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दास के सिर सजेगा ताज!

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को झारखंड विधानसभा में भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। ऐसे में अब भाजपा की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति को देखते हुए झारखंड भाजपा प्रमुख के तौर पर मरांडी के उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज हैं। सवाल है कि क्या बाबूलाल एक साथ दो पदों पर आसीन रहेंगे या बाबूलाल के हाथों से जल्द ही झारखंड प्रदेश बीजेपी की कमान छीनकर रघुवर दास के हाथों में सौंप दी जाएगी?

राजनीतिक जानकारों की मानें तो रघुवर दास के सिर पर झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए ही बाबूलाल मरांडी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। बीजेपी नेतृत्व अब झारखंड में ओबीसी और एसटी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए एक खास रणनीति के तहत इन दोनों वर्ग से आने वाले चेहरों को प्रमुख स्थान देने जा रहा है।

जब 18 अक्टूबर 2023 को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड बीजेपी के कद्दावर नेता रघुवर दास को एकाएक उड़ीसा का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया था तब राजनीतिक जानकारों ने उस दौरान इस कदम को रघुवर दास के लिए ‘पाॅलिटिकल डेथ’ करार दिया था। लेकिन कहते हैं न कि समय का राजनेता बेसब्री से इंतजार करते हैं। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने रघुवर दास की बहू पूर्णिमा दास साहू को उनकी परम्परागत सीट जमशेदपुर पूर्वी से प्रत्याशी बनाया। अब पूर्णिमा दास साहू विधायक के रूप में उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।

इसी बीच 24 दिसम्बर 2024 को एकाएक रघुवर दास का राज्यपाल पद से इस्तीफा फिर एक बार सुर्खियों में आ गया। 10 जनवरी को दूसरी बार रघुवर दास ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में वापसी तो कर ली लेकिन राजनीतिक रूप से देखें तो वह किसी भी पद पर आसीन नहीं हैं। इसलिए संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी है और इसी के तहत बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुना गया है ताकि प्रदेश की कमान उनके हाथों से लेकर रघुवर दास को सौंपी जा सके।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2024 में मिली करारी हार के बाद अब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व झारखंड में एक बड़े सांगठनिक बदलाव को लेकर रणनीति बनाने में जुट गया है। इसी रणनीति के तहत 10 जनवरी 2025 को उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास की दोबारा से झारखंड बीजेपी में एंट्री कराई गई थी। बीजेपी की दोबारा से सदस्यता ग्रहण के लगभग 1 महीने गुजरने के बाद भी रघुवर दास बिना पद के हैं। हालांकि अंदर खाने लगातार वह कई बड़े नेताओं के सम्पर्क में हैं। आखिरकार भाजपा संसदीय बोर्ड ने एक खास रणनीति के तहत एक बड़ा उलटफेर करते हुए दो केंद्रीय पर्यवेक्षक जिसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सांसद डाॅ. के लक्ष्मण शामिल थे दोनों की मौजूदगी में झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया है।

रघुवर दास के राजनीतिक करियर की बात करें तो 3 मई 1955 को जमशेदपुर में उनका जन्म हुआ था। जमशेदपुर के ही भालूबासा हाई स्कूल से मैट्रिक, जमशेदपुर कोआॅपरेटिव काॅलेज से विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इस संस्थान से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह टाटा स्टील में कर्मचारियों के रूप में नौकरी करने लगे। 1974-76 लोकनायक जयप्रकाश नारायण नेतृत्व में की गई जनआंदोलन में वह सक्रिय रूप से शामिल हुए और आपातकाल के दौरान जेल गए। 1977 में उन्होंने जनता पार्टी की सदस्यता ली और 1980 में बीजेपी की स्थापना होने पर पार्टी से जुड़े प्रथम अधिवेशन में शामिल हुए। इसके बाद उन्हें जमशेदपुर महानगर में जिला महामंत्री और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। साल 1995 में पहली बार जमशेदपुर पूर्वी से प्रत्याशी बनाए गए और चुनाव जीतकर बिहार विधानसभा पहुंचे। झारखंड राज्य गठन के बाद 15 नवम्बर 2000 से 17 मार्च 2003 तक बाबूलाल के नेतृत्व वाली सरकार में श्रम मंत्री बने। इसके बाद साल 2005 में अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त, शहरी एवं भवन मंत्री रहे। 30 दिसम्बर 2009 से 29 मई 2010 तक झारखंड के उपमुख्यमंत्री का भी पद सम्भाला।

28 दिसम्बर 2014 से 28 दिसम्बर 2019 तक झारखंड के पहले गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बने जिन्होंने 5 सालों का अपना कार्यकाल पूरा किया। रघुवर दास को 18 अक्टूबर 2023 को उड़ीसा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 24 दिसम्बर 2024 को उन्होंने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था और 10 जनवरी 2025 को रांची स्थित झारखंड बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में भाजपा की दोबारा से सदस्यता ग्रहण की। अब देखना होगा कि झारखंड बीजेपी के नए कप्तान रघुवर दास बनते हैं या कोई और लेकिन इतना तो तय हो गया है कि किसी ओबीसी वर्ग के चेहरे पर ही शीर्ष नेतृत्व दांव लगाने जा रहा है।

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