कांग्रेस में 18 साल तक रहकर मध्यप्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करने वाले सिंधिया परिवार के शहजादे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कल उस समय कांग्रेस को अलविदा कह दिया जब पूरा देश होली का जश्न मना रहा था। इसके साथ ही कांग्रेस की होली बेरंग हो गई। जबकि दूसरी तरफ बीजेपी की बांछे खिल गई। भाजपा में होली के दिन दीपावली मनाई गई। सिंधिया ने फिलहाल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और वह आज बीजेपी में शामिल हो गए है।

आज दोपहर को 12:00 बजे सिंधिया को बीजेपी में शामिल होना था। लेकिन किसी कारणवश ऐसा नहीं हो सका। आज उनकी जॉइनिंग 2 बजे तक के लिए टाल दी गई। सूत्र बता रहे हैं कि सिंधिया और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है। बताया जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश की राजनीति में सिरमौर बनना चाहते हैं। यानी कि उन्हें सीएम का पद चाहिए। लेकिन बताया जा रहा है कि दूसरी तरफ बीजेपी इसके लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा सदस्य बनाने का आश्वासन दिया है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सिंधिया को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया जा सकता है। हालांकि यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है कि सिंधिया की किस्मत में क्या लिखा है। भाजपा फिलहाल सिंधिया को मध्य प्रदेश का सीएम बनाने के मूड में नहीं दिखती है। शायद यही वजह है कि बीजेपी ने मध्यप्रदेश विधायक दल का नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बना दिया है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम बनाने की बात सहज बनती नहीं दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के 22 विधायक कांग्रेस को अलविदा उनके साथ आ चुके हैं। अगर सिंधिया बीजीपी में जाते हैं तो उनके साथ सभी 22 विधायकों के बीजेपी में जाना तय है। बताया जा रहा है कि सिंधिया के साथ आए 22 विधायकों में 8 फिलहाल कमलनाथ सरकार में मंत्री है। बहरहाल, मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के पास कांग्रेस के सिर्फ 92 विधायक रह गए हैं। कांग्रेस के पास अपने 114 विधायको है इसके अलावा कमलनाथ के साथ सपा-बसपा और निर्दलियों समेत 121 विधायक हैं। जबकि बेजीपी के पास फिलहाल 107 विधायक है। अगर सिंधिया के 22 विधायक बीजेपी में चले जाते है तो बीजेपी के पास 129 विधायक हो जाएंगे।

ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर कमलनाथ मध्य प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं तो वह मुगालते में है। क्योंकि उन्हें सरकार बनाने के लिए विधायकों का जितना समर्थन चाहिए उतना समर्थन फिलहाल उनके पास नहीं दिख रहा है। कमलनाथ खाटी राजनेता हैं और वह राजनीति के हर दांव पेच में माहिर हैं। अंतिम समय तक वह हार मानने वालों में नहीं हैं। फिलहाल वे यह भी दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार अल्पमत में नहीं है। हालांकि, यह तो कमलनाथ ही जानते हैं कि 22 विधायकों के कांग्रेस छोड़कर चले जाने के बाद भी आखिर वह किस आधार पर अपनी सरकार बचाने की घोषणा कर रहे हैं।

