• अमित कुमार

 

करीब तीन दशक बाद ‘खलनायक ’ के सीक्वल ‘खलनायक रिटन्र्स’ में संजय दत्त की वापसी तो हुई है लेकिन फस्र्ट लुक ने दर्शकों को उत्साहित करने के बजाय उलझन में डाल दिया है। ‘एनिमल’ और हालिया एक्शन ट्रेंड से प्रेरित लुक के चलते फिल्म की मौलिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं

करीब 30 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘खलनायक’ ने बाॅलीवुड में एंटी-हीरो की एक अलग पहचान बनाई थी और इसमें संजय दत्त का बल्लू बलराम किरदार आज भी दर्शकों के बीच यादगार माना जाता है। अब इतने लम्बे अंतराल के बाद ‘खलनायक रिटन्र्स’ के जरिए इस किरदार को फिर से बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश की जा रही है लेकिन फिल्म का हाल ही में जारी हुआ फस्र्ट लुक दर्शकों को उतना प्रभावित नहीं कर पाया है, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

फिल्म के फस्र्ट लुक वीडियो में संजय दत्त एक खून से सने, रफ और बेहद आक्रामक अंदाज में नजर आते हैं। लम्बे बिखरे बाल, खतरनाक नजरें और स्लो-मोशन वाॅक के साथ उन्हें एक आधुनिक ‘डार्क एंटी-हीरो’ के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है। हालांकि इस लुक को लेकर सबसे बड़ी आलोचना यह सामने आ रही है कि यह मौलिक कम और हाल के ट्रेंड से प्रभावित ज्यादा लगता है। खासतौर पर ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों के बाद बाॅलीवुड में जिस ‘अल्फा मेल’ और हिंसक किरदारों का चलन बढ़ा है, उसी की झलक इस फस्र्ट लुक में साफ दिखाई देती है।
दिलचस्प बात यह है कि संजय दत्त पहले ही ‘अग्नि पथ’, ‘केजीएफ चेप्टर-2’ और ‘शमशेरा’ जैसी फिल्मों में दमदार खलनायक की भूमिका निभा चुके हैं। इन फिल्मों में उनके किरदारों को काफी सराहना मिली थी और उन्होंने खुद को एक मजबूत स्क्रीन-विलेन के रूप में स्थापित भी किया। ऐसे में ‘खलनायक रिटन्र्स’ में उनका यही अंदाज दोहराया जाना दर्शकों को नया नहीं लग रहा, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या यह किरदार सच में कुछ अलग पेश करेगा।
फस्र्ट लुक का एक और प्रमुख पहलू इसका बैकग्राउंड म्यूजिक है। फिल्म के मेकर्स ने ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने को एक नए, धीमे और डार्क वर्जन में पेश किया है। हालांकि यह प्रयोग भी दर्शकों को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाया है। कई लोगों का मानना है कि यह म्यूजिक पुरानी यादों को ताजा करने के बजाय उसे कमजोर करता है और ओरिजिनल गाने की ताकत को दोहराने में असफल रहता है।
फिल्म के फस्र्ट लुक को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा इसकी ‘पहचान’ को लेकर उठ रहा है। एक तरफ यह 90 के दशक की कल्ट फिल्म की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करता है तो दूसरी ओर इसका प्रस्तुतिकरण पूरी तरह आधुनिक, हिंसक और ट्रेंड-ड्रिवन नजर आता है। इस मिश्रण के चलते फिल्म का फस्र्ट लुक एक स्पष्ट दिशा देने में असफल दिखाई देता है। दर्शकों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह फिल्म वाकई ‘खलनायक’ की आत्मा को आगे बढ़ाएगी या सिर्फ मौजूदा ट्रेंड को भुनाने की कोशिश है।
बाॅलीवुड में इन दिनों सीक्वल और रीमेक का दौर चल रहा है जहां पुरानी हिट फिल्मों को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश की जा रही है लेकिन हर बार यह प्रयोग सफल हो, ऐसा जरूरी नहीं है। ‘खलनायक रिटन्र्स’ का फस्र्ट लुक इसी बहस को फिर से हवा दे रहा है कि क्या हर क्लासिक फिल्म का सीक्वल बनाना जरूरी है या फिर कुछ कहानियों को उनकी यादों के साथ ही छोड़ देना बेहतर होता है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ‘खलनायक रिटन्र्स’ ने अपने पहले ही लुक से चर्चा जरूर पैदा कर दी है लेकिन यह चर्चा सकारात्मक से ज्यादा सवालों से भरी हुई है। अब देखना होगा कि आने वाले ट्रेलर और फिल्म की कहानी इन शंकाओं को दूर कर पाती है या नहीं। दर्शकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या संजय दत्त एक बार फिर बल्लू बलराम के किरदार को उसी प्रभाव के साथ जीवंत कर पाएंगे या यह वापसी केवल पुरानी सफलता को दोहराने की एक कोशिश बनकर रह जाएगी।

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