वर्ष 2000 में अस्तित्व में आई जसपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व पिछले 9 सालों से कांग्रेस के विधायक आदेश चौहान कर रहे हैं। चैहान की छवि जनता की नजर में दबंग और धाकड़ विधायक की है। जनता की मानें तो वह समस्याओं का समाधान करने के लिए सदन से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ने में आगे रहते हैं लेकिन पार्टी का सत्ता में न होने का नुकसान उन्हें विकास से वंचित होकर उठाना पड़ रहा है। हर विपक्षी विधायक की तरह सत्ता की गलियों में उनकी भी पुकार अनसुनी रहती है। शायद यही वजह है कि जसपुर विकास कार्यों के मामले में आज भी जस का तस है। जब से राज्य बना है तब से ही जसपुर के लोग शहर में एक रोडवेज बस अड्डा बनवाने की मांग करते आ रहे हैं। इसके अलावा स्टेडियम की मांग भी दशकों पुरानी है लेकिन न रोडवेज बस अड्डा बना और न ही स्टेडियम बन पाया। तहसील, न्यायालय और उपजिलाधिकारी का कार्यालय भी मंडी में चल रहा है। यहां छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक का सपना पूरा नहीं हो पाया है। एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टरों की कमी से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। उनको काशीपुर रेफर करके पल्ला झाड़ लिया जाता है। कई गांव ऐसे हैं जो वर्षों से राजस्व गांव बनने की राह देख रहे हैं। इसके अलावा ढेरों समस्याएं ऐसी हैं जो आज भी मुंह बाए खड़ी हैं

पूर्व में जसपुर का नाम यशपुर था। इस शहर की स्थापना चंद्रवंश के चर्चित सेनापति यशोधर सिंह अधिकारी द्वारा की गई थी। बताया जाता है कि वर्ष 1856 में अकबर के शासनकाल में जसपुर को शाहगीर के नाम से जाना जाता था। चारों तरफ से वन क्षेत्र से घिरा होने के कारण यहां लकड़ी का आयात-निर्यात बड़े पैमाने में होता था। उस दौरान जसपुर की लकड़ी मंडी को एशिया की सबसे बड़ी लकड़ी मंडी कहा जाता था। लेकिन इसके बाद यहां छपाई का काम प्रचलित हो गया। छपाई का काम अधिक होने के चलते जगह-जगह पर कैलेंडर बनते थे। तब यहां से छपाई के माध्यम से बहुत से लोगों को रोजगार मिलता था। 1958 में जसपुर को नगर पालिका का दर्जा प्राप्त हुआ। उत्तर प्रदेश के कार्यकाल में जसपुर काशीपुर विधानसभा का ही अंग होता था। 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद जसपुर विधानसभा अस्तित्व में आई।

कुमाऊं का प्रवेश द्वार है जसपुर
यहां पिछले 9 सालों से कांग्रेस के विधायक आदेश चौहान हैं। जब से वे यहां के विधायक हैं तभी से राज्य में भाजपा की सरकार है। हर विपक्षी विधायक की तरह सत्ता की गलियों में उनकी भी पुकार अनसुनी रहती है। शायद यही वजह है कि जसपुर विकास कार्यों के मामले में आज भी जस का तस है। एक विधायक निधि को छोड़ दें तो बाकी यहां विकास कार्य नहीं हो पाए। जब से राज्य बना है तब से ही जसपुर के लोग शहर में एक रोडवेज बस अड्डा बनवाने की मांग करते आ रहे हैं। इसके अलावा स्टेडियम की मांग भी दशकों पुरानी है लेकिन न रोडवेज बस अड्डा बना और न ही स्टेडियम बन पाया। तहसील, न्यायालय और उपजिलाधिकारी का कार्यालय भी मंडी में चल रहा है। यहां छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक का सपना पूरा नहीं हो पाया है। एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टरों की कमी से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। उनको काशीपुर रेफर करके पल्ला झाड़ लिया जाता है। कई गांव ऐसे हैं जो वर्षों से राजस्व गांव बनने की राह देख रहे हैं। इसके अलावा ढेरों समस्याएं ऐसी हैं जो आज भी मुंह बाए खड़ी हैं।

जनता की नजर में दबंग और धाकड़ विधायक हैं चौहान
यहां के विधायक आदेश चौहान को लोग जनसमस्याओं के लिए संघर्ष करने वाला विधायक मानते हैं। लोग कहते हैं कि अगर उनकी ही पार्टी की सरकार होती तो आज जसपुर विकास के लिए नहीं तरसता। यह विधायक आदेश चौहान ही है जो क्षेत्र में सड़कें न बनने पर वहां धान बोने पर मजबूर होते हैं। कभी वे नगर पालिका की जमीन पर कब्जा होने के विरोध में धरना-प्रदर्शन करते हैं तो कभी जनता के काम करने में टाल-मटोल करने वाले अधिकारियों को ही धमकाने उनके कार्यालय में धमक जाते हैं। ऐसा कई बार हुआ है जब वह जनता के मुद्दों को लेकर अधिकारियों से ही भिड़ जाते हैं।

आदेश चौहान की छवि जनता की नजर में दबंग और धाकड़ विधायक की है। जनता की मानें तो वह समस्याओं का समाधान करने के लिए सदन से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ने में आगे रहते हैं लेकिन सत्ता में न होने का नुकसान उन्हें विकास से वंचित होकर उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस का आधिपत्य स्थापित रहा है
जसपुर विधानसभा अमूमन कांग्रेस की सीट मानी जाती है। यहां जब- जब डाॅक्टर शैलेंद्र मोहन सिंघल कांग्रेस से चुनाव लड़े तो वह जीते लेकिन जैसे ही उन्होंने पाला बदला, वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और चुनाव लड़ा तो हार गए। इसी तरह आदेश चैहान जब भाजपा में थे तब चुनाव लड़े थे लेकिन जीत नहीं पाए थे। मगर जैसे ही वह कांग्रेस में आकर चुनाव लड़े तब से लगातार दो बार यहां का जनप्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

कभी भाजपा के हीरो थे चौहान
आदेश चौहान की बात करें तो 2014 से पहले वह भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में संगठन में थे लेकिन वह चर्चा में उस समय आए जब 2013 में उन्होंने यहां लव जिहाद का मुद्दा उठाकर अपनी अमर्यादित भाषा के जरिए एक धर्म विशेष के लोगों को टारगेट किया था। तब उन्होंने लव जिहाद के मुद्दे को लेकर जनता के साथ सड़क जाम किया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बाद में आदेश चौहान सहित पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। तब वह भाजपा के लिए तो हीरो बन गए थे लेकिन जसपुर में विधानसभा चुनाव में अपना वर्चस्व रखने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की नजर में जीरो साबित हुए थे।

चौहान और सिंघल की अदला-बदली
भाजपा ने आदेश चौहान को 2012 में बेशक अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन जनता ने उनको हार का सबक सिखाया। तब उन्होंने अपनी राजनीति को गहराई से समझा। देखते ही देखते वे पार्टी से पलटी मार गए और
भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। यह वर्ष 2017 की बात है जब कांग्रेस के डाॅ. शैलेंद्र मोहन सिंघल जो पूर्व में यहां से तीन बार लगातार कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके थे, अचानक ही कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हो गए। 2002, 2007 और 2012 में बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाले डाॅ. शैलेंद्र मोहन सिंघल आखिर 2017 में कांग्रेस के आदेश चौहान से हार गए। 2022 में भी वे अपनी हार को जीत में परिवर्तित नहीं कर पाए।

जातीय समीकरण
जसपुर विधानसभा में करीब 35 प्रतिशत चौहान तो 9 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के मतदाता हैं। इसके साथ ही करीब 10 प्रतिशत सिख, 8 प्रतिशत ब्राह्मण, 2 प्रतिशत राजपूत तथा 25 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इसके अलावा यहां 6 प्रतिशत बनिया है जबकि 5 फीसदी अन्य है।
आदेश चौहान के लिए यहां जीत का सबसे बड़ा फैक्टर चौहान और मुस्लिम मतदाताओं का एकजुट होना है। करीब 60 प्रतिशत मतदाता चौहान और मुस्लिम ही हैं। यही वजह है कि यहां इस फैक्टर के बलबूते कांग्रेस अपना विजय पताका फहराती आई है।

नहीं बना टेक्सटाइल पार्क
वर्ष 2016 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत थे तब टेक्सटाइल पार्क का शिलान्यास किया गया था। उस दौरान लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब यहां उद्योग धंधे लगेंगे। लोगों को रोजगार मिलेंगे लेकिन शिलान्यास होने के बाद फिर किसी ने भी टेक्सटाइल पार्क की सुध नहीं ली। कुंडा निवासी जियाउद्दीन ने बताया कि कई सौ एकड़ जमीन पर यहां कभी सूत मिल हुआ करती थी। लेकिन वह सूत मिल बंद हो गई। इसके बाद 70 एकड़ जमीन पर स्पिनिंग मिल की स्थापना का निर्णय लिया गया। इसमें यह भी तय किया गया कि पीपीपी मोड में निजी सहभागिता 51 प्रतिशत और सिडकुल की सहभागिता 49 फीसदी रहेगी। साथ ही इकाइयों को उचित दरों पर भूमि उपलब्ध कराने के भी दावे किए गए। पार्क में ट्रीटमेंट प्लांट, आधुनिक प्रदर्शनी केंद्र और 2000 श्रमिकों की क्षमता का श्रमिक हाॅस्टल, स्टाफ श्रमिकों के लिए प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र, प्रबंधकों के लिए आवासीय टावर, बैंक, स्टोर, पोस्ट ऑफिस आदि का निर्माण किया जाना था लेकिन सरकार द्वारा सहयोग न किए जाने के कारण आज टेक्सटाइल पार्क का सपना अधर में लटका हुआ है।

नहीं बने राजस्व गांव
भोगपुर निवासी राजेंद्र की माने तो उनके गांव को राजस्व गांव बनाने का वादा किया गया था साथ ही शिपका, मिलख सिपका और मनोरथपुर थर्ड गांव को भी राजस्व गांव बनाया जाना था। राजेंद्र बताते हैं कि ‘हमारे गांव की करीब 350 हेक्टेयर जमीन 1958 में तुमडिया डैम बनने में चली गई थी। इसके बाद इन गांवों को रिजर्व फॉरेस्ट में भूमि दे दी गई। रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि मिलने से अब यह गांव राजस्व गांव नहीं रहे। गांव वालों को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।’ वे बताते हैं कि मनोरथपुर थर्ड निवासी मुख्तार सिंह और पंजाब सिंह ने इस बाबत नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर भी की थी। तब कोर्ट ने वन विकास निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भूमि का सर्वे कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था लेकिन आज तक सर्वे रिपोर्ट सामने नहीं आई।

दो पाटों के बीच पिस रहे दर्जनों गांव
बाबर खेड़ा निवासी रविंदर के अनुसार 2003 में जब तहसील जसपुर का गठन किया गया तो काशीपुर तहसील के 19 गांवों को वहां से हटाकर जसपुर से जोड़ दिया गया। इसके बाद भरतपुर, लालपुर बाबर, खेड़ा हरिया वाला, शाहगंज, कूड़ा, गणेशपुरा, बकसौरा, टिला,  केसरीपुर, बेलवाला,  गिरधारी मुंशी, कनकपुर, बगवाड़ा, भरतपुर, प्रस्तौडा, गढी नेगी दुर्गापुर और नवलपुर के लोगों को बाद में जसपुर से हटकर काशीपुर तहसील में जोड़ दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने गांव वालों को दो विधानसभाओं में बांट दिया। सभी का ब्लाॅक जसपुर कर दिया गया तथा उन्हें काशीपुर तहसील से जोड़ दिया गया। इस तरह गांव के लोग ब्लाॅक में जाने के लिए जसपुर जाते हैं तो तहसील में जाने के लिए काशीपुर जाते हैं। जसपुर निवासी सद्दाम हुसैन और सलामत ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि जनता से कोई राय तक नहीं ली गई। सरकार ने सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए यह निर्णय लिया। इससे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी यह होती है कि उन्हें अपने कामों के लिए दो अलग-अलग दिशाओं में जाने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि विधायक आदेश चैहान भी इसके विरोध में थे। उन्होंने इन गांवों को दोबारा जसपुर तहसील में जोड़े जाने को कहा था लेकिन उनकी भी नहीं सुनी गई।

जंगली जानवरों का आतंक 
भोगपुर डेम और तीरथ नगर क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक इस कदर फैला है कि शाम होते ही लोग अपने-अपने घरों में छुपने को मजबूर हो जाते हैं। पिछले दो महीने की ही बात करें तो यहां तेंदुआ द्वारा हमले की छह घटनाएं घट चुकी है जिससे ग्रामीण भयभीत हैं। तीरथ नगर निवासी जितेंद्र कुमार ने बताया कि वह अपने मित्र शहजाद अली के साथ जसपुर से मजदूरी करके गांव लौट रहे थे। वन विभाग की चैकी से लगभग 200 मीटर की दूरी पर डैम के रास्ते में झाड़ियों में तेंदुआ घात लगाए बैठा था। उसने शहजाद अली पर हमला कर उसे घायल कर दिया। वह भी खुद तेंदुआ का हमला होने से बाल-बाल बचा। वह इसलिए बच गया कि उसने शोर मचाया और ग्रामीण इकट्ठा होने लगे जिससे तेंदुआ भाग गया। वह बताते हैं कि इस बाबत कई बार शासन-प्रशासन को अवगत करा चुके  हैं लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता।
मंडी में चल रहे तहसील और न्यायालय
किसानों की मंडी में जहां फसलें और सब्जियां आयात-निर्यात होती हैं वहां पर कोर्ट कचहरी चल रही है। एसडीएम का कार्यालय हो, तहसील हो या अधिवक्ताओं के चेम्बर सभी कुछ मंडी में देखने को मिल जाते हैं। अधिवक्ता अजीत सिंह चौहान बताते हैं कि शायद उत्तराखण्ड का जसपुर शहर अकेला ऐसा शहर होगा जहां पर किसानों की मंडी में अधिकारियों, वकीलों और न्यायपालिका का कब्जा है। यहीं आपूर्ति निरीक्षक का भी कार्यालय चलता है। चौहान बताते हैं कि एक बार तहसील को यहां से स्थानांतरित करने की योजना बना दी गई थी जिसमें जमीन भी चिन्हित कर दी गई थी लेकिन तहसील निर्माण के लिए धन आवंटित नहीं किया गया जिससे तहसील बनने का सपना पूरा नहीं हो सका।

जसपुर की लाइफ लाइन में अव्यवस्थाएं
जसपुर की लाइफ लाइन कहे जाने वाली नादेही चीनी मिल जिसकी स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी ने की थी बदहाल स्थिति में है। चीनी मिल में मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही अव्यवस्था नजर आने लगती है। मिल के मुख्य द्वार से मिल के प्रशासनिक कार्यालय और मिल कारखाने की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग काफी समय से बदहाल स्थिति में है। मार्ग में जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। स्थानीय निवासी अजय कुमार के अनुसार थोड़ी सी वर्षा होने पर भी गड्ढों में जल भराव हो जाता है और सड़क पर कीचड़ हो जाता है जिससे मिल में आने-जाने वाले मिलकर्मियों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मिल परिसर की अन्य सड़कें भी खस्ता हाल हैं जिससे मिल काॅलोनी में रहने वाले लोग काफी परेशान हैं। जहां-तहां झाड़ियों को वर्षों से काटा नहीं गया है जिससे इनमें सांप-बिच्छू के अलावा जंगली जानवरों के छिपे होने का भय भी बना रहता है। अजय कुमार की माने तो यहां पर प्राइवेट दलालों का कब्जा है। पिछले दिनों एक दलाल को 5000 टन गन्ना खरीद की अनुमति दे दी गई। उस दलाल ने मनमाने दामों से किसानों से गन्ना खरीदा।

फाटो जोन से खुले रोजगार के द्वार
कांग्रेस विधायक आदेश चौहान के कार्यकाल में पतरामपुर के सिपका बैरियर से फाटो जोन के दूसरे द्वार जरूर खुले हैं। कार्बेट नेशनल पार्क के रामनगर में फाटो जोन का पहला द्वार है। जहां सैलानियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। गत् फरवरी माह में पतरामपुर से दूसरे द्वार को खोला गया है। स्थानीय निवासी इस द्वार के खुलने से खुशी व्यक्त कर रहे हैं। पतरामपुर के वाशिंदे रामवीर सिंह कहते हैं कि इस गेट के शुरू होने से रोजगार के द्वार खुलेंगे। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या स्थानीय विधायक आदेश चौहान को इसका श्रेय जाता है तो वह कहने लगे कि विधायक जी का नम्बर तो बाद में आएगा पहले तो सत्ता पक्ष के नेता ही इसका श्रेय लेने की होड़ में लगे हुए हैं। रामवीर सिंह ने इस मामले में विनय रुहेला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने तो बकायदा इस मुद्दे पर प्रेस काॅन्फ्रेंस कर डाली थी जिसमें रुहेला ने कहा था कि फाटो पर्यटक जोन के इस दूसरे द्वार को खुलवाने के लिए उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए थे। उनके प्रयासों से ही यह योजना परवान चढ़ी थी। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने तो यहां तक दावा किया है कि इस विषय को मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी उनके द्वारा ही लाया गया था। वह सवाल करते हैं कि जब उनके प्रयासों से ही फाटो जोन खोला गया था तो उन्हें उद्घाटन समारोह में क्यों नहीं बुलाया गया? रामवीर सिंह इसे भाजपा की आपसी राजनीति भी बताते हैं।

डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
जसपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। यहां सर्जन डॉक्टर नहीं हैं। एनेथिसिया डॉक्टर नहीं हैं। फिजिशियन डॉक्टर भी नहीं हैं। हृदय रोगियों को देखने वाला डॉक्टर नहीं हैं। इतना ही नहीं बल्कि महिलाओं को देखने वाली डॉक्टर भी नहीं हैं। यहां सिर्फ संविदा पर चार डॉक्टर तैनात हैं जो 11 महीने की ड्यूटी पर तैनात होते हैं। अपना अल्ट्रासाउंड कराने आई महिला रजिया खान कहती हैं कि वह अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आई थी लेकिन उसे पता चला कि यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा प्रतिदिन उपलब्ध नहीं है। अल्ट्रासाउंड सप्ताह में सिर्फ एक ही दिन किया जाता है। रजिया बताती हैं कि अगर कोई गम्भीर रूप से बीमार हो जाता है तो उसे यहां एडमिट नहीं कराया जाता है बल्कि उसको काशीपुर रेफर करके पल्ला झाड़ लिया जाता है।

दशकों से नहीं बन सका है डिग्री कॉलेज
शिक्षा की दृष्टि से देखें तो जसपुर आज भी बहुत पीछे है। यहां सिर्फ एकमात्र इंटर तक स्कूल है। राज्य स्थापना के समय से ही यहां एक डिग्री कॉलेज खोलने की मांग की जाती रही है लेकिन वह आज तक नहीं बना है। छात्रा आशा कुमारी ने बताया कि यहां हर पांच साल बाद होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता कोे उच्च शिक्षा के सपने दिखाए जाते हैं। हर चुनाव में वादा किया जाता है कि इस बार जसपुर में डिग्री कॉलेज जरुर बनेगा लेकिन आज तक भी नेताओं का यह वादा पूरा नहीं हुआ है। आशा के अनुसार कुंडा में एक अल्पसंख्यक छात्राओं का डिग्री काॅलेज जरुर है। इसी कॉलेज को अल्पसंख्यक छात्राओं की बजाय हर समुदाय की छात्राओं के लिए चलाए जाने की भी मांग कई बार की जाती रही है लेकिन वह मांग भी पूरी नहीं हो सकी है।

विधानसभा में सिर्फ बोलने से काम नहीं होते : सिंघल

कांग्रेस विधायक के कार्यकाल में कोई काम नहीं हुआ। वह जीरो बटा जीरो हैं। उनकी विधायक निधि से केवल नाली खड़ंजे बने हैं। वे राज्य की कोई स्कीम जसपुर विधानसभा में नहीं ला पाए। हमने अपने कार्यकाल में आईटीआई बनाई। 9 साल पहले हमने जसपुर विधानसभा को जहां छोड़ा था वह आज भी वहीं है। कोई ट्रेनिंग सेंटर नहीं बना। कोई स्किल डेवलपमेंट नहीं हुआ। किसी नई सड़क का निर्माण नहीं हुआ। हमने अपने कार्यकाल में सड़कों का जाल बिछा दिया था। उन्होंने एक भी बिजलीघर नहीं बनाया। वे अहंकारी दृष्टि से बात करते हैं। उनकी बातों में गाली गलौज होता है। वे बुजुर्ग को बुजुर्ग नहीं समझते हैं। बड़े बुजुर्गों के साथ भी दुव्र्यवहार करते हैं। उनके पास काम न करने का सिर्फ एक ही बहाना है कि सरकार ने हमें नजर अंदाज किया क्योंकि बीजेपी को यहां से सीट नहीं मिली इसलिए जसपुर के साथ सौतेला व्यवहार किया गया लेकिन इसका जवाब मेरे पास है। विपक्ष में मैं भी रहा, पूरे तीन साल लेकिन तब हमने सरकार के सहयोग से बहुत काम कराए थे। कोई उनसे पूछे कि क्या सिर्फ विधानसभा में बोलने भर से ही काम हो जाते हैं?

हम चुनाव हारने के बाद भी जितना करा सकते हैं करा रहे हैं। हमारी विधानसभा का अधिकतम भाग ग्रामीण क्षेत्र है। यहां युवाओं को रोजगार चाहिए। युवाओं को पढ़ा-लिखाकर भी अभिभावक ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यहां रोजगार सृजन की योजना आनी चाहिए थी लेकिन नहीं आई। ये कहते हैं कि पैसा नहीं आ रहा है, विकास नहीं हो रहा है। आप तो विधायक हैं हमारे यहां तो ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य भी काम करा रहे हैं। उनके पास भी तो पैसा आ रहा है और विकास हो रहा है। जब हम विधायक थे 90 प्रतिशत गांव के रास्ते कच्चे थे। हमने हर गांव के रास्तों को पक्का किया। निजामाबाद तक पक्का नाला बनवाया। 2002 में जब हम विधायक बने थे तब ग्रामीणों की विकास व्यवस्थाएं कमजोर थी लेकिन अब विकास कराने की व्यवस्था में फर्क आ गया है। पहले की अपेक्षा अब अधिक धन आवंटित किया जा रहा है और उसी हिसाब से विकास भी हो सकता है।

मैं विधायक ना होते हुए भी गरीब बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनवा रहा हूं। रामपुर में 25 लाख की लागत से 100 बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनवा रहा हूं। हमारे पुत्र सिद्धार्थ ने दो गांवों के स्कूलों हलदुआ में 25 लाख और बहेड़ी में 38 लाख के कमरे बनवाए हैं। पतरामपुर में मैं अपनी 6 एकड़ जमीन पर स्टेडियम बनवा रहा हूं जिसमें बास्केटबाॅल का पक्का फिल्ड, दो बालीबाॅल फिल्ड और क्रिकेट पिच बनवाया जा रहा है जिसमें 12 लाख रुपए लग रहे हैं। धर्मपुर, कतरपुर और पतरामपुर में बेटा सिद्धार्थ ने सोलर लाइट दी है। वह राउंड टेबल क्लब का अध्यक्ष भी है। नादेही गांव के स्कूल में जलभराव हो जाता है वहां मिट्टी भरान कराया है।

जसपुर विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: आदेश चौहान (अवधि: 4 वर्ष)

क्र. क्षेत्र                                           मुद्दा/जमीनी स्थिति                अंक  (10 में)

  1. सड़क व सम्पर्क मार्ग कई सड़कों की हालत खराब, गड्ढे, जलभराव और निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल            4/10
  2. स्वास्थ्य सेवाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की भारी कमी, अधिकतर मरीज काशीपुर रेफर           3/10
  3. शिक्षा व उच्च शिक्षा डिग्री कॉलेज अब तक नहीं बन पाया, पाॅलीटेक्निक व तकनीकी शिक्षा का अभाव                   3/10
  4. रोजगार व उद्योग टेक्सटाइल पार्क अधर में, उद्योग व स्थानीय रोजगार के अवसर सीमित                                 3/10
  5. पलायन व युवा स्थिति शिक्षा व रोजगार के अभाव में युवाओं का पलायन जारी 3/10
  6. खेल व बुनियादी ढांचा स्टेडियम और रोडवेज बस अड्डा दशकों से लम्बित 2/10
  7. प्रशासनिक व्यवस्था तहसील, न्यायालय व एसडीएम कार्यालय मंडी में संचालित, स्थायी ढांचा नहीं                       3/10
  8. ग्रामीण समस्याएं कई गांव अब तक राजस्व गांव नहीं, प्रशासनिक असमंजस से ग्रामीण परेशान                     3/10
  9. कानून व्यवस्था व सामाजिक मुद्दे जंगली जानवरों का आतंक, प्रशासनिक लापरवाही के आरोप                        4/10
  10. जनसम्पर्क व राजनीतिक सक्रियता विधायक की छवि सक्रिय व आक्रामक, जनता के मुद्दों पर सड़क से सदन तक आवाज       7/10
     औसत :  3.5/10                                               फाइनल ग्रेड : पास

‘मुझे जसपुर से प्यार है’
राज्य बनने के बाद से जसपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का आधिपत्य कायम है। वर्तमान में भाजपा से कांग्रेस में आए आदेश चौहान 2017 से अब तक इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे पहले वे 2012 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार सामना करना पड़ा था। तब उन्होंने अपनी राजनीति को गहराई से समझा। देखते ही देखते वे पार्टी से पलटी मार भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। आदेश चौहान के लिए जसपुर में जीत का सबसे बड़ा फैक्टर चौहान और मुस्लिम मतदाताओं का एकजुट होना है। करीब 60 प्रतिशत मतदाता चौहान और मुस्लिम ही हैं। यही वजह है कि यहां कांग्रेस अपना विजय पताका फहराती आई है लेकिन स्वास्थ्य, सड़क, बस अड्डा, राजस्व गांव सहित जनता की कई मांगें अभी भी अधूरी हैं। इसलिए इस बार आदेश को जनता का आक्रोश भारी पड़ सकता है। ‘दि संडे पोस्ट’ के रोविंग एसोसिएट आकाश नागर की विधायक संग बातचीत

जब से जसपुर विधानसभा बनी है तभी से यहां स्टेडियम, बस अड्डा और तहसील की मांग उठती रही है। आप भी पिछले दो बार से विधायक हैं क्या आपने कभी इनके लिए प्रयास किया?
ऐसा नहीं है कि मैंने प्रयास नहीं किया। कई बार प्रयास किया। जब कांग्रेस की सरकार थी मुख्यमंत्री हरीश रावत जी थे तब उन्होंने तहसील का उद्घाटन भी कर दिया था लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद आगे कुछ काम नहीं हो पाया। तहसील में तो एक बार निर्माण कार्यों के लिए किस्त भी जारी हो गई थी लेकिन उसके बाद पता नहीं क्यों काम आगे नहीं बढ़ा। किस्त जारी नहीं हुई। रोडवेज बस अड्डे का भी भूमि पूजन और शिलान्यास भी हो चुका है लेकिन बाद में कह दिया गया कि जमीनी विवाद है इसलिए नहीं बन पा रहा है। मैंने इस बाबत पूरे रिकाॅर्ड भी निकलवाएं हैं लेकिन न्यायालय के आदेश के बावजूद भी नगर पालिका इसमें रोड़ा बनी हुई हैं। मैं भी चाहता हूं कि हमारे शहर का युवा भर्ती होने के लिए सड़कों पर दौड़ न लगाएं। वह स्टेडियम में जाकर तैयारी करें लेकिन स्टेडियम के लिए जगह नहीं मिली। जहां जगह चिन्हित की गई थी वहां भी सिर्फ चार दिवारी के अलावा कुछ नहीं हो पाया। हालांकि मैं जसपुर की इन प्रमुख समस्याओं को कई बार विधानसभा में भी आवाज उठा चुका हूं। यही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी से भी अनुरोध किया है कि वह इन समस्याओं का निराकरण कराएं लेकिन हमारी आवाज सुनी नहीं जा रही है या सरकार सुनना पसंद नहीं कर रही है। हो सकता है कि जसपुर में भाजपा का विधायक न बना हो यहां कांग्रेस को ही प्रमुखता मिलती है यही वजह है कि भाजपा सरकार जसपुर के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। आप समझ सकते हैं कि प्रदेश के अन्य कांग्रेस विधायकों के साथ जैसे होता रहा है वैसे ही मेरे भी साथ हो रहा है।

पिछले 9 साल से जसपुर के लिए आपने क्या विशेष किया है?
कुछ नहीं बस पिछले 9 साल से जसपुर की चौकीदारी कर रहा हूं। मेरे दिल में जनता के लिए बहुत कुछ करने का जज्बा है लेकिन दिल की बात शायद सरकार नहीं सुनना चाहती है। विपक्ष का विधायक हूं तो इस वजह से संघर्ष भी कर रहा हूं। अगर सत्ता का विधायक होता तो आज जसपुर में विकास की गंगा बह रही होती।
शिक्षा के क्षेत्र में भी जसपुर बहुत पिछड़ा हुआ है। यहां डिग्री कॉलेज तक नहीं बन पाया?
उच्च शिक्षा के लिए मैं हर प्रयास कर रहा हूं। शायद जल्दी ही डिग्री काॅलेज के निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कोई रास्ता निकल जाएगा। विधायक बनने से पूर्व मेरा विजन यह था कि अपने जयपुर में डिग्री काॅलेज लाऊंगा। तब कांग्रेस के एक शिक्षा मंत्री को भी बुलाया गया उन्होंने भूमि पूजन भी किया। इसके बाद डिग्री कॉलेज 3 साल तक बना लेकिन फिर वित्तीय स्वीकृति बंद कर दी गई। मैं चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र में पाॅलिटेक्निक काॅलेज भी बने जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके। आज बीटेक से ज्यादा पाॅलिटेकनिक की जरूरत है क्योंकि बीटेक तो अमीर लोगों के ही बच्चे कर पाते हैं जबकि पाॅलिटेक्निक गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों को करा सकते हैं। मुझे इस बात का बहुत मलाल है कि नवोदय विद्यालय यहां बन रहा था लेकिन जमीन न मिलने के कारण वह खटीमा चला गया।

आप ओवर ब्रिज के लिए काशीपुर में जाकर धरना दे देते हैं लेकिन जब जसपुर की बात आती है तो यहां सड़कों की बुरी हालत पर आप चुप्पी साथ लेते हैं सड़कें यहां पर ज्यादातर खराब है?
सड़कों की हालत हमने लगभग ठीक कर रखी है। हालांकि जो हमारी निधि से थोड़ा-बहुत काम होता है उसे छोटी-छोटी सड़कें ही बन पाती हैं, बड़ी सड़कें तो लोक निर्माण विभाग और केंद्र सरकार के पीएमजीएसवाई द्वारा ही कराई जाती है उन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। भगवानपुर से हजिरो तक एक ही सड़क है लेकिन यह सड़क मुझे चार टुकड़ों में बनानी पड़ी है। हलदुआसाहू से श्याम नगर और बाबर खेड़ा ग्राम पंचायत की सड़कों पर गहरे गड्ढे होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती थी। तब मैंने खुद इसका विरोध किया और सड़कों में पड़े गहरे गड्ढों में धान की पौध लगाकर राज्य सरकार और प्रशासन से अपनी नाराजगी प्रकट की थी। यह सड़क 3 साल पहले प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनाई गई थी लेकिन सड़क निर्माण के दौरान ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। जिस कारण सड़क छह महीने बाद ही टूट गई थी। आज प्रदेश में भ्रष्टाचार की हालत यह है कि जितने भी निर्माण कार्य हो रहे हैं उनमें से 90 प्रतिशत भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं जबकि काम सिर्फ 10 प्रतिशत ही हो रहे हैं।

काशीपुर विधानसभा पर आपका विशेष ध्यान रहता है। कभी आप रोड के लिए वहां धरना देते हैं तो कभी आप काशीपुर के किसानों की समस्याओं को विधानसभा में उठाते हैं। कहीं आप अगला विधानसभा चुनाव काशीपुर से तो नहीं लड़ने जा रहे हैं?
नहीं ऐसा नहीं है, मैं अपने जसपुर को छोड़कर कहीं नहीं जा रहा हूं। मुझे जसपुर से बहुत प्यार है। यहां की जनता ने मुझे दो बार जिताकर विधानसभा में भेजा है लेकिन इसी के साथ-साथ मुझे अपनी पड़ोसी विधानसभा काशीपुर का भी विशेष ध्यान रहता है। मैंने वहां जब ओवरब्रिज नहीं बन रहा था तो धरना दिया। तब तीसरे दिन से ही ओवरब्रिज बनना शुरू हो गया था। इसके अलावा मैंने किसानों की आवाज को विधानसभा में इसलिए उठाया था कि उनका 28 करोड़ रुपया शुगर मिल पर बकाया था। वहां के विधायक को न किसानों से कोई मतलब है न जनता से। वह एक उद्योगपति है उसे जनता की नहीं अपने उद्योग धंधों की चिंता रहती है।

आपकी छवि एक दबंग विधायक की है। जसपुर के लोग आपको धाकड़ विधायक कहते हैं। आप किसी भी अधिकारी से भिड़ जाते हैं ऐसा क्यों?
मुझे कोई गुंडा कहे, बदमाश कहे, दबंग कहे या धाकड़ विधायक। इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं बचपन से ही गलत को गलत कहने की हिम्मत रखता हूं। हम पृथ्वीराज चौहान के वंशज हैं। हमें जनता के साथ अन्याय पसंद नहीं है। आजकल अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। 10 बजे का ऑफिस है लेकिन 11-12 बजे से पहले नहीं आते हैं। आते भी हैं तो लोगों को घुमाते हैं। उनका काम नहीं करते जबकि बेचारे लोग अपने काम छोड़कर दूर दराज से अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं लेकिन यहां उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है। तब मुझे जनता के लिए अधिकारियों से भिड़ना पड़ता है।

आप पिछले दिनों धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए थे। क्या कारण रहा?
नगर पालिका की वर्ग चार की जमीन है। जिस पर भाजपा के लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था जिसके खिलाफ हमने धरना दिया था। हमने पुलिस को फुटेज भी उपलब्ध कराए थे। इस मामले पर जबरन कब्जा कर चार राउंड फायरिंग भी हुई लेकिन शासन-प्रशासन और पुलिस भाजपा के नेता को बचाने में लगे रहे। भाजपा के नेता नगर पालिका की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं इससे भाजपा की छवि धूमिल हो रही है।

वर्तमान भाजपा सरकार को लेकर आपके क्या विचार है?
वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। कहीं भर्तियों में भ्रष्टाचार हो रहा है तो कहीं खनन में। सरकारी कार्यालयों में जमकर वसूली की जा रही है। किसानों की आवाज कोई नहीं सुन रहा है। उनकी फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। किसानों को जो खाद 600 रुपए में मिलती थी वह आज 1800 में मिल रही है। युवाओं को रोजगार के वादे तो किए जा रहे हैं लेकिन मिल नहीं रहा है। भाजपा का मुद्दा सिर्फ जाती धर्म का होता है। जो हमें आपस में लड़ाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। जनता 2027 में इसका जवाब जरूर देगी।

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