मध्य-पूर्व में युद्ध की आग लगातार भड़कती जा रही है। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी 2026 को शुरू किए गए बड़े सैन्य अभियान के बाद ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है। मिसाइलों, ड्रोन हमलों और तेल मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच दुनिया की नजर इस युद्ध पर टिकी है। इसी बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर सोशल मीडिया में फैली अफवाहों, मौत, घायल होने या छिपे होने के दावों ने इस संघर्ष को और रहस्यमय बना दिया है
मध्य-पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की। इस अभियान को इजरायल ने ‘आॅपरेशन लायन्स रोअर’ नाम दिया है। इस आॅपरेशन के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठानों और सुरक्षा ढांचे को निशाना बनाया गया। इस हमले ने केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं बल्कि ईरान के सत्ता ढांचे को भी गहरा झटका दिया। इस अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, जिससे ईरान की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव आया और उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नए नेतृत्व की भूमिका में आगे आना पड़ा।
इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध का दायरा तेजी से फैलता गया। ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमले शुरू कर दिए। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, तेल टर्मिनल और समुद्री मार्ग भी इस संघर्ष के दायरे में आ गए।
तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है युद्ध
अब यह युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई देशों और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि इजरायल लगातार ईरान के भीतर सैन्य ढांचे और कमांड सेंटरों पर हमले कर रहा है।
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन ने इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया है, जिनमें कुछ नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा है। अब तक कई लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं।
इसके जवाब में इजरायल ने कहा है कि वह ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करने तक अभियान जारी रखेगा। तेल, समुद्री मार्ग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति भी इससे प्रभावित हो रही है। फारस की खाड़ी और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों का बीमा कई गुना महंगा हो गया है और कई जहाजों ने इस मार्ग से गुजरने में हिचक दिखाई है। तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। कई देशों ने अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में भेजने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि तेल आपूर्ति सुरक्षित रखी जा सके।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस युद्ध को केवल रक्षात्मक लड़ाई नहीं मानता बल्कि इसे अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देख रहा है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गाड्र्स (आईआरजीसी) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुले तौर पर धमकी दी है कि यदि वह जिंदा हैं तो उन्हें खोजकर मारने की कार्रवाई की जाएगी।
ईरान ने अपने सहयोगी संगठनों, जैसे लेबनान में हिज्बुल्लाह को भी सक्रिय कर दिया है। इससे यह संघर्ष केवल दो देशों का युद्ध नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में फैलने वाला बहुपक्षीय युद्ध बनता जा रहा है।
नेतन्याहू को लेकर उड़ती अफवाहें
इस युद्ध के बीच एक और दिलचस्प लेकिन गम्भीर मुद्दा सामने आया, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर सोशल मीडिया में अफवाहें फैल रही हैं। कुछ दिनों से इंटरनेट पर यह दावा किया जा रहा था कि ईरान के हमले में नेतन्याहू की मौत हो गई है या वह गम्भीर रूप से घायल हैं। कई पोस्ट में यह भी कहा गया कि उन्हें किसी गुप्त बंकर में छिपा दिया गया है। इन अफवाहों को हवा तब मिली जब सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि वह वीडियो एआई से बनाया गया है और उसमें उनके हाथ में ‘छह उंगलियां’ दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए गए, किसी ने इसे नकली बताया, किसी ने कहा कि असली नेतन्याहू अब सामने नहीं आ रहे।
नेतन्याहू ने खुद किया जवाब
इन अफवाहों को खत्म करने के लिए नेतन्याहू ने खुद एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में वह यरूशलेम के एक कैफे में बैठे कॉफी पीते हुए दिखाई देते हैं और मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि ‘‘मैं मर गया
हूं… कॉफी के लिए।’’ दरअसल यह हिब्रू भाषा का एक मुहावरा है जिसका मतलब है कि उन्हें कॉफी बहुत पसंद है।
उन्होंने कैमरे के सामने अपने हाथ दिखाकर यह भी कहा कि लोग उनकी उंगलियां गिन सकते हैं। इस तरह उन्होंने उन अफवाहों का मजाक उड़ाया जिनमें कहा जा रहा था कि उनका वीडियो एआई से बनाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार इस वीडियो की लोकेशन और तारीख की पुष्टि भी की गई, जिससे स्पष्ट हो गया कि वह जीवित हैं और सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
नेतन्याहू की सीमित सार्वजनिक उपस्थिति
हालांकि यह भी सच है कि युद्ध शुरू होने के बाद नेतन्याहू बहुत कम सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं। इजरायल में आपातकालीन स्थिति लागू है, स्कूल बंद हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक है और लोगों को अक्सर बंकरों में रहने की सलाह दी जा रही है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियां सीमित हो गई हैं और ज्यादातर बयान वीडियो संदेशों या ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जारी किए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनके बारे में अफवाहें फैलाने का मौका मिल गया।
इस पूरे युद्ध में अमेरिका की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। अमेरिकी सेना ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना बताया जा रहा है।
अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि ईरान के साथ कोई समझौता तब तक सम्भव नहीं है जब तक वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ नहीं देता। इसके साथ ही अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह और बड़े हमले भी कर सकता है।
इस युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। कई शहरों में बिजली, इंटरनेट और संचार व्यवस्था प्रभावित हो गई है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है और राहत सामग्री की कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अभी और बढ़ सकता है। यदि हिज्बुल्लाह, सीरिया या खाड़ी के अन्य देश पूरी तरह इस युद्ध में शामिल हो गए तो यह एक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। दूसरी ओर रूस, चीन और यूरोपीय देशों की कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं क्योंकि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा यह युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई लड़ाई बनता जा रहा है। एक ओर इजरायल और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की बात कर रहे हैं वहीं ईरान इसे अपनी सम्प्रभुता और अस्तित्व की लड़ाई बता रहा है।
इस पूरे संकट के बीच इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को लेकर फैली अफवाहें यह भी दिखाती हैं कि आधुनिक युद्ध केवल मिसाइलों और बमों से नहीं लड़े जाते, सूचना, प्रचार और सोशल मीडिया भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिलहाल युद्ध जारी है, तेल बाजार अस्थिर हैं, और दुनिया यह देख रही है कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले लेगा।