महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार न बना पाने का मलाल बीजेपी को 5 साल तक तो रहेगा ही, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी इस बात से होगी की अंतिम मौके पर शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़ दिया।वही दूसरी तरफ भाजपा महाराष्ट्र में जीतकर भी हार गई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे ?

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बिछी शतरंज की मोहरे किसके हाथ मे हैं और उन्हें कौन चला रहा है। शिवसेना लगातार भाजपा पर आरोप लगा रही है। बीजेपी द्वारा सरकार बनाने से इनकार करने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने शिवसेना को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया, लेकिन अभी तक शिवसेना की ओर से भी सरकार बनाने को लेकर राज्यपाल को कोई जवाब नहीं दिया गया है। इसके लिए पार्टी के पास सोमवार शाम 7.30 बजे तक का समय है।

महाराष्ट्र की राजनीति की गेंद अब शिवसेना के पाले में चली गई है और वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकती है, लेकिन इसके लिए उसके सामने अभी भी कई गतिरोध बने हुए हैं। एमसीपी ने तो गठबंधन के लिए एक शर्त रखी, जिसे शिवसेना ने मान ली, लेकिन एनसीपी के साथ ही पार्टी को कांग्रेस का भी साथ चाहिए, नहीं तो सरकार बनाना असंभव ही होगा।

बीजेपी का कहना है कि शिवसेना ने उन्हें धोखा दिया और सत्ता के लालच में एन मौके पर अपने सीएम की मांग की। इसके साथ ही उन्होने जनता के विश्वास को भी ठोस पहुंचाई है, जिन्होने बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के कारण शिवसेना को वोट दिया।

