ऋषिकेश के चार बार के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल अपनी विधानसभा के विकास के ग्राफ में इजाफा करने में नाकाम साबित रहे। आज ऋषिकेश शहर की हालत यह है कि यहां न रोजगार है, न उचित शिक्षा है और न ही संतोषजनक स्वास्थ्य सेवाएं। अग्रवाल की असफलता का आलम यह है कि यहां से उद्योग-धंधे खत्म होते गए। 150 बेड वाला अस्पताल जो कभी सबका सहारा हुआ करता था वह खुद बेसहारा हो चला है। संजय झील कागजी नाव बनकर रह गई तो ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा भी यहां आकर दम तोड़ गया। जनप्रतिनिधि की विकास कार्यों के प्रति उदासीनता, ट्रांसपोर्ट नगर और आढ़त मंडी सिर्फ शिलापट्ट पर सजावट बनकर रह गई। गाय और गंगा के नाम पर अपनी राजनीतिक वैतरणी पार लगाने वाले अग्रवाल के कार्यकाल में 700 एकड़ भूमि पर बनने वाला गौ अनुसंधान केंद्र आधारशिला तक सिमटकर रह गया। पिछले 20 साल के कार्यकाल की जमीनी रिपोर्ट साबित करती है कि योग नगरी में ‘प्रेम’ के विकास का प्रयोग सफलता की इबारत नहीं गढ़ सका
तकरीबन सवा तीन लाख की आबादी और एक लाख 67 हजार मतदाताओं वाली ऋषिकेश विधानसभा राज्य में दूसरी सबसे बड़ी मतदाताओं वाली विधानसभा है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही ऋषिकेश मसूरी विधानसभा का हिस्सा था और पृथक उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद 2002 में हुए परिसीमन में इसे अलग से विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शूरवीर सिंह सजवाण ऋषिकेश के पहले विधायक निर्वाचित हुए लेकिन 2007 से लेकर 2022 तक भाजपा के प्रेमचंद अग्रवाल लगातार 4 बार से विधायक का चुनाव जीतते रहे हैं।
योग नगरी पर केंद्र सरकार की कृपा-दृष्टि
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में पहली बड़ी ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग परियोजना यहीं से शुरू हुई। स्वास्थ्य सेवाओं का सर्वोच्च संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी यही स्थापित हुआ है। 1105 करोड़ की लागत से नेपाली फार्म से मुनि की रेती तक पहले चरण में करीब साढ़े 12 किलोमीटर लम्बा बाइपास निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है जबकि इसके दूसरे चरण में खारास्रोत मुनि की रेती से ब्रह्मापुरी तक टनल के निर्माण की भी घोषणा हो चुकी है। इसके अलावा पशुलोक बैराज से लेकर मुनि की रेती तक गंगा नदी के तट पर 15 किलोमीटर लम्बा आस्था पथ का निर्माण हो चुका है। प्रसिद्व चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार ऋषिकेश में विशाल चारधाम यात्रा का टर्मिनल भी बनाया गया है।
चुनावी राजनीति के लोकप्रियता के मापदंडों पर देखा जाए तो प्रेमचंद अग्रवाल इस क्षेत्र के एक मजबूत राजनेता माने जाते हैं। 2007 में डोईवाला से अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने यहां आए अग्रवाल को ऋषिकेश की जनता ने खुले दिल से अपनाया और लगातार चार बार विधायक बनाया। प्रेमचंद की लोकप्रियता कहें या भाजपा की मजबूत चुनावी रणनीति कि हर बार के विधानसभा चुनाव में अग्रवाल पहले से ज्यादा मतों से जीत कर अपनी लोकप्रियता साबित करते रहे जबकि कभी यह क्षेत्र कांग्रेस के मजबूत गढ़ के तौर पर जाना जाता था।
ऋषिकेश की जनता का ग्राफ नहीं उठ पाया
जनता ने अग्रवाल को इतने सालों तक सिर पर मुकुट की तरह बैठाया लेकिन इन 20 सालों में विकास रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उच्च शिक्षा के नाम पर ऋषिकेश की जनता को हर बार निराशा ही हाथ लगी। विधायक निधि द्वारा किए जा रहे कामकाजों को जनता और स्वयं विधायक ने विकास का पर्याय मान लिया जिसकी कभी कोई कमी नहीं रही। यहां खडंजे, सम्पर्क मार्ग, हैण्ड पम्प, नालियां, स्कूल में फर्नीचर, कक्ष, सड़कंे आदि का जमकर काम किया गया है लेकिन यह काम विधायक निधि से ही किए जाते रहे हैं। हर चुनावी वर्ष में इन कामांे की एक तरह से बाढ़ आ जाती है। क्षेत्र में विधायक निधि का ज्यादा उपयोग प्रेमचंद अग्रवाल के खाते में यह एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।
भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार ऋषिकेश विधानसभा नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में बंटी हुई है जहां नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र की पृथक समस्याएं हैं लेकिन दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के साधनों की कमी की समस्याएं एक जैसी ही हैं। ऋषिकेश चारधाम यात्रा का प्रमुख द्वार है। साथ ही अध्यात्म का केंद्र होने के चलते इस नगर में जनसंख्या का अति दबाव रहता है। स्वास्थ्य, शिक्षा का केंद्र होने से पौड़ी और टिहरी जनपदों के निवासी भी इसी नगर में आ जाते हैं। जिस कारण यहां की जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्ष बढ़ रहा है। बावजूद इसके यहां सुविधाओं में इजाफा उतना नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। रोजगार के अवसर बढ़ने की बजाय उल्टे घटे हैं।
खत्म होते गए औद्योगिक क्षेत्र
अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही ऋषिकेश और इसके आस-पास का क्षेत्र एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हुआ करता था। इनमें देश का सबसे बड़ा औषधि कारखाना आईडीपीएल, स्टूर्जिया कारखाना, जेजी ग्लास फैक्ट्री, वीनस सीमेंट कारखाना और अनेक चूना भट्ठा भी स्थापित थे। ऋषिकेश से सटे हुए टिहरी जिले के ढालवाला और तपोवन का इलाका भी उद्योग क्षेत्र के तौर पर प्रसिद्ध था। वर्ष 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा ढालवाला को एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया। इनमें तीन दर्जन के करीब छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए। इन सभी उद्योगांे में ऋषिकेश के अलावा टिहरी,पौड़ी देहरादून जिले के हजारों लोगों को रोजगार मिलता रहा। परंतु सरकारी उपेक्षा और सब्सिडी के खेल के चलते अनेक उद्योग बंद होते चले गए। राज्य बनने के बाद लोगों को खाली पड़े उद्योगों की भूमि सोने के भाव नजर आने लगी। इसके बाद इन जमीनों पर आवासीय काॅलोनियां और शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स बनते चले गए। आईडीपीएल कम्पनी राज्य बनने के बाद बंद होती चली गई। अब नाम मात्र के लिए यहां कारखाना बचा हुआ है। स्टूर्जिया केमिकल कारखाना भी बंद हो चुका है। जेजी ग्लास कारखाना सिर्फ गोदाम के तौर पर उपयोग किया जा रहा है। ढालवाला क्षेत्र में सरिया कारखाने ही चल रहे हैं लेकिन अब उनके भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। तपोवन क्षेत्र तो उद्योग क्षेत्र से पूरी तरह बाहर हो चुका है और अनियोजित पर्यटन क्षेत्र के तौर पर उभर चुका है। आज ऋषिकेश ऐसी विधानसभा के तौर पर
पहचाना जाता है जिसमें एक भी उद्योग काम नहीं कर रहे हैं। इस कारण हजारों लोगों को रोजगार से महरूम होना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी और टैम्पू यूनियन से जुड़े विरेंद्र सजवाण कहते हैं कि ‘‘ऋषिकेश नगर की अपनी एक क्षमता है। एक ही मुख्य मार्ग होने से यातायात प्रभावित होता है, लोगों ने रोजगार का मतलब टैक्सी, टैम्पू विक्रम आदि को ही रोजगार मान लिया गया है साथ ही रेहड़ी-पटरी कारोबार को भी रोजगार के नाम पर नगर में बढ़ावा दिया जाता रहा है जिससे नगर की धरणीय क्षमता पर प्रभाव पड़ रहा है। जैसे पहले यहां कई काराखने थे जिनसे हजारों लोगों को रोजगार मिलता था अब वह खत्म हो चुके हैं। राज्य बनने के बाद सबसे बुरा असर कारखानांे पर ही पड़ा और एक के बाद एक बंद होते चले गए।’’
ट्रैफिक में जाम, त्राहिमाम
ऋषिकेश विश्वभर में योग और पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात है। लाखों पर्यटक और तीर्थ यात्रियों का इस नगर में आवागमन वर्षभर होता रहता है। सावन महीने में चलने वाली कांवड़ यात्रा भी ऋषिकेश से ही होती है जिसमें लाखों शिव भक्त आते हैं। साथ ही चार धाम तीर्थयात्रा का मुख्य द्वार होने के चलते तीर्थ यात्री भी लाखों की तादात में ऋषिकेश आते हैं। गंगा नदी पर राफ्टिंग के चलते छह माह तक लगातार पर्यटकों का आवागमन भी होता रहता है परंतु आज तक ऋषिकेश को पर्यटन नगरी के तौर पर जो सुविधाएं और अवस्थापना के निर्माण मिलने थे वह नहीं मिल पाए। लाखों की संख्या में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आगमन के बावजूद नगर में एक भी वाहन पार्किंग तक नहीं है। इसके चलते हमेशा नगर में जाम की समस्या बनी रहती है। सप्ताहांत में तो जाम की स्थिति इस कदर भयावह हो जाती है कि कई कई घंटों तक वाहनों का लम्बा जाम लगना एक सामान्य बात बन चुकी है। हालत ऐसे हैं कि हरिद्वार से नटराज चौक तक केवल 24 किलोमीटर के मार्ग पर वाहनों को पहुंचने में तीन घंटे लगते हैं। नटराज चैक से महज 3 किलोमीटर दूर मुनि की रेती तपोवन तक जाने में 5 घंटे तक लग जाते हैं। पुलिस प्रशासन को सबसे ज्यादा मेहनत ट्रैफिक प्लान और उनके लागू करने में करनी पड़ती है। इसके लिए 8 किलोमीटर दूर हरिद्वार रोड़ पर स्थित नेपाली फार्म जहां से 30 किलोमीटर दूर भानियावाला और रानीपोखरी होते हुए पर्यटकों को ढालवाला भद्रकाली चैक से ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। इसी आपाधापी में सैकड़ों छोटे वाहन नगर की संकरी गलियों में जाम से बचने के लिए घुस जाते हैं जिससे समूचे नगर में भी हालात बदतर हो जाते हैं। मुनि की रेती, चैदह बीघा, आईएसबीटी ऋकिषेश का मार्ग भी छोटे वाहनों के चलते जाम की स्थिति में आ जाता है। इसका सबसे बुरा असर नगर के स्थानीय लोगों पर ही पड़ रहा है। फिलहाल सुखद बात यह है कि नगर निगम में ही बहुमंजिला भवन का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें 240 वाहनों की पार्किंग का भी प्रावधान है लेकिन यह पार्किंग शहर के मध्य में ही है जबकि शहर के अन्य भागों में भी स्थाई पार्किंग की सबसे ज्यादा जरूरत है।
त्रिवेणी घाट चेक डैम योजना हुई लापता
ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट नगर का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। मान्यता है कि गंगा नदी और सरस्वती के साथ-साथ यमुना का भी संगम इसी स्थल पर होने से इसे त्रिवेणी कहा जाने लगा। घाट से करीब दो सौ मीटर दूर एक प्राकृतिक जल स्रोत से जल निकलता है जिसे सरस्वती नदी माना जाता है तो घाट से लगा हुआ राम मंदिर के पास ऋषिकुंड में यमुना का जल माना जाता है। गर्मियों में गंगा नदी घाट से सौ मीटर दूर हो जाती है जिसके चलते श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए समस्या होती है। वर्षों से गंगा नदी हर की पैड़ी की तरह चेक डैम बनाकर गंगा को वर्ष भर घाट तक बहने की योजाना की मांग होती रही। राज्य बनने के बाद 2005 में कांग्रेस सरकार के समय चेकडैम योजना स्वीकृत की गई थी और इसके लिए पांच करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए साथ ही आईआईटी रुड़की को योजना के डिजाइन और डीपीआर के लिए करीब 50 लाख का बजट भी अवमुक्त किय गया था। आज तक यह योजना परवान नहीं चढ़ी और 20 वर्ष के बाद भी न तो चेकडैम बना और न ही यह पता चल पाया है कि जो धन अवमुक्त हुआ था उसका क्या हुआ। चेकडैम योजना भले ही सरकारी सिस्टम की सुस्ती के बाद गायब हो गई हो लेकिन राजनीतिक तौर पर यह योजना हर चुनाव में वादों और दावों के साथ उभरकर सामने आती रही है।
स्थानीय निवासी योगेश शर्मा बताते हैं कि तिवारी सरकार के समय जो सोच सरकार की थी वह उनके बाद किसी में नहीं देखी गई। ऋषिकेश के पहले विधायक शूरबीर सिंह सजवाण ने चेकडैम के लिए गम्भीरता से प्रयास किए लेकिन उनके बाद 20 सालों से प्रेमचंद अग्रवाल जी ही विधायक हैं और विधानसभा अध्यक्ष और शहरी विकास मंत्री व वित्त मंत्री भी रहे हैं लेकिन उन्होंने इस योजना को देखने-समझने और उसे फिर से पूरा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। अगर यह चेकडैम बन जाता तो त्रिवेणी घाट हर की पैड़ी जैसा घाट बन जाता। कई मामलों में तो त्रिवेणी घाट हर की पैड़ी से बेहतर होता क्योंकि इसमें कई किलोमीटर लम्बा आस्था पथ बन चुका है।’’
नगर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अतिमहत्त्वपूर्ण संजय झील योजना विगत 35 वर्षों से आज भी अपने स्वरूप में नहीं आ पाई है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय 90 के दशक में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष विरेंद्र शर्मा छोटू भाई और तत्कालीन विधायक रणजीत सिंह वर्मा के प्रयासों से हरिद्वार रोड काले की ढाल पर रम्भा नदी पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा यह योजना स्वीकृत की गई थी लेकिन इस योजना को धरातल पर उतारने का काम नगर पालिका नहीं कर पाई। उत्तराखण्ड बनने के बाद इस योजना पर शुरुआती चरण में बीस लाख रुपए खर्च किए गए लेकिन वह भी सिर्फ पुस्ता बनाने और चहेते ठेकेदारों को काम देने के नाम पर हुआ। लम्बे समय के बाद संजय झील योजना को वन विभाग के संरक्षण में दे दिया गया और इसमें करीब एक करोड़ की लगात से सौंदर्यीकरण, पार्क तथा हरित पट्टी वानिकीकरण का काम किया गया।
स्थानीय निवासी राजेश तिवारी का कहना है कि ‘‘वे बीस सालों से सुनते रहे हैं कि संजय झील बनेगी। वर्षों के बाद झील के नाम पर सिर्फ पार्क और पथ बनाया गया है। पार्क और हरियाली वाला पथ मार्ग है तो बहुत खूबसूरत लेकिन झील का अता-पता नहीं है। सुना है कि एक करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं लेकिन झील के नाम पर सरकंडे और घास के अलावा कुछ नहीं है।’’ इसी तरह से काले की ढाल निवासी लोकेश कुमार का कहना है कि अगर संजय झील को साफ करके झील बना दी जाए तो इस क्षेत्र के लोगों को भी कई फायदे होंगे। जैसे मसूरी की कृत्रिम रूप से छोटी झील के बनाए जाने से वहां पर्यटकों की संख्या बेहताशा बढ़ी है जिससे रोजगार के साधन बढ़े है। संजय झील जो कि मसूरी झील से कई गुना बड़ी है और प्राकृतिक हरियाली वाले क्षेत्र में है। इसके बनने से हम लोगों को तो फायदा होगा ही साथ ही पर्यटकों को भी एक नया स्थान मिलेगा।
ऋषिकेश का 150 विस्तरों वाला शांति प्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही ऋषिकेश नगर और उसके ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ टिहरी और पौड़ी जिले के हजारों निवासियों के लिए एक अहम अस्पताल रहा है, वहीं राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा दुर्गति इसी अस्पताल की हुई है। इसका एक बड़ा कारण यह रहा है कि एम्स का पूरा निर्माण होने के बाद राज्य सरकार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अस्पताल को अनदेखा किया जाने लगा जबकि ऋषिकेश चारधाम यात्रा का द्वार होने के कारण इस अस्पताल का महत्त्व पहले से ज्यादा हो गया। बावजूद इसके आज भी यह अस्पताल बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है और रेफर चिकित्सालय बनकर रह गया है। हालांकि अब यह अस्पताल उपजिला चिकित्सालय बन चुका है लेकिन सुविधाओं में कोई बड़ा इजाफा नहीं हुआ है।
इस अस्पताल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए दो माह पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल को मरीज बनकर यहां गुपचुप दौरा करना पड़ा। जिलाधिकारी के इस दौरे से अस्पताल और उसके प्रबंधन की पोल तो खुली ही, साथ ही कई खामियां भी समाने आईं। इनमें सबसे बड़ी खामियां ऑपरेशन थियेटर होने के बावजूद आॅपरेशन में भारी कमी और मरीजों को मामूली बिमारियों में भी एम्स और अन्य अस्पतालों में रेफर करने का काम स्वयं जिलाधिकारी ने पकड़ा। डीएम द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद भी अस्पताल की सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। आज भी गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा स्थाई तौर पर नहीं बनाई जा सकी है। सप्ताह में मात्र तीन दिन के लिए ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल पा रही है जबकि प्रतिदिन 200 से भी ज्यादा की ओपीडी इस अस्पताल में रिकॉर्ड की गई है।
स्थानीय निवासी और परिवहन कारोबारी पंकज शर्मा कहते हैं कि ‘‘उत्तर प्रदेश के समय में यह अस्पताल बहुत ही बेहतर था लेकिन राज्य बनने के बाद और एम्स बनने के बाद से इसके हालात ठीक होने की बजाय बिगड़ते ही रहे। अस्पताल में मरीजों के साथ दुव्र्यहार होना और मरीजों को रेफर करने के अलावा इस अस्पताल को कोई और काम नहीं है। स्थानीय विधायक दावे तो बड़े-बड़े करते हैं लेकिन मरीजों को दावे नहीं अपना इलाज चाहिए जो उन्हें यहां नहीं मिलता। एम्स में जाओ तो वहां स्थानीय निवासियों को अपना इलाज करवाना महाभारत का युद्ध जीतने जैसा होता है क्योंकि एम्स में 90 प्रतिशत मरीज उत्तर प्रदेश से ही आते हैं जिनकी भारी तादात के कारण स्थानीय और पहाड़ से आने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऋषिकेश का यह अस्पताल हम सबके लिए एक बड़ा सहारा था जो अब खुद बेसहारा बनकर रह गया है।
ऋषिकेश का बालिका महाविद्यालय भी ठंडे बस्ते में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली भाजपा सरकार अपने इस नारे के प्रति कितनी संवेदनशील है इसका सबसे बड़ा प्रमाण ऋषिकेश का बालिका महाविद्यालय है। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निंशक’ ने ऋषिकेश में बालिका महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी ऋषिकेश को एक अदद बालिका महाविद्यालय नहीं मिल पाया। वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान ‘दि संडे पोस्ट’ ने विधायक प्रेमचंद अग्रवाल से साक्षात्कार में इस विषय को उठाया था तब अग्रवाल ने जोर देकर कहा था कि उनकी प्राथमिकताओं में बालिका महाविद्यालय है जिसे वह जल्द ही पूरा करवाएंगे लेकिन आज तक बालिका महाविद्यालय सिर्फ अग्रवाल की प्राथमिकता और घोषणाओं में ही है जबकि उनका विधायक के तौर पर चौथा कार्यकाल भी करीब-करीब पूरा होने वाला है। 2027 के चुनाव में वे फिर से इस वादे को अपनी प्राथमिकता में भी रखेंगे। वास्तव में ऋषिकेश में उच्च शिक्षा की बड़ी समस्या है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा के नाम पर दो दर्जन इंटर काॅलेज और कई निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाएं हैं लेकिन उच्च शिक्षा के नाम पर मात्र एक ही राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय है जबकि इस महाविद्यालय में तीन-तीन जिलों के छात्र उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, देहरादून से रानी पोखरी डांडी श्यामपुर छिदरवाला, हरिपुर रायवाला जैसे क्षेत्रों के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं तो वहीं टिहरी से ढालवाला नरेंद्र नगर, मुनि की रेती और पौड़ी जिले के लक्ष्मण झूला यमकेश्वर क्षेत्र से सैकड़ांे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का यही महाविद्यालय एकमात्र आसरा है लेकिन ऑटोनाॅमस संस्थान बनने के बाद इसमें सभी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश मिलना सम्भव नहीं है।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार उप्रेती कहते हैं कि ‘‘ऋषिकेश का शांति प्रपन्न शर्मा राजकीय महाविद्यालय एक आॅटोनाॅमस महाविद्यालय बन चुका है और इसके आधे परिसर में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का परिसर बनाया जा चुका है। इसके चलते यहां छात्रों की संख्या पर एक तय सीमा का नियम हो चुका है। इसका सबसे बड़ा असर बालिकाओं पर पड़ा है। अगर बालिका महाविद्यालय बन जाता तो सबके लिए अच्छा होता।
श्री देव सुमन महाविद्यालय परिसर के निदेशक महावीर सिंह रावत कहते हैं कि ‘‘वर्तमान में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के शैक्षिक परिसर बनने के बाद पीजी कॉलेज की स्नातकोत्तर में छात्रों की सीटों में वृद्धि की गई है। इसके साथ ही अब इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी विकास हो रहा है। नया एकेडमिक ब्लाॅक भी इसी वर्ष पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। फिलहाल साढे़ तीन हजार छात्र हमारे परिसर में अध्ययनरत हैं और जैसे-जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा हम 6 हजार तक छात्रों को एडमिशन दे सकेंगे।
सरकारी फाइलों से हुआ गायब ट्रांसपोर्ट नगर
2006 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में ऋषिकेश के गुमानीवाला में एक ट्रांसपोर्ट नगर और आढ़त मंडी बनाए जाने की घोषणा की गई थी जिसके लिए बकायदा शिलान्यास का शिलापट्ट भी नगर पालिका परिसर में रखा गया था। भूमि का चयन भी किया गया। तब कहा गया था कि एक वर्ष में ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण पूरा हो जाएगा लेकिन आज भी ट्रांसपोर्ट नगर के नाम से एक भी ईंट नहीं लग पाई है।
स्थानीय कारोबारी पंकज गुप्ता कहते हैं कि ‘‘तिवारी सरकार के समय नगर पालिका परिसर में एक साथ कई योजनाओं का शिलान्यास और कई योजनाओ ंकी घोषणाएं की गई थी। उनमें गुमानीवाला में ट्रांसपोर्ट नगर और आढ़त मंडी की स्थापना का भी शिलापट्ट लगाया गया था लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जमीन का चयन होने के बावजूद 20 साल बाद भी ऋषिकेश नगर को दोनांे ही योजनाएं नहीं मिल पाई हैं। आज नगर में यातायात का दबाव के चलते सबसे बुरा असर कारोबार पर ही पड़ रहा है। कारोबारियों-आढ़तियों को लोडिंग-अनलोडिंग में सबसे ज्यादा समस्या पैदा हो गई है। पुलिस इसके लिए योजना बनाती है जिसे कारोबारियों पर थोप दिया जाता है। रात दस बजे से सुबह छह बजे तक अव्यावहारिक लोडिंग-अनलोडिंग का नियम बना दिया गया है। अगर आढ़त मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर बन जाता तो हम कारोबारियों की सारी समस्या तो दूर होती, साथ ही नगर में यातायात का दबाव भी कम होता लेकिन विधायक कहते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।’’
खंडूरी सरकार का गौ अनुसंधान केंद्र भी हुआ लापता
भाजपा सरकार का एजेंडा गाय और गंगा रहा है। लोगों का कहना है कि गौ रक्षा के नाम पर भाजपा सरकार ने काम किया कम है लेकिन दिखाया ज्यादा ही है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.सी. खण्डूरी द्वारा पशुलोक स्थिति विस्थापित क्षेत्र में करीब 700 एकड़ खादर भूमि पर एक भव्य गौ अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखना है। जिसमें गौमूत्र से लेकर गाय के गोबर और गायों से होने वाले लाभों के साथ-साथ गौवंश की नस्ल सुधार के लिए भी अनुसंधान किए जाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन 17 वर्ष बीत जाने के बावजूद उक्त केंद्र का निर्माण शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया है। हैरत की बात यह है कि विधायक प्रेमचंद अग्रवाल भी इस योजना को पूरा नहीं करवा पाए हैं।
स्थानीय निवासी और गौसेवक
संजय शास्त्री कहते हैं कि पहले हमारे द्वारा एक गौसदन बगैर सरकारी सहायता के चलाया जा रहा था जिसे सरकार ने अपनी भूमि बताकर उसे हटा दिया। खण्डूरी सरकार के समय इस गौ अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखी लेकिन निर्माण के नाम पर कुछ नहीं हुआ। अगर यह केंद्र बन जाता तो इसमें असहाय और आवारा गौवंश को रखा जा सकता है क्योंकि जमीन बहुत थी और इसमें कई हजार गायों को रखा जा सकता था लेकिन न तो गौ अनुसंधान केंद्र बन पाया और न ही गौ सदन।
बात अपनी-अपनी
प्रेमचंद अग्रवाल का कार्यकाल पूरी तरह से शून्य है। शिक्षा के नाम पर बीस सालों से कोई प्रगति नहीं हुई। महिला डिग्री काॅलेज की घोषणा अधूरी है। नए डिग्री कॉलेज की मांग वर्षों से चली आ रही है। नगर में एक भी सरकारी पार्किंग नहीं है। ट्रांसपोर्ट नगर योजना को खत्म ही कर दिया गया। पुराने कारखाने बंद हो गए, नए कारखानों के लिए कोई योजना नहीं बनाई जा सकी है।
सुधीर राय, प्रदेश महासचिव, उत्तराखण्ड स्वाभिमान मोर्चा, ऋषिकेश
जनता की उम्मीद पर वह खरे नहीं उतरे। वे अपने बीस साल के कार्यकाल में एक भी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए। इन वर्षों में अनेक योजनाएं खत्म कर दी गई हैं। महिला डिग्री काॅलेज, त्रिवेणी घाट चेकडैम ट्रांसपोर्ट नगर योजना खत्म हो गई तो विधानसभा बैकडोर भर्ती घोटाला भी हुआ। नगर से कूड़ा आज तक नहीं हटाया जा सका है। विधानसभा बैकडोर भर्ती घोटाला भी प्रेमचंद अग्रवाल जी के खाते में दर्ज हो चुका है।
जयेंद्र चंद रमोला, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी, ऋषिकेश
प्रेमचंद अग्रवाल का कार्यकाल पूरी तरह से फेल रहा है। नगर में कोई भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। हॉस्पिटल रेफर सेंटर बने हुए हैं। गंदगी का अम्बार लगा हुआ है, कूड़े का पहाड़ नगर के बीचों-बीच खड़ा हो चुका है। एक भी कारखाना नहीं खोला जा सका, जो पहले थे वह अब बंद हो गए। रोजगार के लिए कोई योजना नहीं है।
मास्टर दिनेश चंद, निर्दलीय मेयर प्रत्याशी, ऋषिकेश
ऋषिकेश विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: प्रेमचंद अग्रवाल (अवधि: 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र मुद्दा / जमीनी स्थिति अंक (10 में)
सड़क, ट्रैफिक व पार्किंग जाम सबसे बड़ी समस्या, स्थायी पार्किंग और ट्रैफिक समाधान का अभाव 3/10
स्वास्थ्य सेवाएं एम्स होने के बावजूद सरकारी अस्पताल बदहाल, रेफरल सिस्टम हावी 3/10
उच्च शिक्षा बालिका महाविद्यालय अब तक नहीं, एकमात्र काॅलेज पर दबाव 3/10
रोजगार व उद्योग पुराने उद्योग बंद, नया औद्योगिक विजन नहीं 2.5/10
पर्यटन व अवस्थापना आस्था पथ, बाइपास जैसी बड़ी परियोजनाएं लेकिन स्थानीय लाभ सीमित 5/10
पेयजल, नाली व स्थानीय विकास विधायक निधि से छोटे कार्य हुए लेकिन मूल समस्याएं कायम 5/10
परिवहन व ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ट्रांसपोर्ट नगर और आढ़त मंडी वर्षों से अधर में 2.5/10
बड़ी घोषणाओं का क्रियान्वयन चेकडैम, संजय झील, गौ अनुसंधान केंद्र जैसी योजनाएं फाइलों में 2/10
जन-सम्पर्क व राजनीतिक पकड़ लगातार चार बार जीत, मजबूत राजनीतिक पकड़ बरकरार 7/10
समग्र विकास दृष्टि छोटे कार्य अधिक, दीर्घकालिक विजन कमजोर 3/10
औसत : 3.6/10 फाइनल ग्रेड : फास
‘मेरे रिएक्शन को उग्र स्वभाव न माना जाए’
योग नगरी ऋषिकेश से लगातार चार बार विधायक बने प्रेमचंद अग्रवाल के साथ तमाम तरह के विवाद जुड़े हैं। एक विवाद के चलते कैबिनेट मंत्री की कुर्सी से ही उनको हाथ धोना पड़ा था। अग्रवाल आज भी अपने क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर जाने जाते हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ के विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार ने उनसे ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों और पुरानी घोषित योजनाओं के बारे में विस्तृत बातचीत की
आपके कार्यकाल में 5 ऐसी बड़ी योजनाएं जो आपके द्वारा लाई गई हों या उन पर काम किया गया हो?
मेरी पहली योजना रायवाला प्रतीत नगर पेयजल योजना है जब से यह योजना बनी तब से आज चार-चार मंजिल तक बगैर मोटर चलाए ही पीने का पानी पहुंच रहा है। इस योजना से अन्य क्षेत्रों को भी पेयजल की सप्लाई की जा रही है।
दूसरी बड़ी योजना बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा के निर्माण के काम रहे हैं। ऋषिकेश विधानसभा का लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र हमेशा से ही बाढ़ प्रभावित रहा है। हर साल बाढ़ आती थी जिससे किसानों की फसलें तो बर्बाद होती ही थी, साथ ही भवन, मकानों को भी बड़ा नुकसान पहुंचता था। छिद्दरवाला, साहब नगर, ठाकुरपुर, गौहरी माफी हरिपुर कलां का क्षेत्र, खदरी, गुमानी वाला रायवाला इन क्षेत्रों में तो बाढ़ हमेशा से समस्या रही है। मेरे इसी कार्यकाल में 64 करोड़ के काम सिर्फ गौहरीमाफी में ही बाढ़ नियत्रण और सुरक्षा के लिए काम हुए हंै। सूदार श्यापुर रेलवे फाटक के पास ही साढ़े छह करोड़ का एक बेली ब्रिज बनाया है जिससे अब रेल के आने से उनको फाटक में नहीं रुकना पड़ता, वे आसानी से बेली ब्रिज से होकर अपने गांव-घरों के लिए निकल जाते हैं। अब 1120 करोड़ की लागत से नेपाली फार्म से खारास्रोत तक एलिवेटेड रोड भारत सरकार ने स्वीकृत कर दी है। इसके बनने से सभी को बहुत बड़ा फायदा होगा। मेरी विधानसभा के शहर के दूसरे पार्ट की बात करूं तो सबसे बड़ी समस्या शहर में पार्किंग की रही है। यहां कोई स्थाई पार्किंग नहीं थी। जब मैं शहरी विकास मंत्री आवास और वित्त मंत्री था तो मैंने आवास मंत्री के रूप में एमडीडीए से 126 करोड़ की लागत से नगर निगम में ही बहुमंजिला भवन और पार्किंग का काम स्वीकृत करवाया जिसका निर्माण चल रहा है। इसमें नगर निगम का नया कार्यालय और अन्य विभागों के कार्यालय बनाए जा रहे हैं और 250 वाहनों की भी पर्किंग बनाई जा रही है। चंद्रेश्वर नगर में जहां गंगा नदी पर गंदा पानी जाता था वहां पर मल्टीस्टोरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करवाया गया है।
ठाकुरपुर ग्रामसभा में बाढ़ के कामों पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। निर्माण कार्यों में अनियमितता बरती जा रही है?
अभी दस दिनों पूर्व मैंने सिंचाई विभाग को बाढ़ नियंत्रण के लिए काम शुरू करवाने का निर्देश दिया है। इसमें रायवाल का आडवानी प्लांट भी शामिल है जिसमें जमीन से पानी फूट रहा है। इन दोनों के लिए 10 करोड़ का प्रस्ताव बन चुका है और उसे बाये सुरक्षा योजना में स्वीकृत किया गया है। अब दोनों ही जगहों पर निमार्ण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएंगे।
यहां सभी उद्योग एक के बाद एक बंद हो चुके हैं। आप 20 वर्षों में कोई भी उद्योग अपने क्षेत्र में नहीं लगावा पाए?
पहले ऋषिकेश औद्योगिक क्षेत्र था लेकिन मेरे विधायक बनने से पहले ही ऋषिकेश में बड़े-बड़े उद्योग बंद हो गए। आईडीपीएल, स्टूर्जिया केमिकल्स जैसी बड़े कारखाने राज्य बनने से पहले ही बंद हो चुके थे। मेरे पहले कार्यकाल में लाल तप्पड़ औद्योगिक क्षेत्र था लेकिन 2012 में वह डोईवाला का हिस्स बन गया। ढालवाला तपोवन टिहरी जिले में है। इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि मेरे कार्यकाल में ऋषिकेश के उद्योग बंद हुए हैं। मैं जब आवासीय मंत्री था तक मैंने आईडीपीएल और बाबा काली कमली क्षेत्र की जमीन जिसकी लीज खत्म होने वाली है तो एक बड़ा योग और वेलनेस सेंटर के तौर पर बनाने का प्रस्ताव रखा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह योग सेंटर बन जाता है तो हजारों लोगों को इससे जोड़ कर रोजगार के साधन विकसित किए जा सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि माननीय मुख्यमंत्री जी मेरे प्रस्ताव पर विचार कर रहे होंगे।
अतिक्रमण की भारी समस्या है। इस पर आप लगाम क्यों नहीं लगावा पा रहे हैं?
मैंने इसकी रोकथाम के लिए नगर निगम और ऋषिकेश पुलिस प्रशासन से कई बार कार्यवाही करने को भी कहा है जिस पर समय-समय पर कार्यवाही भी हुई है। मैंने प्रशासन को कहा है कि पहले तो हम इनका वेरिफिकेशन करें और किसी भी तरह का अतिक्रमण न होने दें।
2004 में त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी को पहुंचाने के लिए चेक डैम योजना स्वीकृत की गई थी लेकिन 22 वर्ष बीत जाने के बाद यह योजना भी सरकारी फाइलों से ही गायब हो गई?
हां, सिचाई विभाग को इस चेकडैम योजना के लिए स्वीकृति मिली थी और आईआईटी रूड़की ने इसका प्रारूप बनाने में खर्च भी किया गया था लेकिन बाद में इस योजना पर काम नहीं हुआ। बीच में इस पर काम शुरू होने की गतिविधि भी तेज हुई थी लेकिन फिर से यह रुक गया। हमारा फोकस था कि गंगा जी को त्रिवेणी घाट तक लाए जाने का काम हो। आज हम गंगा की धारा को घाट तक तो ला चुके हैं जो कि साफ बहता हुआ जल है। इसमें ही गंगा आरती और अन्य धार्मिक कार्य स्नान आदि होते है। चेकडैम योजना पर अब बहुत बड़ी धनराशि चाहिए। फिर इसमें सबसे बड़ी समस्या एनजीटी का आदेश भी है जिस कारण अड़चनें आ रही हैं। हमारा प्रयास तो पूरा है लेकिन मामला जब प्राधिकारण स्तर पर आ जाता है तो योजना रुक जाती है।
वर्ष 1990 में स्वीकृत हुई संजय झील योजना आज भी अधूरी क्यों है?
अभी तक इसमें 90 से एक करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं जिससे पार्कों का सौंदर्यीकरण और बेंच आदि का निर्माण हुआ है। पेड़-पौधे और पर्यटकों की सुविधा के लिए निर्माण कार्य किए गए हैं। यह प्राकृतिक जल स्रोत है इसमें बाहर से कोई पानी तो लाना नहीं है। हमारा प्रयास है कि इसमें और काम तेजी से किए जाएं झील की सफाई और उसका स्वरूप झील का ही बनाया जाएं।
2010 में ऋषिकेश में बालिका महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा जो आज भी पूरी नहीं हुई है?
हमने इसके लिए भूमि तलाशने का भरपूर कार्य किया। श्यामपुर में हमें जमीन नहीं मिली तो हमने रायवाला में भूमि देखी तो वह पर्याप्त नहीं थी फिर खदरी में जमीन देखी तो वह जमीन रीवर लैंड की थी जिसमें खतरा हो सकता था। फिर छिद्दवाला में जमीन तलाशी तो वह हाथी काॅरिडोर होने के कारण काॅलेज के लिए सही नहीं थी। इस कारण इस पर काम नहीं हो पाया क्योंकि मेरे क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी भूमि की ही है।
खंडूरी सरकार के समय पशुलोक में गौ सदन और गौ अनुसंधान केंद्र का शिलान्यास किया लेकिन आज न तो योजना का अता पता है जबकि शिलान्यास का पत्थर भी गायब हो चुका है?
गौ अनुसंधान का बोर्ड लगा हुआ है लेकिन उसका निर्माण नहीं हुआ यह मैं स्वीकार करता हूं। जिस उद्देश्य के लिए यह केंद्र बनाया जा रहा था उसका काम तो रुका नहीं पशुलोक के द्वार निराश्रित गौवंश और गौ पर अनुसंधान का कार्य किया जा रहा है।
नगर का एकमात्र राजकीय चिकित्सालय के हालात ठीक नहीं हैं। यह रेफर अस्पताल की ही तरह काम कर रहा है। आपने इस पर कोई प्रयास नहीं किए?
मैंने इस पर कोई कसर नहीं छोड़ी। स्टाफ की कमी को दूर किया। आज इस अस्पताल में हर सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। कई कमियां हैं तो उनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। एम्स ऋषिकेश में बाहरी राज्य के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा होती है जिस कारण पहाड़ से आने वाले हमारे मरीजों का समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा था। अब इसके लिए अलग से व्यवस्था बनावा दी गई है।
ऋषिकेश में कूड़ा निस्तारण की भयंकर समस्या है। इसके लिए कूड़ा संयंत्र लगाए जाने का दावा आज भी पूरा नहीं हो पाया है?
लालपानी में कूड़ा निस्तारण संयंत्र लगभग पूरा बन चुका है। उसका एक ट्रायल पूरा हो चुका है। अब इसका फाइनल ट्रायल होना है। इस वर्ष यह संयंत्र काम करना शुरू कर देगा।
श्यामपुर गुमानीवाला में ट्रांसपोर्ट नगर तथा आढ़त मंडी की भी योजना स्वीकृत की गई लेकिन यह योजना भी आज सरकारी फाइलों में ही गायब हो गई?
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
ऋषिकेश में शराब और नशे के अलावा जुआ घर चल रहे हैं। आप विधायक हैं और इस पर कोई लगाम क्यों नहीं लगा पा रहे हैं?
मैंने इस पर लगाम लगाने का भरपूर प्रयास किया है। आज आबकारी विभाग लगातार ऐसे तत्वों पर कार्यवाही कर रहा है। मैंने अपने क्षेत्र में विदेशी शराब की छह माॅल की दुकानों के लाइसेंस रद्द करवाकर उन दुकानों को बंद करवा दिया है। शहर में शराब, मांस और अंडे की बिक्री तक पर प्रतिबंध शुरू से ही लगा हुआ है। मैं यहां शराब नहीं बिकने दूंगा। जहां तक अवैध शराब हो या अन्य अवैध गतिविधियां हों उन सब पर मैंने पुलिस-प्रशासन को कठोर से कठोर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है जिसका असर यह है कि आज कार्यवाही हो रही है और लगाम लग रही है।
बापू ग्राम को राजस्व ग्राम बनाए जाने की मांग वर्षों से चली आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेदखली का डर छाया हुआ है। आपने हर चुनाव में बापू ग्राम को राजस्व ग्राम बनाने के लिए वादा किया लेकिन हुआ कुछ नहीं?
बापू ग्राम की समस्या आज एक बड़ा संवेदनशील विषय बना हुआ है। मैं जब पहली बार विधायक बना था तो मैंने विधानसभा में बापू ग्राम को राजस्व ग्राम बनाए जाने की बात उठाई थी। मैंने इसके लिए प्रयास किया कि बापू ग्राम और उसके अन्य क्षेेत्रों जैसे मीरा नगर, अमित ग्राम आदि को नगर निगम में शामिल करवाया जाए जिससे यहां के निवासियों को नगर के जैसे सुविधाएं मिले क्योंकि पूरा बापू ग्राम में तो अब खेती नहीं होती सारा इलाका नगर बन चुका है। कम से कम बापू ग्राम के निवासियों को जमीन पर रहने का और उसका एक तरह से
स्वामित्व निगम के अभिलेखों में दर्ज होना जरूरी है। अचानक से एक महिला अनिता कंडवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाल दी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिया कि विभाग बने हुए मकानों को छोड़कर खाली पड़ी अपनी भूमि पर कब्जा लें। वन विभाग ने मकानों के आगे चारदीवारी के भीतर जमीन को भी अपने कब्जे में लेने का काम शुरू कर दिया जिससे भारी विवाद हुआ और हिंसक आंदोलन हुआ। मैंने बापू ग्राम की समस्या का हल निकालने की बात की है। हमारे गृह मंत्री जी आए तो मैंने उनसे भी इस समस्या का हल निकालने की बात की है। मैंने सुझाव दिया है कि इसके दो ही रास्ते हैं, एक है सुप्रीम कोर्ट और दूसरा रास्ता है सरकार इसे कैबिनेट में लाए। जब मुख्यमंत्री जी ऋषिकेश में चारधाम यात्रा के शुभारंभ में आए तब मैंने उनसे यह बात की और उसी मंच से मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बहुत जल्द इसे कैबिनेट में लाकर इसका हल निकालेंगे। इसके बावजूद कुछ लोग इसे राजनीति के चश्मे से देख रहे हैं और एक संघर्ष समिति बनाकर धरने में बैठे हैं जबकि धरने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार पर भरोसा करना चाहिए।
आप पर आरोप लगता है कि आप गुटबाजी करते हैं और अपने ही समर्थकों के साथ संवाद करते हैं और अपने समर्थकों को कोई छोड़कर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ संवादहीनता दिखाते हैं। यह कहां तक सच है?
अगर यह सच्चाई होती तो मैं चार बार लगातार चुनाव नहीं जीत पाता और विधायक नहीं बनता। जनता और कार्यकर्ताओं ने ही मुझे विधायक बनाया है। सब जानते हैं कि इस तरह के अनर्गल आरोप लगाने वाले खुद गुटबाजी करते हैं और कार्यकर्ताओं में गुटबाजी करवाते हैं लेकिन ऐसे लोग आज तक कभी सफल नहीं हुए और न आगे होंगे।
आप पर अनेक विवाद हुए है। सड़क पर मारपीट करने धमकाने का वीडियो भी खूब चर्चाओं में रहा। आपका स्वभाव ऐसा क्यों है?
आप मेरे साथ इतनी देर से बैठे हैं, बड़ेे कठोर सवाल पूछ रहे हैं, क्या मैंने आपसे नाराजगी जताई है? आपको कहीं से लगा कि मैं आपके सवालों से नाराज हूं। आपके हर सवाल का मैंने पूरी ईमानदारी से जवाब दिया तो फिर आप समझ सकते हैं कि यह आरोप कैसे सही हो सकते हैं? अगर आप मुझसे झूठी बात कहेंगे तो मैं रिएक्ट नहीं करूंगा, मेरे रिएक्शन को आप मेरा उग्र स्वभाव मान लेते हैं तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं? मैं अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेह हूं, अपना काम कर रहा हूं, अगर कोई मेरे ऊपर झूठा आक्षेप लगाए और मुझे अपशब्द कहे तो उसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं 19 सालों से विधायक हूं, मुझ पर कोई भ्रष्टाचार का, व्यभिचार का, कमीशनखोरी का, जमीन पर कब्जे का आरोप नहीं लगा लेकिन कोई मुझ पर ऐसा आरोप लगाएगा, कोई गलत करे, गलत बोले तो स्वाभाविक है कि मैं भी एक इंसान ही हूं, मैं जवाब तो दूंगा ही उसके कोई उग्र स्वभाव मान ले तो क्या किया जा सकता है।