बिहार में एआईएमआईएम के विधायक एक ओर जहां नीतीश कुमार की तारीफ कर रहे हैं और पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी विकास के मुद्दे पर सरकार को नैतिक समर्थन दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधान परिषद सदस्य एवं प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया कि महागठबंधन के 17-18 विधायक उनकी पार्टी के सम्पर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि इन विधायकों ने स्वयं पहल की है और उन्हें धैर्य रखने की सलाह दी गई है। चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्षी खेमे में असंतोष और अंदरूनी स्थिति को लेकर गम्भीर उथल-पुथल है। इसके बाद से प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बिहार में एक बार फिर बड़ी बगावत देखने को मिलेगी? क्या नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का कुनबा बढ़ने वाला है?
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि नीतीश कुमार हमेशा अपना कुनबा बढ़ाने में लगे रहते हैं। वे छोटे दलों के विधायकों को अपने साथ मिलाने की कोशिश करेंगे। आरजेडी और कांग्रेस पर भी उनकी नजर रहेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि बीजेपी के 14 मंत्री, नीतीश कुमार के केवल 8 मंत्री मंत्री हैं यानी जेडीयू कोटे से 6 मंत्री पद अभी भी खाली हैं। वे दूसरे दलों को कमजोर कर जेडीयू को नम्बर 1 पार्टी बनाना चाहते हैं। इसके लिए जदयू को राजद, कांग्रेस और एआईएमआईएम, तीनों में सेंध लगानी होगी।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि नीतीश कुमार हमेशा अपना कुनबा बढ़ाने में लगे रहते हैं। वे छोटे दलों के विधायकों को अपने साथ मिलाने की कोशिश करेंगे। आरजेडी और कांग्रेस पर भी उनकी नजर रहेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि बीजेपी के 14 मंत्री, नीतीश कुमार के केवल 8 मंत्री मंत्री हैं यानी जेडीयू कोटे से 6 मंत्री पद अभी भी खाली हैं। वे दूसरे दलों को कमजोर कर जेडीयू को नम्बर 1 पार्टी बनाना चाहते हैं। इसके लिए जदयू को राजद, कांग्रेस और एआईएमआईएम, तीनों में सेंध लगानी होगी।
एआईएमआईएम विधायक मोहम्मद मुर्शीद आलम ने कहा कि हम 2014 से 2024 तक जेडीयू के साथ रहे। नीतीश कुमार ने एक प्लेटफार्म दिया। जोकीहाट से जेडीयू की टिकट पर उपचुनाव लड़ा था। कहीं न कहीं बिहार में उन्होंने मुझे पहचान दी। मैं हमेशा उनके कामों से प्रभावित रहा हूं। पांच बार मुखिया रहा हूं, पत्नी भी मुखिया रही हैं। अभी मैं इस्तीफा देकर आया हूं। नीतीश कुमार मेरे राजनीतिक गुरु हैं। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 जनवरी (खरमास खत्म होने के बाद) कैबिनेट विस्तार की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या एआईएमआईएम के विधायक मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं? हालांकि अख्तरुल इमान ने कहा कि हम लोग तो क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर मिलने गए थे। ओवैसी साहब ने सरकार बनाने का समर्थन नहीं बल्कि अच्छा काम होने पर नैतिक समर्थन देने की बात कही है। हम सीमांचल व बिहार के गरीबों और शोषितों की आवाज हैं। सीमांचल बिहार का सबसे पिछड़ा इलाका है, उसकी लड़ाई लड़ रहे हैं। 20 सालों से देख रहा हूं कि सीमांचल की हकमारी पहले भी होती थी,आज भी होती है। हम कोशिश जारी रखेंगे।
दूसरी तरफ जेडीयू नेता नीरज कुमार का बयान कि महागठबंधन से 17-18 विधायक जेडीयू के सम्पर्क में हैं, पर महागठबंधन के प्रमुख घटक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने इस दावे को निराधार, मनगढ़ंत और राजनीतिक पब्लिसिटी स्टंट करार दिया। गगन ने आरोप लगाया कि जदयू और भाजपा अपने आपसी सत्ता संघर्ष को छिपाने के लिए ऐसी बातें फैला रही हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के विधायक जनता के मुद्दों नफरत, पलायन और रोजगार के आधार पर चुने गए हैं तथा किसी तरह की टूट की सम्भावना नहीं है। जदयू का दावा राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश मात्र है। गौरतलब है कि 2020 के चुनाव के बाद जो घटनाक्रम दिखा उसी के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि एआईएमआईएम, कांग्रेस और अन्य दलों के विधायक बगावत कर सकते हैं।

