Uttarakhand

पद्म भूषण से विभूषित होंगे भगतदा

भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान उनके सार्वजनिक जीवन, दीर्घ सेवा और नेतृत्व के लिए राष्ट्रीय मान्यता है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान को दर्ज करता है बल्कि उनकी सेवा-समर्पित यात्रा को देश भर में पहचान देता है

 
भारत सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा करते हुए वरिष्ठ राजनेता भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण, भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है। पद्म भूषण सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में दीर्घकालिक सेवा-समर्पण, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष जारी सूची में कुल 131 पुरस्कार विजेताओं के नाम शामिल हैं जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं और कोश्यारी का नाम इसी सूची में पद्म भूषण श्रेणी के लिए शामिल किया गया है।

कोश्यारी को यह सम्मान पद्म भूषण 2026 के तहत उनकी सार्वजनिक सेवा, राजनीतिक नेतृत्व और समाज-हित में कार्यों के लिए दिया जा रहा है, जिसे सरकारी सूची में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। यह घोषणा गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर की गई थी और सम्मान का औपचारिक वितरण समारोह आम तौर पर राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है।

भगत सिंह कोश्यारी का जीवन उत्तराखण्ड के एक छोटे-से पहाड़ी गांव से राष्ट्रीय मंच तक की एक लम्बी और संघर्षपूर्ण यात्रा रही है। उनका जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले के पलनाधुरा चेताबगढ़ गांव में हुआ था। उन्होंने अल्मोड़ा काॅलेज से एम.ए. (अंग्रेजी) की डिग्री प्राप्त की और छात्र जीवन में ही नेतृत्व कौशल दिखाया जहां वे छात्र संघ के महासचिव भी रहे। शुरुआती जीवन से ही शिक्षा और सेवा के प्रति लगाव ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया और आगे चलकर यह ही उनके सार्वजनिक जीवन की नींव बना।

राजनीतिक रूप से उनका सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ शुरू हुआ और बाद में वे भाजपा के सक्रिय सदस्य बन गए। प्रारम्भिक वर्षों में उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर काम किया, और 1975-77 के आपातकाल के समय उन्हें ‘एमआईएसए’ के तहत अल्मोड़ा तथा फतेहगढ़ केंद्रीय जेलों में रखा गया जिससे उनके संघर्ष और दृढ़ता की झलक मिली।

कोश्यारी ने शिक्षा और समाज सेवा को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने उत्तराखण्ड में कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जिनमें पिथौरागढ़ और नैनीताल के स्कूल शामिल हैं, जिनके माध्यम से हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा-प्राप्ति के अवसर मिले। इसके अलावा उनके नेतृत्व में ‘परवत पियूष’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र की स्थापना भी हुई, जिसने क्षेत्रीय मुद्दों, सामाजिक विवादों और राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया।

राजनीति में उनका प्रवेश 1997 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बनकर हुआ, उस समय उत्तराखण्ड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। 2000 में उत्तराखण्ड अलग राज्य बनने के बाद कोश्यारी ने राज्य के प्रमुख
राजनीतिक नेतृत्व में तेजी से अपनी पहचान बनाई और कई विभागों में मंत्री के रूप में काम किया। अक्टूबर 2001 में उन्हें उत्तराखण्ड के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि 2002 में राजनीतिक बदलावों के चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा लेकिन वे बाद में विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।

राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। वे राज्यसभा सांसद (2008-14) और उसके बाद लोकसभा सांसद (2014-2019) रहे, जहां उन्होंने संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व किया, जो किसी भी राजनेता के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का 22वां राज्यपाल नियुक्त किया गया और उन्होंने फरवरी 2023 तक यह दायित्व निभाया। इसी दौरान उन्हें गोवा का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया, जिससे उनकी संवैधानिक भूमिकाओं की व्यापकता बढ़ी।

पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के बाद उनके गृह क्षेत्र बागेश्वर समेत प्रदेशभर में समर्थकों ने बड़ी खुशी जताई है। स्थानीय जनता ने इसे उनके सेवा-समर्पित जीवन की राष्ट्रीय मान्यता बताया और कहा कि यह सम्मान पूरे पहाड़ी समाज के लिए गर्व का क्षण है। समर्थकों ने उल्लेख किया कि कोश्यारी का जीवन कठिनाइयों और संघर्ष से भरा रहा लेकिन उन्होंने हमेशा सेवाभाव और जनता-हित को सर्वोपरि रखा।

मुख्यमंत्री सहित कई भाजपा नेताओं ने भी इस सम्मान की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि यह सम्मान उनके ‘लम्बे सेवा-समय और अनुशासन’ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कोश्यारी की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा अन्य नेताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है और यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

पद्म भूषण की घोषणा पर कुछ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं, विशेष रूप से महाराष्ट्र के विपक्षी दलों के नेताओं ने इसकी आलोचना की है। कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे दलों ने कहा है कि कोश्यारी के राज्यपाल कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ निर्णयों और बयानों ने राज्य की भावनाओं को आहत किया और इसलिए उन्हें यह सम्मान देना विवादास्पद है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे ‘मराठी समाज के प्रति अपमान’ जैसे शब्दों में व्यक्त किया, यह तर्क देते हुए कि उनके कुछ फैसलों ने संवैधानिक सीमाओं को चुनौती दी।

शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा है कि यह निर्णय ‘मराठी माणूस के घावों पर नमक छिड़कने जैसा’ है। उन्होंने केंद्र सरकार पर राजनीतिक उद्देश्य से सम्मान देने का आरोप लगाया लेकिन भाजपा नेताओं ने इस आलोचना को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पद्म भूषण राष्ट्रीय सम्मान है जो सिर्फ सेवा आधारित मूल्यांकन के आधार पर दिया जाता है न कि किसी राजनीतिक उद्देश्य के चलते।

भाजपा नेताओं के मुताबिक कोश्यारी का जीवन सार्वजनिक सेवा, नेतृत्व क्षमता और समाज-हित के कार्यों में समर्पित रहा है और यह सम्मान इन्हीं मूल्यांकन का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सम्मान देने की प्रक्रिया में निष्पक्षता और सरकारी आयोग की समीक्षा शामिल होती है और कोश्यारी के चयन सूची में शामिल होने का कारण उनकी दशक भर की सेवा-यात्रा को मान्यता देना है।

पद्म भूषण सम्मान का महत्व सिर्फ एक व्यक्तिगत पुरस्कार नहीं है बल्कि वह उन मूल्यों का प्रतीक भी है जिनके लिए सम्मानित व्यक्ति ने अपना जीवन समर्पित किया। यह सम्मान भारत सरकार की ओर से राष्ट्रपति के नाम पर प्रदान किया जाता है और इसके जरिए ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने अपनी क्षमता, दृढ़ता और सेवाभाव के माध्यम से समाज, राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की सूची में राजनीति, कला, खेल, शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक सेवा जैसे विविध क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं, जिन्हें उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पद्म भूषण सहित पद्म विभूषण और पद्मश्री के विजेताओं को अगले कुछ महीनों में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

कोश्यारी के प्रशंसक इस सम्मान को उनकी सेवा-समर्पित जनता-हित यात्रा का प्रतीक मानते हैं और इसे उत्तराखण्ड और देश के लिए गर्व की बात कह रहे हैं। समर्थक यह भी मानते हैं कि उनकी यात्रा सिद्ध करती है कि कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद समाज-हित के लिए निरंतर प्रयास करने वाले व्यक्ति को आखिरकार राष्ट्रीय मान्यता मिल सकती है।

राज्य भर में नेताओं, कार्यकर्ताओं और जनता ने सामाजिक मंचों और सार्वजनिक बयानों के जरिए उन्हें बधाई दी और देश के प्रत्येक हिस्से से शुभकामनाएं प्राप्त हो रही हैं। इस सम्मान को लेकर कई टिप्पणीकारों ने कहा है कि यह फैसला न केवल कोश्यारी के कार्यों का सम्मान है बल्कि ऐसे सभी नेताओं के लिए भी एक संदेश है जिन्होंने जीवन को देश सेवा के लिए समर्पित किया है। पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के साथ ही भगत सिंह कोश्यारी की जीवन-यात्रा एक बार फिर राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गई है, जहां उनके कार्यों और राष्ट्रीय सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सराहा जा रहा है। जैसे-जैसे औपचारिक सम्मान समारोह के आयोजन की तारीख नजदीक आएगी, उम्मीद की जा रही है कि उनके परिवार, समर्थक और साथी नेताओं की उपस्थिति में इस सम्मान की गरिमा को और भी मजबूती मिलेगी।

You may also like