलित कैटेगरी में बदलाव किया जाए।
चौथा ऐलान 2012 में उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने शैक्षणिक संस्थानों में मुसलमानों को आरक्षण देने की घोषणा की थी। केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी के लिए आवंटित 27 फीसदी आरक्षण में से 4.5 प्रतिशत आरक्षण मुस्लिम समुदाय को देने की बात कही थी। सरकार ने इसमें मुस्लिम समुदायों के 20 जातियों को शामिल किया। कांग्रेस की इस घोषणा पर पूरे देश में बवाल मच गया था। चुनाव की घोषणा होने की वजह से आयोग भी एक्शन में आ गया और आयोग ने केंद्र की इस घोषणा पर रोक लगाने का फैसला सुनाया। हालांकि 2012 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई।
पांचवां ऐलान साल 2014 में महाराष्ट्र की पृथ्वीराज चव्हाण सरकार ने भी मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। सरकार ने यह घोषणा मराठाओं को 16 प्रतिशत आरक्षण देते समय की थी जिसका शिवसेना और बीजेपी ने पुरजोर विरोध किया था। हालांकि महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि 32 प्रतिशत मराठाओं को अगर 16 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो फिर 11 प्रतिशत मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं? 2014 में केंद्र से कांग्रेस की सत्ता चली गई जिसके बाद भाजपा सरकार ने इस आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया था।
क्या बीजेपी के साथ आ रही मुस्लिम आबादी?
एक रिसर्च के मुताबिक 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 4 फीसदी मुसलमानों का वोट मिला जबकि 2014 के चुनाव में यह आंकड़ा 8 प्रतिशत तक पहुंच गया। माना जा रहा है कि 2019 के आम चुनाव में भी आंकड़ा यही रहा। आंकड़ों से समझ में आता है कि मुस्लिम वोट कुछ हद तक खिसककर बीजेपी के साथ आया है।
किस आधार पर भाजपा करती है मुस्लिमों की हितैषी होने का दावा?
सवाल उठते हैं कि बीजेपी ने ऐसे कौन से फैसले किए, जिनके आधार पर वो मुसलमानों का हितैषी होने का दावा कर रही है? माना जा रहा है कि भाजपा सरकार की नीतियों ने मुस्लिम आबादी को पार्टी के करीब लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पहले 5 साल में सरकार ने इस समाज के लिए 22 हजार करोड़ रुपए की अलग-अलग योजनाएं शुरू की। इसके बाद सरकार कानून बनाकर 3 तलाक को खत्म किया। हज कोटे को 2 लाख तक बढ़ाया और इन फैसलों का मुस्लिम मतदाताओं पर असर भी हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुसलमानों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता की जो तस्वीरें दिखती हैं, वो अपने आप में इस बात की तस्दीक करती हैे कि मोदी क्षेत्र, उम्र और सीमा से परे हैं। मुस्लिम देशों में प्रधानमंत्री मोदी और अरब के नेताओं के बीच रिश्तों की जो मिठास और गहराई दिखी, उससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत का मान बढ़ा और देश में भी प्रधानमंत्री मोदी कि छवि को नए आयाम मिले हैं।
मुस्लिम वोटरों के बीच ऐसे जगह बना रही बीजेपी
पीएम मोदी के निर्देश पर बीजेपी पिछले कुछ सालों से मुसलमानों के बीच अपनी जगह बनाने में जुटी है। बीजेपी ने हाल के दिनों में मुस्लिम समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ने के लिए कई अभियान और कार्यक्रम आयोजित किए। बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा देशभर में मुस्लिम समाज के बीच इस तरह के 23 हजार के लगभग ‘संवाद कार्यक्रम’ कर चुका है। इन कार्यक्रमों के जरिए देश के 1500 के लगभग विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक देश की सभी लोकसभा सीटों पर कुल मिलाकर 18 लाख से ज्यादा मोदी मित्र बनाए गए हैं। बीजेपी ‘ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ के नारे के साथ मुस्लिम समाज को पीएम मोदी के साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

