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भाजपा के समर्थन में क्यों आाए धनंजय?

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के जौनपुर से महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह के बीजेपी प्रत्याशी बनने के बाद बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने चुनाव में उतरने की हुंकार भरी थी। धनंजय के जेल जाने पर उनकी पत्नी श्रीकला ने बसपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी किया। लेकिन अब वह चुनाव के बीच में बसपा छोड़कर खुद बीजेपी के साथ हैं। सियासी गलियारों में हर कोई जानने को उत्सुक है कि आखिर वह क्या वजह है जिसके चलते धनंजय बीजेपी के करीब आ गए? कहा जा रहा है कि कृपाशंकर सिंह का नाम बीजेपी प्रत्याशी के रूप में घोषित होने के बाद धनंजय ने चुनाव मैदान में उतरने को लेकर जो घोषणा की थी, उसके पीछे एक बड़ी वजह थी। सूत्रों के मुताबिक दो केंद्रीय एजेंसियों में चल रहे दो अलग-अलग मामलों की जांच की आंच धनंजय तक पहुंच सकती थी। धनंजय ने पहले बैकडोर से बीजेपी से जुड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। धनंजय बिहार में बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू से जुड़े थे। वह प्रयासरत थे कि जौनपुर सीट एनडीए के सहयोगी जेडीयू के खाते में चली जाए और वह उसके टिकट पर चुनाव लड़ लें। लेकिन अचानक कृपाशंकर सिंह की पीएम मोदी से मुलाकात की तस्वीर सामने आई और फिर जौनपुर प्रत्याशी के रूप में उनके नाम की घोषणा हो गई। उनके नाम की घोषणा होते ही धनंजय ने मोर्चा खोल दिया। बार-बार सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए धनंजय और उनके समर्थक चुनाव मैदान में उतरने की ताल ठोंकने लगे। इससे पहले विधानसभा चुनाव के समय भी धनंजय ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के जरिए चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने उस वक्त भाजपा के संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने मुलाकात की पर बात नहीं बन सकी थी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बाहुबली धनंजय सिंह जौनपुर की राजनीति की एक अहम धुरी हैं, क्योंकि जौनपुर में क्षत्रियों के साथ उनका अपना एक बड़ा वोट बैंक है। इसके अलावा अन्य वर्गों में भी धनंजय की खासी पकड़ है। वह एक बार सांसद, एक बार खुद और एक बार पिता को विधायकी जिता चुके हैं। उनकी पत्नी श्रीकला वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। धनंजय को अपने पक्ष में लाए बिना बीजेपी का जौनपुर का किला फतह करने का मंसूबा पूरा होने में बहुत अड़चनें थीं। इसलिए अंदरखाने धनंजय पर दबाव बनाने के लिए घेराबंदी की जा रही थी। शिकंजा कसता दिखा तो धनंजय ने कृपाशंकर के जरिए ही अपनी बात आलाकमान तक पहुंचाई। आलाकमान से मुलाकात करवाने में भी कृपाशंकर की ही अहम भूमिका रही।

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