सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ विवाद और इनसेट में कुंवर प्रणव चैम्पियन एवं पुत्र दिव्य प्रताप सिंह
उत्तराखण्ड भाजपा इस समय चाल और चरित्र, दोनों के गम्भीर संकट से जूझती दिख रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में राजनीतिक प्रभावों की चर्चाओं से लेकर दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा और सल्ट मंडल अध्यक्ष भगत सिंह बोरा पर लगे यौन शोषण और छेड़छाड़ जैसे संगीन आरोपों तक, पार्टी के जमीनी ढांचे में लगातार उभर रहे दाग साफ दिखाई देते हैं। ओबीसी प्रकोष्ठ से जुड़े पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के आरोपों ने स्थिति और असहज की है। ताजा मामला पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन के पुत्र द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव के बेटे के साथ मारपीट और हथियार लहराने का है, जिसने यह फिर प्रमाणित कर दिया कि सत्ता की हनक भाजपा नेताओं और उनके परिजनों के आचरण पर हावी हो चुकी है। ये घटनाएं बताती हैं कि प्रदेश भाजपा संगठन केवल राजनीतिक चुनौतियों से नहीं बल्कि अपनी नैतिक विश्वसनीयता के बड़े संकट से गुजर रहा है


सत्ताधारी भाजपा नेताओं की सत्ता की हनक के तमाम किस्से सामने आते रहे हैं लेकिन अब सत्ता और रसूख की हनक इतनी बढ़ चुकी है कि नेताओं के पुत्र भी अपनी ताकत दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। देहरादून में भाजपा के चर्चित पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन के पुत्र द्विव्य प्रताप सिंह और उनके साथ चल रहे सुरक्षा गनर जो कि उनकी माता देवयानी की सुरक्षा के लिए हरिद्वार पुलिस द्वारा तैनात किया गया है, ने प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे एस. रामास्वामी के पुत्र आर. यशोवर्धन और उनके ड्राइवर को महज इस लिए पीट दिया कि वह विधायक पुत्र की एसयूबी गाड़ी को पास नहीं दे रहा था। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है जिसमें एक पुलिस कर्मी और एक व्यक्ति हाथ में पिस्टल लेकर मारपीट करते दिख रहे हैं। विडियो में यह भी साफ सुनाई दे रहा है कि पीड़ित व्यक्ति माफी मांग रहा है बावजूद इसके उसके साथ मारपीट होती रही।


दरअसल मामला 14 नवम्बर देर रात यशोवर्धन टैक्सी कार से राजपुर रोड के दिलाराम बाजार से साईं मंदिर की ओर जा रहे थे। तभी उनके पीछे आ रही एक एसयूबी और एक बुलेरो गाड़ी के द्वारा उनसे पास लेने की कोशिश की लेकिन जगह न होने के कारण पास नहीं दिया जा सका। इससे एसयूवी में बैठे हुए लोग इतने क्रोधित हो गए कि सायरन बजाते हुए यशोवर्धन की कार को मसूरी डायवर्जन के पास ओवरटेक कर ड्राइवर के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। इसके अलावा गाली-गलौज और मारपीट की गई, साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई।

इस घटना के बाद यशोवर्धन द्वारा राजपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई जिसमें उनके और ड्राइवर के साथ कुछ लोगों द्वारा बदसलूकी और मारपीट किए जाने का उल्लेख किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की। उसमें पाया कि घटना में शामिल लैंड क्रूजर खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैम्पियन के नाम दर्ज है। वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान द्विव्य प्रताप सिंह पुत्र कुंवर प्रणव चैम्पियन और हरिद्वार में तैनात पुलिस काॅन्सटेबल राजेश सिंह के तौर पर की गई।

पुलिसकर्मी राजेश सिंह सरकार द्वारा कुंवर प्रणव चैम्पियन की धर्मपत्नी देवयानी सिंह को गनर के तौर पर दिया गया है। गौरतलब है कि देवयानी सिंह 2022 के विधानसभा चुनाव में खानपुर से भाजपा की उम्मीदवार रही हंै। इस चुनाव में वे निदर्लीय उमेश शर्मा से पराजित हुई थीं।

जांच के उपरांत पुलिस ने मारपीट करने और हथियार लहराने के मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336 और 152 में मुकदमा दर्ज करते हुए घटना में शामिल निजी महिंद्रा बुलेरो गाड़ी को सीज कर दिया। साथ ही दिव्य प्रताप को जांच में सहयोग करने का नोटिस भी जारी किया गया। पुलिस अधीक्षक हरिद्वार द्वारा गनर को निलम्बित कर दिया गया।

मामले के तूल पकड़ता देख पुलिस भी अब कठोर कार्यवाही के मूड में नजर आ रही है। जिस लैंड क्रूजर कार का नाम सामने आया है वह कार कुंवर प्रणव चैंम्पयन के नाम पंजीकृत है और अब आरटीओ देहरादून इस पर पूर्व में हुए ओवर स्पीड के चार चालानों पर कार्यवाही करने की बात कह रहा है। साथ ही हरिद्वार जिलाधिकारी ने चैम्पियन के पुत्र द्विव्य प्रताप सिंह के नाम तीनों असलहों जिसमें दो रिवाॅल्वर और एक बंदूक के लाइसेंस भी निलम्बित कर करते हुए द्विव्य प्रताप सिंह को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब देने का नोटिस भी जारी कर दिया है।

यह मामला एक वरिष्ठ नौकरशाह जो कि प्रदेश का मुख्य सचिव के पद पर रहे हों और भाजपा के पूर्व विधायक के पुत्र से जुड़ा होने के कारण सुखियों में आ गया। जिस कार से ओरवरटेक किया गया उस कार के खिलाफ उत्तराखण्ड, दिल्ली और हरियाणा में 19 चालान लम्बित हैं जिसमें 18 चालान तो सिर्फ ओवर स्पीड के ही बताए जा रहे हैं इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि सत्त्ताधारियों और रसूखदारों के ऊपर कानून का कोई वश नहीं चलता है। नियमानुसार किसी वाहन का दूसरी बार चालान होने पर लाइसेंस तीन माह के लिए निलम्बित किया जाता है। यह भी नियम है कि एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार चालन होता है तो उसका लाइसेंस सदैव के लिए निरस्त कर दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि उक्त कार के 19 बार चालान होते रहे और परिवहन विभाग कार्यवाही के नाम पर सोता रहा।

गौरतलब है कि कुंवर प्रणव चैम्पियन के अनेक विवाद पूर्व में सामने आ चुके हैं। कांग्रेस की बहुगुणा सरकार के समय तत्कालीन मंत्री हरक सिंह के सरकारी आवास में एक कार्यक्रम के दौरान चैम्पियन द्वारा अपनी पिस्टल से हवाई फायर किया गया। इस मामले ने बड़ा राजनीतिक तूल भी पकड़ा। इसके अलावा रूड़की में एक कारोबारी को पिस्तौल दिखाकर धमकाने का गम्भीर आरोप भी चैम्पियन पर लग चुका है। अनेक लोगों के साथ गाली-गलौच करने के मामले भी चैम्पियन के सामने आ चुके हैं जिसमें कई वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो चुके हैं।

त्रिवेंद्र रावत सरकार में मुख्यमंत्री के खिलाफ ‘रजिया फंस गई गुंडो में’ कहकर विवाद खड़ा करने वाले चैम्पियन पर भाजपा के ही विधायक देशराज कर्णवाल के साथ विवाद भी कई दिनों तक सुर्खियों में बना रहा। इसके चलते भाजपा सरकार और संगठन की खासी फजीहत भी हुई और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को दोनों विधायकों को अनुशासन का पाठ तक पढ़ाना पड़ा। अपने बड़बोलेपन और ठसक के लिए विख्यात कुंवर प्रणव चैम्पियन का एक विवाद तो सीधे उत्तराखण्ड की अस्मिता से जुड़ गया जब सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में चैम्पियन एक हाथ में चार-चार हथियार लेकर सोशेबाजी करते और उत्तराखण्ड को अपने प्राइवेट पार्ट पर रखने की बात भी कहते हुए नजर आए थे। इस विडियो ने तो प्रदेश की समूची राजनीति को भी इस कदर गरमा दिया था कि चैम्पियन को पार्टी से निष्कासित तक होना पड़ा। हालांकि यह निष्कासन ज्यादा समय तक नहीं रहा और एक वर्ष के बाद ही चैम्पियन की भाजपा में वापसी हो गई। इससे यह बात स्पष्ट है कि तमाम विरोध और विवादों के बावजूद चैम्पियन भाजपा के लिए राजनीतिक तौर पर कितने जरूरी हैं।

इसी वर्ष कुछ माह पूर्व खानपुर के निदर्लीय विधायक उमेश कुमार और चैम्पियन के बीच गम्भीर विवाद भी सुर्खियां बटोर चुका है जिसमें चैम्पियन  द्वारा उमेश कुमार के कार्यालय में गोलीबारी करने का मामला सामने आया था। इस मामले में भी चैम्पियन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब उनके पुत्र द्वारा महज कार को पास न देने की मामूली बात पर किसी को पीटने की घटना ने साफ कर दिया है कि सत्ता का रसूख नेताओं के ही नहीं उनके पुत्रों के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। अगर इस मामले में वरिष्ठ नौकरशाह के बेटे के साथ मारपीट नहीं होती, किसी आम आदमी के साथ होती तो मामला सामने आ ही नहीं पाता।

कुंवर प्रणव चैम्पियन के पुत्र के चलते विपक्षी दलों को भाजपा पर हमलावर होने का मौका मिल गया है। कांग्रेस भाजपा पर राजनीति में अपराधीकरण का आरोप लगा रही है। पूर्व में भी भाजपा के कई नेताओं के खिलाफ बलात्कार जैसे गम्भीर मामले भी सामने आ चुके हैं जिसमें भाजपा की किरकिरी हो चुकी है। कुछ माह पूर्व भाजपा के देहरादून महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के राजपुर रोड स्थित आवास में देर रात शराब पार्टी होने और पुलिस का छापा मारने का वीडियो भी भाजपा की फजीहत करवा चुका है। सबसे चर्चित मामला लालकुआं दुग्ध संघ के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता मुकेश बोरा पर दुग्ध संघ में दैनिक वेतन पर काम करने वाली विधवा महिला पर विगत तीन वर्षों से बलात्कार किए जाने के आरोप लग चुके हैं। भाजपा के सल्ट मंडल अध्यक्ष भगत सिंह बोरा पर भी महिला के साथ बलात्कार किए जाने का मामला सामने आ चुका है। भाजपा के ही एक अन्य मंडल अध्यक्ष कमल रावत जो कि चम्पावत मंडल अध्यक्ष है, पर आरोप है कि उसके द्वारा एक महिला पर दुष्कर्म करने के मामले में उसके खिलाफ सम्बंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। नाबालिक बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में भी भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष पर गम्भीर आरोप लग चुके हैं। हरिद्वार जिले के बहादराबाद के ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आदित्य राज सैनी पर उसके द्वारा अपने ही क्षेत्र की एक नाबालिक बलिका के साथ अवैध सम्बंध बनाने, उक्त बालिका की हत्या करने के गम्भीर आरोप लगे हैं। भाजपा ने आदित्यराज सैनी से पल्ला झाड़ते हुए उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया जबकि भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ पर एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर अति गम्भीर और घटिया स्तर के आरोप लगाते हुए सनसनी मचा दी। उक्त महिला ने राठौर पर यौन शोषण किए जाने के आरोप भी लगाए गए।
प्रदेश की राजनीति में खासा हलचल मचाने वाला अंकिता हत्याकांड के आरोपियों के भी भाजपा से सम्बंध रहे हैं। भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य के बनंतरा रिसोर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या पुलकित आर्य और उसके दो अन्य साथियों द्वारा कर दी गई।

हाईकोर्ट से तीनों आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। इसके अलावा एक युवक जितेंद्र नेगी द्वारा हिमांशु चमोली पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाते हुए स्वयं गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भी भाजपा संगठन की बड़ी किरकिरी हो चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा की भाजपा सरकार और संगठन अपने पूर्व विधायक के ताजा विवादों पर क्या रुख अख्तियार करता है।

बात अपनी-अपनी

दोनों बच्चे अपने ही हैं, मुख्य सचिव जी का बेटा हो या चैम्पियन जी का बेटा हो। ये दोनों अपने ही हैं, गलती हो गई तो उसकी सजा भी उसे ही मिल रही है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि अब ज्यादा ट्रोल नहीं करना चाहिए, कानून पर छोड़ देना चाहिए।
उमेश कुमार, पत्रकार एवं विधायक, खानपुर

चाहे कोई विधायक हो या पूर्व विधायक हो, कितना भी बड़ा नेता या रसूखदार हो, कानून के लिए सभी एक समान हैं। उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार राज्य में कानून की सरकार पर अमल करती रही है, किसी ने कोई अपराध किया हो तो उसे कानून सजा देगा, वह इस प्रदेश में बच नहीं सकता।
मनवीर सिंह चौहान, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा, उत्तराखण्ड

मैं शर्मशार हूं कि मेरे प्रदेश जिसे देवभूमि कहा जाता है वहां ऐसे अपराधी लोग राजनीति में आ गए हैं। ये सत्ता की हनक है, जिस तरह यहां सत्ताधारी दल भाजपा के लोग अपराधों में शामिल हो रहे हैं, एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं उससे लगता है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की संस्कृति इस प्रदेश में पैदा हो चुकी है। भाजपा के ही एक पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैम्पियन का बेटा सड़कों पर सत्ता की हनक दिखाता हुआ पूर्व मुख्य सचिव के बेटे के साथ बदतमीजी और मारपीट कर रहा है। यह साफ दिखाता है कि किस तरह भाजपा के नेता और उनके पुत्र सत्ता कि हनक में चल रहे हैं।
गरिमा महरा दसौनी, मुख्य प्रवक्ता, प्रदेश कांग्रेस कमेटी, उत्तराखण्ड

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