Uttarakhand

विकास के दम पर काऊ मजबूत लेकिन विवाद पीछा नहीं छोड़ते

देहरादून जिले की रायपुर विधानसभा वर्ष 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई जबकि इससे पहले यह क्षेत्र मसूरी और देहरा होते हुए डोईवाला विधानसभा का हिस्सा रहा। डोईवाला से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 2002 और 2007 में विधायक रहे, जिनका प्रभाव इस क्षेत्र पर भी रहा। करीब 1 लाख 35 हजार मतदाताओं वाली इस सीट पर 2012 में पहली बार चुनाव हुआ, जिसमें उमेश शर्मा काऊ ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को महज 496 मतों से हराकर बड़ा उलटफेर किया। काऊ ने 2012 में कांग्रेस जबकि 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर लगातार तीन जीत दर्ज कर इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई है और वर्तमान में भी वही विधायक हैं। काऊ की छवि एक ओर जहां विवादित और दबंग नेता की रही है, वहीं समर्थकों और बड़ी संख्या में मतदाताओं के बीच उन्हें ‘विकास पुरुष’ के तौर पर भी देखा जाता है जो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कराने वाले नेता माने जाते हैं

तकरीबन 1 लाख 35 हजार मतदाताओं वाली रायपुर विधानसभा अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही राजनीतिक रूप से एक मजबूत सीट रही है। उस समय देहरादून जिले में केवल तीन विधानसभा क्षेत्र, चकराता, देहरा और मसूरी, मौजूद थे। रायपुर का कुछ हिस्सा मसूरी और बड़ा हिस्सा देहरा विधानसभा में शामिल था। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद हुए पहले परिसीमन में मसूरी और देहरा के कई हिस्सों को अलग कर डोईवाला, राजपुर और ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्रों का गठन किया गया, जिसमें रायपुर क्षेत्र डोईवाला विधानसभा में शामिल हो गया। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन में पहली बार रायपुर विधानसभा का गठन हुआ और इसे एक अलग राजनीतिक पहचान मिली।

वर्तमान में रायपुर विधानसभा के विधायक उमेश शर्मा काऊ हैं जो 2012 से लगातार तीसरी बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता और डोईवाला से दो बार विधायक रह चुके त्रिवेंद्र सिंह रावत को महज 496 मतों से हराकर सनसनीखेज जीत दर्ज की।

वर्ष 2017 में उमेश शर्मा काऊ भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के प्रभुलाल बहुगुणा को 36,771 मतों के बड़े अंतर से हराया और प्रदेश में सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वाले विधायकों में शामिल हुए।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से देहरादून में मजबूत पकड़ रखने वाले हीरा सिंह बिष्ट को 30 हजार से अधिक मतों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की।

रायपुर क्षेत्र में उमेश शर्मा काऊ का मजबूत जनाधार माना जाता है। लगातार तीन बार बड़े अंतर से जीत के चलते समर्थकों ने उन्हें ‘विकास पुरुष’ की संज्ञा दी है। हालांकि विरोधी उन पर कई आरोप भी लगाते रहे हैं। क्षेत्र में पिछले 14-15 वर्षों में विकास कार्यों की गति तेज हुई है लेकिन कुछ क्षेत्रों में विकास को लेकर भेदभाव और उदासीनता के आरोप भी सामने आते हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विधायक का स्वभाव कई बार उग्र हो जाता है और यदि कोई व्यक्ति विकास कार्यों पर सवाल उठाता है तो समर्थकों द्वारा दबाव बनाया जाता है। इसका एक उदाहरण प्राथमिक शिक्षा निदेशालय में देखने को मिला जहां अस्थल गांव के प्राथमिक विद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर विधायक अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान समर्थकों ने शिक्षा निदेशक अजय नौटियाल के साथ अभद्रता की और मारपीट भी की जिसमें उन्हें चोटें आईं और टांके लगाने पड़े। इन विवादों के बावजूद यदि विकास कार्यों की बात करें तो क्षेत्र में व्यापक स्तर पर काम हुआ है। देहरादून के कई क्षेत्रों में पेयजल संकट बना रहता है जबकि रायपुर में पिछले वर्षों में 100 से अधिक ट्यूबवेल, नलकूप और मिनी नलकूप लगाए गए हैं। इसके अलावा करीब 90 हैंडपम्प भी स्थापित किए गए हैं। रायपुर, डांडा लाखोंड, सरस्वती विहार, नेहरू काॅलोनी, डांडा खुदा ने वाला, अपर राजीव नगर, अजबपुर, एकता विहार, किरसाली, गुल्लर खाना, अधोईवाला, चूना भट्टा और आमवाला तरला जैसे क्षेत्रों में पेयजल लाइनों का विस्तार किया गया है।

अधिकांश कस्बाई क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाने का काम भी किया गया है। सड़क निर्माण, पुरानी सड़कों का पुनर्निर्माण, पुल-पुलियों का निर्माण और सम्पर्क मार्गों का विस्तार भी बड़े पैमाने पर हुआ है। स्थानीय निवासी सूरजमणि के अनुसार, ‘व्यवहार चाहे जैसा हो लेकिन काम कराने में विधायक पीछे नहीं रहते।’

हालांकि एक स्थानीय कारोबारी का आरोप है कि विकास कार्यों के ठेके अधिकतर विधायक के समर्थकों को ही दिए जाते हैं। यदि किसी अन्य ठेकेदार को काम मिलता भी है तो उसमें बाधाएं उत्पन्न कर दी जाती हैं जिससे काम समय पर पूरा नहीं हो पाता और बाद में उसी काम को दोबारा कराया जाता है जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

स्थानीय निवासी सुमित राणा का कहना है कि विकास कार्य दिखाई देते हैं लेकिन उनमें खर्च की पारदर्शिता पर सवाल हैं। आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर विभागीय अधिकारी सूचना देने में टालमटोल करते हैं जबकि सम्बंधित पक्षों को इसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है।

रायपुर विकासखंड के सौड़ा से द्वारा गांव को जोड़ने वाले निर्माणाधीन मोटर मार्ग में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और स्थानीय मिट्टी डालकर सड़क बनाई जा रही है। बलदेव सिंह के अनुसार, ‘सब कुछ सामने हो रहा है लेकिन विरोध करने का साहस किसी में नहीं है।’

मालदेवता को बाढ़ से अब तक राहत नहीं
रायपुर विधानसभा क्षेत्र में हर वर्ष बरसात के दौरान बाढ़ की समस्या बनी रहती है। सहस्त्रधारा और मालदेवता क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। पिछले वर्ष भारी वर्षा के कारण आई आपदा में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। सहस्त्रधारा क्षेत्र में नदी से सिल्ट और बजरी निकालने का कार्य किया जा रहा है जबकि मालदेवता क्षेत्र में सौंग नदी से वर्षों से सिल्ट नहीं हटाई गई है जिसके कारण हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि नदी में सीमित स्तर पर खनन की अनुमति दी जाए तो बाढ़ से राहत मिल सकती है। व्यापार मंडल से जुड़े यशपाल पंवार के अनुसार, ‘करीब 8 हजार की आबादी हर साल प्रभावित होती है और समाधान के लिए केवल खनन ही एक व्यावहारिक विकल्प है।’

सितम्बर 2025 में सहस्त्रधारा क्षेत्र में खनन के लिए मैसर्स कैलाश रिवर बैड मिनरल एलएलपी को पांच वर्षों के लिए खनन लाॅट आवंटित किया गया, जिसमें प्रति वर्ष 7,45,200 टन आरबीएम निकालने का प्रावधान है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि तय सीमा से अधिक खनन हो रहा है, जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है।

अवैध खनन की खनखन और बढ़ता खतरा
खनन कार्यों में लगे डम्परों की तेज रफ्तार से स्थानीय लोगों की जान जोखिम में है। मालदेवता के शेर के क्षेत्र में रात करीब 9 बजे एक 16 वर्षीय किशोर की डम्पर से कुचलकर मौत हो गई जिससे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने डम्परों की आवाजाही पर रोक लगा दी। हालांकि प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन से सरकार को राजस्व मिल रहा है लेकिन आम जनता भय के माहौल में जी रही है। कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि खनन गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते।

उच्च शिक्षा अभी भी अधूरी
मालदेवता क्षेत्र में 2014 में स्थापित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय तीन दर्जन गांवों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां करीब 1300 छात्र अध्ययनरत हैं लेकिन 12 वर्षों बाद भी यहां सीमित विषय ही संचालित हो रहे हैं, राजनीति विज्ञान, हिंदी और गृह विज्ञान।

अर्थशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, सैन्य विज्ञान और मानवशास्त्र जैसे विषयों की लम्बे समय से मांग है। एम.काॅम के विषय शुरू नहीं हो पाए हैं जबकि व्यावसायिक पाठ्यक्रम, जैसे बीबीए, पर्यटन, पत्रकारिता और योग भी शुरू नहीं किए गए हैं। नया भवन निर्माणाधीन है और लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में धीमी प्रगति
रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करीब ढाई लाख आबादी के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। अस्पताल का उन्नयन किया जा रहा है लेकिन नया भवन अभी 50 प्रतिशत ही बन पाया है। अस्पताल में अधिकांश स्टाफ मौजूद हैं लेकिन जनरल सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ संविदा पर हैं। केवल एक ऑपरेशन थियेटर होने के कारण जटिल सर्जरी सम्भव नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार, नया भवन तैयार होने के बाद 30 बेड और अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी।

नगर निगम में शामिल लेकिन समस्याएं बरकरार
नगर निगम में शामिल होने के बावजूद रायपुर के कई क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अनियोजित शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है जबकि सफाई, जल निकासी और सड़क व्यवस्था जैसी सुविधाएं न के बराबर हैं।
नेहरूग्राम और डांडा लखौंड जैसे क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक है। शहर से सटे होने के कारण यहां तेजी से निर्माण हो रहा है लेकिन नियोजन के अभाव में समस्याएं बढ़ रही हैं। अवैध प्लाॅटिंग, संकरी सड़कें और नालों पर अतिक्रमण भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकते हैं।

2025 की आपदा में भी यह देखा गया कि नालों के किनारे अवैध निर्माण और पुस्ते डालने से जल प्रवाह बाधित हुआ जिससे बाढ़ की स्थिति और गम्भीर हो गई। प्रशासन ने कुछ कार्रवाई जरूर की लेकिन प्रभावी नियंत्रण अभी भी चुनौती बना हुआ है।

कुल मिलाकर रायपुर विधानसभा में एक ओर विकास कार्यों की गति दिखाई देती है तो दूसरी तरफ पारदर्शिता, पर्यावरणीय संतुलन, नियोजित विकास और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण बनकर उभरे हैं। आने वाले चुनावों में यही मुद्दे मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करेंगे।

बात अपनी-अपनी

रायुपर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में सड़कों का काम समय पर पूरा नहीं हो रहा है और नालियों का निर्माण भी नहीं हो रहा है जिससे बरसात में क्षेत्र के निवासियों को बड़ी समस्या का समान करना पड़ता है। सरकार के विकास के कामों में इतनी अनियोजिता बरती जा रही है कि सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद बिजली, पानी की लाइनों के लिए सड़कों को खोदा जा रहा है। एक विभाग पहले सड़क खोदता है फिर सड़क को ठीक कर दिया जाता है तो उसके बाद दूसरा विभाग सड़क को खोद देता है। रायपुर क्षेत्र की मलिन बस्तियों का नियमितीकरण भी नहीं हो पाया है जबकि 2016 में कांग्रेस सरकार ने इसके लिए नीति बना दी थी। भाजपा सरकार हो या उसके विधायक उमेश शर्मा काऊ हो सभी जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए हिंदू-मुस्लिम के नाम पर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। आज भी रायपुर विधानसभा में सिर्फ एक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ही है लेकिन कोई अन्य उद्योग इस क्षेत्र में नहीं लग पाए हैं। रोजगार के साधनों का विधायक ने अपने 15 साल के कार्यकाल में पैदा किए हो तो विधायक बताएं। सिर्फ खनन और हिंदू-मुस्लिम के नाम पर ही काऊ का कार्यकाल को देख सकते हंै। विकास के काम पर कोई उपलब्धि नहीं हैं। विधायक निधि तो हर विधायक खर्च करता है। राज्य सेक्टर से काम होते ही हैं यह तो हर विधायक करेगा ही लेकिन विधायक की लाॅजिस्टिक पावर और विजन से ही जनता के काम देखे जाते हैं जो उमेश शर्मा काऊ के 15 सालों के कार्यकाल में देखने में नहीं मिला।
भूपेंद्र सिंह नेगी, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय युवा कांग्रेस

उमेश शर्मा काऊ जनता से जुड़े जन प्रतिनिधि हैं और जनता से उनका जुड़ाव हमेशा से ही रहा है। प्रदेश के हर जनप्रतिनिधि को उमेश शर्मा काऊ से सीख लेनी चाहिए कि जनता के काम कैसे होते हैं और लोकप्रियता क्या होती है? ऐसे ही काऊ लगातार चुनाव नहीं जीत रहे हैं जनता उनके साथ है। जनता तभी किसी नेता या जनप्रतिनिधि के साथ होती है जब वह जनता के साथ जुड़ा हो और उनकी समस्याओं का निराकरण करे। प्रदेश के जो जनप्रतिनिधि यह कहते हैं कि सरकारी सिस्टम और नौकरशाही बेलगाम हो गई है उन सभी को काऊ से यह सीखना चाहिए कि बेगलाम घोड़ों को कैसे लगाम लगाई जाती है। एक अधिकारी जो लम्बे समय से अभद्रता का प्रतीक बन चुका था उसको काऊ ने सबक सिखाया। आप प्रदेश के किसी भी विधायक के क्षेत्र में विकास कार्यों की तुलना करें तो काऊ के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम हुए हैं और लगातार काम हो रहे हैं। उमेश शर्मा काऊ आज सत्ताधारी पार्टी के विधायक हैं लेकिन उनका लम्बा कार्यकाल विपक्ष का ही रहा है। इसलिए यह नहीं कह सकते कि काऊ सत्ताधारी विधायक हैं तो काम करवाने में सफल हो रहे हैं वे पहले भी अपने क्षेत्र में काम करने के लिए जाने जाते रहे हैं।
शिव प्रसाद सेमवाल, अध्यक्ष, राष्ट्रवादी रिजनल पार्टी उत्तराखण्ड

उमेश शर्मा काऊ जी का जो भी कार्यकाल है वह घोटालों और रायुपर विधानसभा की जनता को प्रताड़ित करने का कार्यकाल रहा है। उग्र होना और जनता से बदसलूकी करने का इनका अपना रिकाॅर्ड है। जमीनों के घपले, खरीद-फरोख्त और अवैध खनन इस क्षेत्र में जमकर किया जा रहा है जिनका पूरा संरक्षण विधायक द्वारा किया जाता है यही नहीं अनेक अवैध कामों में हिस्सेदारी उमेश शर्मा काऊ जी की है। यह कोई एक आरोप नहीं लगा रहा हूं बकायदा जितने भी काम किए जाते हैं उनमें काऊ जी के ही अपने लोगों को ठेका दिया जाता है। अगर कोई दूसरा व्यक्ति ठेका लेने का प्रयास करता है तो उसे ठेका नहीं दिया जाता फिर भी कोई ठेका हासिल कर भी लेता है तो विधायक काऊ जी के समर्थक उसे काम नहीं करने देते। पूरी रायपुर विधानसभा में अवैध खनन का काम विधायक के संरक्षण में किया जा रहा है। दो-तीन साल पहले उमेश शर्मा काऊ कहा करते थे कि सौंग नदी का सीमांकन होना चाहिए और नदी में कहीं भी खनन नहीं होना चाहिए। इससे दून घाटी के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है लेकिन वही विधायक जमकर खनन की पैरवी कर रहा है और अपने लोगों को खनन के पट्टे दिलवा रहा है। कहा जा रहा है कि उमेश शर्मा काऊ विकास पुरुष हैं लेकिन सारे विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढे हुए हैं जो सड़कें बन रही है उनकी गुणवत्ता निम्न स्तर की है। अगर कोई व्यक्ति गुणवत्ता को लेकर शिकायत करता है तो विधायक जी के चेले और ठेकेदार उस व्यक्ति को डरा-धमका कर चुप करवा देते हंै। विभागीय अधिकारी भी विधायक के दबाब में चुप्पी साधे हुए हैं। केसरवाला का सम्पर्क मार्ग 15 सालांे से पक्का होने की आस में है लेकिन विधायक जी उसे भी पूरा नहीं करवा पाए हैं जबकि 2022 में अमित शाह जी रायपुर क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए आए थे और उन्होंने चुनावी मंच से ही कहा था कि अगर काऊ चुनाव जीतते हैं तो दो महीने में ही केसरवाला की सड़क पक्की हो जाएगी। चार साल हो गए लेकिन उस सड़क पर विधायक जी कोई बात तक नहीं करते हैं। हर साल 5 करोड़ की विधायक निधी मिलती है उससे तो लीपापोती ही हो रही है। लेकिन काम जो हो रहे हैं वह तो राज्य सेक्टर, जिला योजना से हो रहे हैं उन पर विधायक अपना दखल देकर फंड को हड़पने का काम तो कर ही रहे हैं, साथ ही विधायक काऊ जी उन सभी कामों को अपने काम में जोड़कर जनता को दिग्भ्रमित करने का काम 15 सालों से कर रहे हैं। विधायक जी यह बता दे कि 15 सालों में वे एक ऐसा काम बता दे जो उनकी बड़ी योजना में रहा है। पूरे रायपुर क्षेत्र में सिर्फ केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय का एक संस्थान आॅर्डिनेंस फैक्टरी ही है इस क्षेत्र में कोई भी एक कारखाना तक नहीं खुल पाया है। बेरोजगारों के लिए कोई रोजगार के साधन विकसित तक नहीं किए। रायपुर में जमीनों की कमी नहीं है लेकिन आज तक विधानसभा क्षेत्र में सिडकुल के माध्यम से कोई औद्योगिक क्षेत्र तक नहीं बन पाया है तो यह विधायक के 15 सालों की नाकाम ही तो है। विधायक का कोई विजन ही नहीं है। इन 15 सालों में विधानसभा में अपने क्षेत्र की बात तक विधायक ने नहीं की है। आप रिकॉर्ड उठाकर देख सकते हैं कि विधानसभा सत्र में काऊ जी ने कितनी बात अपने क्षेत्र के मुद्दों को लेकर बात की हो।
सूरत सिंह नेगी, पूर्व ग्राम प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता, रायपुर

रायपुर विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: उमेश शर्मा काऊ (अवधि: 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र                                                                        मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक  (10 में)
  • सड़क व सम्पर्क मार्ग अधिकांश क्षेत्रों में सड़कों, सम्पर्क मार्गों व इंटरलाॅकिंग का व्यापक निर्माण, कुछ स्थानों पर गुणवत्ता और ठेकेदारी पर सवाल 7/10
  • स्वास्थ्य सेवाएं सीएचसी मौजूद, स्टाफ लगभग पूरा, लेकिन आईसीयू, विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी और नया भवन अधूरा 6/10
  • शिक्षा व उच्च शिक्षा स्नातकोत्तर महाविद्यालय मौजूद, पर सीमित विषय, कई विषय व व्यावसायिक कोर्स अब तक शुरू नहीं 5/10
  • रोजगार व उद्योग स्थानीय स्तर पर बड़े उद्योगों का अभाव, ठेकेदारी आधारित काम, रोजगार के स्थायी अवसर सीमित 4/10
  • पलायन एवं युवा स्थिति शहर के नजदीक होने से पलायन कम लेकिन गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सीमित 6/10
  • खेल तथा बुनियादी ढांचा खेल सुविधाओं पर विशेष काम नहीं, बुनियादी ढांचे में असंतुलन 4/10
  • प्रशासनिक व्यवस्था शहरी क्षेत्र होने से सुविधाएं उपलब्ध लेकिन आरटीआई व पारदर्शिता पर सवाल 5/10
  • ग्रामीण/शहरी समस्याएं नगर निगम में शामिल क्षेत्रों में अनियोजित शहरीकरण, सफाई व मूलभूत सुविधाओं की कमी 5/10
  • कानून व्यवस्था और पर्यावरणीय मुद्दे खनन, डम्परों की आवाजाही और दुर्घटनाओं से खतरा, बाढ़ प्रबंधन में कमी 4/10
  • जनसम्पर्क एवं राजनीतिक सक्रियता विधायक का मजबूत जनाधार, सक्रियता, लेकिन व्यवहार व दबंग छवि पर विवाद 7/10
औसत :  5.3/10 फाइनल ग्रेड : पास

‘जनता की जिम्मेदारी पूरी करना मेरी प्राथमिकता’
उमेश शर्मा काऊ लगातार तीन बार रायपुर विधानसभा से चुनाव जीतते आ रहे हैं। अपने क्षेत्र में विकास पुरुष के नाम से पहचान बना चुके काऊ पूर्व में ग्राम प्रधान और नगर निगम देहरादून में नेता विपक्ष भी रह चुके हैं। 2012 में रायपुर विधानसभा से पहली बार विधायक बने काऊ के बारे में कहा जाता है कि प्रदेश के किसी भी विधानसभा क्षेत्र में इतने काम नहीं हुए हैं जितने उनकी विधानसभा में करवाए जा चुके हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ के विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार ने उमेश शर्मा काऊ से विधानसभा के विकास कार्यों और समस्याओं को लेकर बातचीत की

आपका विधायक का 14 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इन वर्षों में आपके द्वारा अपने क्षेत्र में बड़ी और दीर्घकालीन योजनाएं कौन सी हैं जो आप अपनी उपलब्धि मानते हैं?
जब आप मेरे क्षेत्र में जाओगे तो आपको हर जगह मेरे कार्यकाल में काम हुआ दिखाई देगा। मैं आपको मुख्य-मुख्य कुछ बड़ी योजनाओं के बारे में बात देता हूं। जब मैं 2012 में पहली बार विधायक बना तो मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी कि पूरे रायपुर क्षेत्र में पेयजल की समस्या का निस्तारण करना। इसके लिए मैंने सबसे पहले काम किया। इन वर्षों में मैं 90 से अधिक ट्यूबवेल और 35 ओवर हैड टैंकों का निर्माण रायपुर विधानसभा के हर क्षेत्र में करवा चुका हूं। इनमें से करीब सभी पूरे हो चुके हैं और सिर्फ तीन-चार पर काम चल रहा है। मेरी विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी समस्या सड़कों और सम्पर्क मार्गों की थी। रायपुर से देहरादून शहर के लिए केवल एक ही मेन रोड थी। मैंने देहरादून आने जाने के लिए गूलर घाटी से छह नम्बर पुलिया तक जो अब मेन रोड बन गई है इसे पहले कार्यकाल में ही बना दिया था। सहस्रधारा से रायपुर, आईटी पार्क से रायपुर, आईटी पार्क से अस्थल होते हुए रायपुर मोटर मार्ग भी मेरे ही कार्यकाल में बना है। कई सम्पर्क मार्गों का निर्माण हुआ। इसके अलावा  पांच महत्वपूर्ण पुलों, जिसमें छह नम्बर पुल, डील काली मंदिर का पुल, नरूरखेड़ा पुल, दीप नगर-केदापुरम को जोड़ने के लिए पुरानी पुलिया की जगह बड़े पुल का निर्माण के साथ-साथ कई छोटे पुलों का निर्माण भी करवाया।
मेरे क्षेत्र में तीसरी बड़ी समस्या सीवर लाईन सिस्टम की थी जिसे दुरुस्त करने के लिए मैंने नेहरू काॅलोनी की पुरानी लाईन की मरम्मत और नई लाईन का निर्माण,चकशाह नगर और हरिद्वार रोड के लिए पूर्व की सीवर लाईन से जोड़ने के लिए लाईन, राज्य सेक्टर से नाबार्ड के सहयोग से सरस्वती विहार सी ब्लाॅक और गणेश विहार में सीवर लाईन का काम, देवभूमि इंक्लेव और धर्मपुर के छूटे हुए हिस्सों के लिए सीवर लाईन का निर्माण तथा अधोईवाला सरस्वती विहार के लिए सीवर लाईन का काम मेरे ही कार्यकाल में हुआ और हो रहा है। आम वाला सहस्रधारा के 18 करोड़ की सीवर लाईन योजना के लिए चीफ सैकेट्री जी के  प्रस्ताव पर बात हो चुकी है और मंजूरी भी मिल चुकी है। जल्द ही इसका शासनादेश भी आ जाएगा और काम शुरू हो जाएगा। सड़कों, पार्कों का निर्माण और सौंदर्यीकरण भी मेरी विधानसभा में सबसे ज्यादा हुआ है। मियांवाला में दो बड़े पार्क, डिफेंस काॅलानी में गौरा देवी पार्क का निर्माण, सहस्रधारा रोड का सौंदर्यीकरण और कई क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा सौंदर्यीकरण, पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना  में कई करोड़ के काम हो चुके हैं और कई कार्य चल रहे हैं। आईटी पार्क से रायपुर वाली नई रोड का सौंदर्यीकरण का काम का टेंडर भी हो चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। सौंग डैम भी पूरा होने वाला है। इसके बनने के बाद रोजगार के साधन बढ़ेंगे तथा पर्यटक हब बनेगा।

मालदेवता क्षेत्र में सौंग नदी का स्तर बहुत बढ़ गया है जिससे बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सहस्रधारा में तो खनन करके नदी का तल नीचे किया जा रहा है लेकिन मालदेवता में काम नहीं हो रहा है ऐसा क्यों?
समस्या यह है कि मालदेवता में सौंग नदी का क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र में आता है इसलिए वहां खनन की अनुमति आज तक नहीं मिल पाई है। हम प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए हमारी सरकार केंद्र सरकार से बात कर रही है। हमने इसके लिए किसी भी तरह से चैनलाइजेशन करवाने के लिए पत्र भी भेजा है। फाॅरेस्ट से अनुमति लेकर इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाना है। सिर्फ यही एक बड़ा कारण है जिसके कारण मालदेवता में सौंग नदी पर काम नहीं हो पा रहा है। मालदेवता में डिग्री काॅलेज का निर्माण और नया भवन, रायुपर सामुदायिक स्वास्थ्य कंेद्र की नई बिल्डिंग का काम भी मेरे ही द्वारा करवाया गया है।


यह भी सच है कि आज भी डिग्री काॅलेज में कई विषय पढ़ाए ही नहीं जा रहे हैं और रायुपर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सुविधाएं पूरी नहीं मिल पा रही है?

डिग्री काॅलेज का नया भवन बन गया है अब सभी विषयों के साथ कई नए विषय भी पढ़ाए जाएंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है अब वह अति आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला है। इसके पूर्ण हो जाने के बाद किसी भी मरीज को देहरादून इलाज करवाने के लिए नहीं आना पड़ेगा।

आपकी विधानसभा के कई क्षेत्र नगर निगम से जोड़ दिए गए हैं लेकिन अभी तक उन क्षेत्रों को निगम जैसी सुविधाएं नहीं मिली हैं?
मेरे क्षेत्र में कुछ ही इलाके नगर निगम में आए हैं। अब इसके लिए नगर निगम को ही काम करना है। आप इस बारे में नगर निगम से ही बात करें। नगर निगम अलग संस्था है वहां मेयर और पार्षद होते हैं उनसे बात कीजिए। मैं तो अपने क्षेत्र में काम कर ही रहा हूं। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्षेत्र निगम का है और कौन निगम से बाहर का। मेरे लिए सभी एक समान हैं। जहां जैसी जरूरत होगी, लोगों की मांग होगी, मैं तो काम करवाऊंगा ही। इसी वित्तीय वर्ष में छह नम्बर वाला क्षेत्र हो या अजबपुर मंडल क्षेत्र हो या तपोवन मंडल का क्षेत्र हो, मंैने 12 वार्डों में 21 करोड़ के काम सेंक्शन करवाए हैं। इन क्षेत्रों में जितने भी नालियों आदि के काम हो रहे हैं वह मेरे ही बजट से हो रहे हैं। काम तो मैं करता हूं निगम तो नाम करता है।

केसरवाला मोटर मार्ग आज तक नहीं बना जबकि चुनाव प्रचार में इसके बड़े दावे किए गए थे। यह सड़क क्यों नहीं बन पाई है?
इनमें  सबसे बड़ी समस्या सेना की शूटिंग रेंज की है। सेना की चांदमारी से ही केसरवाला के लिए रास्ता है। इसमें कुछ लोगों ने राजनीति की है। आरोप लगाया कि सेना ने उनकी जमीन हड़प ली है जिससे सेना नाराज हो गई। मैंने इसके लिए बहुत प्रयास किए, सेना से बातचीत की, सेना मान भी गई लेकिन जान-बूझकर सेना पर आरोप लगा दिया कि सेना ने जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इससे सेना प्रशासन नाराज हो गया। इसके बाद भी मैंने मुख्यमंत्री जी से इस रोड की घोषणा करवा दी। अब यह सड़क मुख्यमंत्री की घोषणा में आ चुकी है और इसके लिए गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही केसरवाला रोड बनेगी।

वर्ष 2016 में मलिन बस्तियों का नियमितीकरण की घोषणा हुई थी लेकिन आज तक इस पर काम नहीं हो पाया है। आप लगातार 3 बार से विधायक हैं फिर भी आपके क्षेत्र की मलिन बस्तियों का नियमितीकरण नहीं हो पा रहा है?
जब यह घोषणा हुई तब मैं कांग्रेस पार्टी छोड़ चुका था। राजपुर के विधायक राजकुमार इस कमेटी के अध्यक्ष थे, उन्होंने काम करवाना था। आप उनसे पूछिए कि क्यों काम नहीं हुआ। वह अपने मकान को क्यों नहीं नियमितकरण में ला पाए। हमारी सरकार ने जीओ करवा कर मलिन बस्तियों को राहत दी है। एलिवेटेड रोड जिस भी व्यक्ति की जमीन, मकान का अधिग्रहण होगा उसके लिए हमारा पहला प्रयास है कि उसका पुनर्वास किया जाए।’

आपके क्षेत्र में खनन का काम तेजी से हो रहा है लेकिन इसमें अवैध खनन के भी आरोप लग रहे हैं। मालदेवता में खनन के डम्पर से एक बच्चे की भी मौत हो गई है। सहस्रधारा के खनन के डम्पर रात को भी खनन के काम में लगे हैं जिससे खतरा पैदा हो रहा है?

पहली बात जिस क्षेत्र में डम्पर से बच्चे की मौत हुई है वह मेरा क्षेत्र नहीं है वह मसूरी विधानसभा का क्षेत्र है। इसके लिए तो आपको गणेश जोशी जी ही बता पाएंगे। दूसरा, अगर अवैध खनन हो रहा है तो क्यों नहीं कार्यवाही की जा रही है? प्रशासन कार्यवाही करे और डम्परों को सीज करे। आरोप लगाना आसान है। मेरे क्षेत्र में जो भी खनन हो रहा है वह सरकारी अनुमति के ही हो रहा है।

आप पर यह भी आरोप लग रहा है कि आप अपने खास लोगों को ही निर्माण कार्यों का ठेका दिलवाते हैं। अगर किसी अन्य को ठेका मिलता है तो उसे काम नहीं करने दिया जाता?

कोई ठेका नहीं होता। सब ऑनलाइन टेंडर होते हैं जो इसके लिए उपयुक्त होता है उसे ही काम मिलता है। इसमें मेरा जरा भी हस्तक्षेप नहीं होता। मेरे क्या किसी भी विधायक के हाथ में होता ही नहीं वो किसी को ठेका दिलवा दे।
आप के क्षेत्र के लोगों का यह भी कहना है कि आपका स्वभाव उग्र हो जाता है। कोई आपसे काम करवाने की बात करे तो आप उग्र हो जाते हैं। प्राथमिक शिक्षा निदेशक के साथ भी मारपीट के आरोप आप पर लग चुके हैं?
लोग नहीं कहते। मेरे बारे में मेरे क्षेत्र के लोग ऐसा कभी नहीं कह सकते। गुस्सा सभी को आता है लेकिन मेरा गुस्सा सिर्फ उन लोगों के लिए है जो जनता के काम करते नहीं और काम में रुकावट डालते हैं। ऐसे लोगों पर गुस्सा करना ही चाहिए। शिक्षा निदेशक के साथ विवाद में मैं नहीं था मुझे जान-बूझकर इसमें घसीटा गया। क्षेत्र के लोग उनसे मिलने का समय मांग रहे थे लेकिन वे समय नहीं दे रहे थे। उनकी मांग सिर्फ इतनी ही थी कि जिस व्यक्ति ने स्कूल के लिए जमीन दी है उनके नाम पर स्कूल का नाम रखा जाए। लोग उनसे न कोई ठेका मांगने गए थे और न ही कोई काम मांगने गए थे। मैं तो एक विधायक के नाते जनता के साथ गया था। आपको इसके बारे में पूरे तथ्य पता नहीं हैं। हम किसी सरकारी अधिकारी के पास जा रहे हैं तो अपने काम के लिए तो नहीं जा रहे हैं, जनता के काम के लिए ही तो जा रहे हैं। जनता ने हमें जिम्मेवारी दी है, अगर हम जनता की जिम्मेवारी नहीं उठा पाए तो क्या फायदा। इसके लिए कभी-कभी उग्र भी होना पड़ता है।

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