• अमित कुमार
बाॅलीवुड में हीरो की पारम्परिक छवि अब तेजी से बदल रही है। शाहरुख खान से लेकर रणवीर सिंह और सैफ अली खान तक, बड़े सितारे अब नेगेटिव और ग्रे शेड्स वाले किरदार निभाकर दर्शकों को चैंका रहे हैं। ‘डर’ से ‘पदमावत’ और ‘ओमकारा’ जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया है कि अब खलनायक भी कहानी का सबसे ताकतवर चेहरा बन सकता है

बाॅलीवुड में लम्बे समय तक हीरो और खलनायक के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची जाती रही है लेकिन अब यह रेखा तेजी से धुंधली होती नजर आ रही है। आज का दौर ऐसा है जहां बड़े सुपरस्टार्स भी पारम्परिक हीरो की छवि से बाहर निकलकर नेगेटिव या ग्रे शेड्स वाले किरदार निभाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि दर्शकों की बदलती पसंद और सिनेमा की विकसित होती भाषा का परिणाम है।

इस बदलाव की शुरुआत को समझने के लिए शाहरुख खान का नाम सबसे पहले आता है। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही ‘डर’, ‘बाजीगर’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए जो पूरी तरह नेगेटिव थे। ‘डर’ में उनका जुनूनी प्रेमी और ‘बाजीगर’ में बदले की आग में जलता एंटी-हीरो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। उस दौर में यह एक बड़ा जोखिम था लेकिन यही जोखिम आगे चलकर उनके करियर की पहचान बना। हाल के समय में भी उन्होंने ‘जवान’ जैसे प्रोजेक्ट्स में ग्रे शेड्स वाले किरदारों के जरिए यह साबित किया कि वे आज भी प्रयोग करने से पीछे नहीं हटते।
इसी तरह रणवीर सिंह ने ‘पदमावत’ में अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभाकर यह दिखाया कि खलनायक का रोल भी प्रभावशाली हो सकता है। उनका यह किरदार न केवल फिल्म की जान बना बल्कि दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने इसे जबरदस्त सराहना दी। रणवीर सिंह ने अपने अभिनय से यह साबित किया कि एक नेगेटिव किरदार भी हीरो से ज्यादा चर्चित और यादगार हो सकता है।
सैफ अली खान का उदाहरण भी इस बदलाव को मजबूती देता है। ‘ओमकारा’ में लंगड़ा त्यागी का उनका किरदार आज भी बाॅलीवुड के सबसे बेहतरीन नेगेटिव रोल्स में गिना जाता है। इसके अलावा ‘तान्हाजी’ में उन्होंने एक क्रूर और चालाक विरोधी का किरदार निभाया जिसने फिल्म की कहानी को और मजबूत बनाया। उनके ये रोल यह दर्शाते हैं कि एक मजबूत खलनायक ही कहानी को ऊंचाई देता है।
ऋतिक रोशन ने भी ‘धूम 2’ में एक स्टाइलिश चोर का किरदार निभाया जो पूरी तरह पारम्परिक हीरो नहीं था लेकिन दर्शकों ने उसे बेहद पसंद किया। यह किरदार एक ऐसा उदाहरण है जहां अपराधी होते हुए भी वह दर्शकों का पसंदीदा बन गया।
दरअसल यह बदलाव केवल कलाकारों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे दर्शकों की सोच में आया बड़ा परिवर्तन है। आज का दर्शक केवल आदर्शवादी कहानियों से संतुष्ट नहीं होता बल्कि वह ऐसे किरदार देखना चाहता है जो वास्तविक जीवन की तरह जटिल हों। यही कारण है कि अब फिल्मों में हीरो और विलेन के बीच का फर्क कम होता जा रहा है।
ओटीटी प्लेटफाॅर्म्स ने भी इस ट्रेंड को मजबूत किया है। नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्लेटफाॅर्म्स पर दर्शकों को ऐसे किरदार देखने को मिले हैं जो पूरी तरह अच्छे या बुरे नहीं होते। इसने दर्शकों की पसंद को बदल दिया है और अब वे बाॅलीवुड से भी उसी तरह की गहराई की उम्मीद करते हैं।
सोशल मीडिया के दौर में खलनायक का किरदार अब सिर्फ विरोधी नहीं रहा बल्कि वह चर्चा का केंद्र बन जाता है। कई बार फिल्म रिलीज होने के बाद हीरो से ज्यादा खलनायक ट्रेंड करता है। यह बदलाव फिल्म निर्माताओं को भी नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
इससे स्पष्ट है कि बाॅलीवुड अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है जहां हीरो की परिभाषा बदल रही है। अब वह केवल अच्छाई का प्रतीक नहीं बल्कि एक जटिल और यथार्थवादी इंसान के रूप में सामने आ रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत होगा और दर्शकों को और भी ज्यादा दमदार और यादगार किरदार देखने को मिलेंगे।

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