कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर का नाम अक्सर कांग्रेस के विद्रोही नेता के तौर पर लिया जाता है। इस बीच उन्होंने ऐसा बयान दे डाला है जो सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर मंथन और बेचैनी की वजह बन गया है। थरूर ने साफ कहा है कि देश की राजनीति कांग्रेस की वामपंथी और मध्यमवर्गी सोच से निकलकर अब एक अधिक ‘मस्कुलर नेशनलिस्ट’ दिशा में जा चुकी है जहां करिश्माई और केंद्रीकृत नेतृत्व की मांग है। थरूर के इस बयान के बाद सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह कोई साधारण बात नहीं, बल्कि थरूर का संकेत है कि वे खुद भी इस बदलाव को स्वीकारते हैं और उसकी ओर कदम बढ़ा चुके हैं। उन्होंने न तो बीजेपी का नाम लिया और न ही प्रधानमंत्री मोदी का लेकिन जो बात छिपाई गई वह शब्दों के चुनाव से खुद-ब-खुद जाहिर हो रही है।

थरूर का यह बयान उस समय आया है जब वह पहले ही इमरजेंसी को ‘काला अध्याय’ बता चुके हैं और कांग्रेस आलाकमान इस पर चुप है। इससे पहले वह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मामलों में सराहना कर चुके हैं। ऐसे में ये कहना कि ‘‘हम अब करिश्माई और केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा में बढ़ चुके हैं।’’ कांग्रेस की विचारधारा और कार्यशैली से एक स्पष्ट दूरी दिखाता है। भाजपा ने थरूर के बयान को दशकों बाद कांग्रेस की आंख खोलने वाला बताया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस अगर थरूर के विचारों से असहमत है तो इसका मतलब वो आज भी इमरजेंसी की मानसिकता में जी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अब अगर कांग्रेस अपने ही सांसद के सच बोलने पर बुरा मान रही है तो यह अंदरूनी तानाशाही है। वहीं शहजाद पूनावाला ने कहा कि एक बार फिर शशि थरूर ने कांग्रेस को आईना दिखाया है। थरूर ने माना है पहले कांग्रेस की नीति लेफ्ट की नीति होती थी। कांग्रेस राष्ट्रहित को नहीं परिवारहित और वोट बैंक को आगे रखती थी। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या शशि थरूर सच में कांग्रेस से दूर हो रहे हैं? क्या वह भाजपा में जाएंगे या फिर वह कांग्रेस के भीतर एक ‘सोच का विद्रोह’ शुरू कर रहे हैं? थरूर ने न तो पार्टी छोड़ी है और न ही भविष्य को लेकर कुछ कहा है लेकिन उनके बयानों की लकीरें अब पार्टी की मुख्यधारा से मेल नहीं खा रहीं है। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी को तय करना होगा कि वह शशि थरूर जैसे नेताओं की सोच को जगह देगी या फिर उन्हें एक और ‘भूले-बिसरे नेता’ की कतार में खड़ा कर देगी।

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