बिहार में बीजेपी को मिली सफलता से महाराष्ट्र के भाजपाइयों को अब मुम्बई में महापौर की कुर्सी करीब नजर आने लगी है। बीजेपी के नेता इस सम्बंध में खुलकर बयान दे रहे हैं। इससे महायुति में तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। ऐसा तब देखने को मिला जब बीजेपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने दावा किया कि मुम्बई में बीजेपी का महापौर बनेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा इस बार किसी भी कीमत पर मुम्बई का महापौर पद जीतने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2017 में मामूली अंतर से बीजेपी ने अवसर गंवा दिया था। लेकिन इस बार बीजेपी महापौर का पद पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। उनके बयान का स्पष्ट संदेश है कि बीएमसी चुनाव में महायुति गठबंधन सत्ता में आएगा और महापौर भाजपा का ही बनेगा।
इस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेताओं ने न सिर्फ नाराजगी व्यक्त की है बल्कि शिंदे गुट के चार पूर्व नगरसेवकों को भाजपा में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। इस खींचतान का असर कैबिनेट बैठक में भी दिखा जहां शिवसेना के सभी मंत्री गैरहाजिर रहे। हालांकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बैठक में मौजूद थे, लेकिन उनके ही गुट के मंत्रियों की अनुपस्थिति राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
इसके बाद शिंदे गुट के मंत्री फडणवीस से मिले और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। नेता प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट कहा कि गठबंधन में कुछ नियम होते हैं। हमारे लोगों को भाजपा में शामिल करना गलत है। उन्हें फडणवीस ने भरोसा दिया है कि इसे सुधारा जाएगा। मंत्री भरत गोगावले ने भी कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती। दोनों तरफ गलतियां हुई हैं। आपसी सहमति से रास्ता निकल जाएगा, वहीं भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बचाव में कहा कि छोटे चुनावों में ऐसी बातें हो जाती हैं। इसे हम मिलकर सुलझा लेंगे। इन बयानों के बाद महायुति के भीतर घमासान शुरू हो गया है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे विपक्ष की साजिश बताकर माहौल शांत करने की कोशिश की है। फडणवीस ने कहा कि विरोधी हमारे बीच झगड़ा लगाने का प्रयास कर रहे हैं। महापौर महायुति का होगा।
स्थानीय निकाय चुनावों से पहले महायुति में एक और विवाद सामने आया है। रायगढ़ जिला परिषद के 59 सीटों के लिए सीट बंटवारे के फाॅर्मूले को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) में तकरार बढ़ गई है। शिंदे गुट के नेता एवं मंत्री भरत गोगावले द्वारा सुझाए गए फाॅर्मूले का सुनील तटकरे ने मजाक उड़ाया जिसके बाद मामला और बिगड़ गया। गोगावले ने तटकरे पर पलटवार करते हुए कहा कि हम अब किसी की चिंता नहीं करते। जो गलत करेगा उसे उसके कर्मों का फल मिलेगा। दोनों नेताओं के बीच यह बयानबाजी जिला परिषद चुनावों से ठीक पहले महायुति के भीतर बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुम्बई मनपा, कैबिनेट की नाराजगी और रायगढ़ में सीट बंटवारे जैसे मुद्दे साफ संकेत देते हैं कि महायुति के भीतर खींचतान तेज हो चुकी है। हालांकि नेताओं के स्तर पर इसे विरोधियों की साजिश या आपसी गलतफहमी बताया जा रहा है, लेकिन चुनाव नजदीक आने के साथ यह तनाव महायुति के लिए चुनौती बन सकता है। जहां तक एकनाथ शिंदे की बात है उनकी नाराजगी नई नहीं है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद न मिलने को लेकर वह नाखुश थे, इसके अलावा उन्हें इस बात से भी आपत्ति रही कि कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के वे नेता जिन्होंने शिवसेना के उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था बाद में उनका भाजपा में शामिल होना भी मौजूदा तनाव के पीछे कारण हैं।
गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने भाजपा को महज 2 सीटों से पछाड़ा था। शिवसेना को 84 और भाजपा को 82 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस बार भाजपा किसी भी कीमत पर महापौर पद हासिल करना चाहती है और यही आकांक्षा शिंदे गुट को असहज कर रही है जो आगे चलकर गठबंधन में दरार का कारण बन सकती।

