तकरीबन 1 लाख 35 हजार मतदाताओं वाली रायपुर विधानसभा अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही राजनीतिक रूप से एक मजबूत सीट रही है। उस समय देहरादून जिले में केवल तीन विधानसभा क्षेत्र, चकराता, देहरा और मसूरी, मौजूद थे। रायपुर का कुछ हिस्सा मसूरी और बड़ा हिस्सा देहरा विधानसभा में शामिल था। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद हुए पहले परिसीमन में मसूरी और देहरा के कई हिस्सों को अलग कर डोईवाला, राजपुर और ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्रों का गठन किया गया, जिसमें रायपुर क्षेत्र डोईवाला विधानसभा में शामिल हो गया। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन में पहली बार रायपुर विधानसभा का गठन हुआ और इसे एक अलग राजनीतिक पहचान मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन से सरकार को राजस्व मिल रहा है लेकिन आम जनता भय के माहौल में जी रही है। कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि खनन गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते।
नेहरूग्राम और डांडा लखौंड जैसे क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक है। शहर से सटे होने के कारण यहां तेजी से निर्माण हो रहा है लेकिन नियोजन के अभाव में समस्याएं बढ़ रही हैं। अवैध प्लाॅटिंग, संकरी सड़कें और नालों पर अतिक्रमण भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकते हैं।
रायुपर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में सड़कों का काम समय पर पूरा नहीं हो रहा है और नालियों का निर्माण भी नहीं हो रहा है जिससे बरसात में क्षेत्र के निवासियों को बड़ी समस्या का समान करना पड़ता है। सरकार के विकास के कामों में इतनी अनियोजिता बरती जा रही है कि सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद बिजली, पानी की लाइनों के लिए सड़कों को खोदा जा रहा है। एक विभाग पहले सड़क खोदता है फिर सड़क को ठीक कर दिया जाता है तो उसके बाद दूसरा विभाग सड़क को खोद देता है। रायपुर क्षेत्र की मलिन बस्तियों का नियमितीकरण भी नहीं हो पाया है जबकि 2016 में कांग्रेस सरकार ने इसके लिए नीति बना दी थी। भाजपा सरकार हो या उसके विधायक उमेश शर्मा काऊ हो सभी जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए हिंदू-मुस्लिम के नाम पर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। आज भी रायपुर विधानसभा में सिर्फ एक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ही है लेकिन कोई अन्य उद्योग इस क्षेत्र में नहीं लग पाए हैं। रोजगार के साधनों का विधायक ने अपने 15 साल के कार्यकाल में पैदा किए हो तो विधायक बताएं। सिर्फ खनन और हिंदू-मुस्लिम के नाम पर ही काऊ का कार्यकाल को देख सकते हंै। विकास के काम पर कोई उपलब्धि नहीं हैं। विधायक निधि तो हर विधायक खर्च करता है। राज्य सेक्टर से काम होते ही हैं यह तो हर विधायक करेगा ही लेकिन विधायक की लाॅजिस्टिक पावर और विजन से ही जनता के काम देखे जाते हैं जो उमेश शर्मा काऊ के 15 सालों के कार्यकाल में देखने में नहीं मिला।
भूपेंद्र सिंह नेगी, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय युवा कांग्रेस
उमेश शर्मा काऊ जनता से जुड़े जन प्रतिनिधि हैं और जनता से उनका जुड़ाव हमेशा से ही रहा है। प्रदेश के हर जनप्रतिनिधि को उमेश शर्मा काऊ से सीख लेनी चाहिए कि जनता के काम कैसे होते हैं और लोकप्रियता क्या होती है? ऐसे ही काऊ लगातार चुनाव नहीं जीत रहे हैं जनता उनके साथ है। जनता तभी किसी नेता या जनप्रतिनिधि के साथ होती है जब वह जनता के साथ जुड़ा हो और उनकी समस्याओं का निराकरण करे। प्रदेश के जो जनप्रतिनिधि यह कहते हैं कि सरकारी सिस्टम और नौकरशाही बेलगाम हो गई है उन सभी को काऊ से यह सीखना चाहिए कि बेगलाम घोड़ों को कैसे लगाम लगाई जाती है। एक अधिकारी जो लम्बे समय से अभद्रता का प्रतीक बन चुका था उसको काऊ ने सबक सिखाया। आप प्रदेश के किसी भी विधायक के क्षेत्र में विकास कार्यों की तुलना करें तो काऊ के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम हुए हैं और लगातार काम हो रहे हैं। उमेश शर्मा काऊ आज सत्ताधारी पार्टी के विधायक हैं लेकिन उनका लम्बा कार्यकाल विपक्ष का ही रहा है। इसलिए यह नहीं कह सकते कि काऊ सत्ताधारी विधायक हैं तो काम करवाने में सफल हो रहे हैं वे पहले भी अपने क्षेत्र में काम करने के लिए जाने जाते रहे हैं।
शिव प्रसाद सेमवाल, अध्यक्ष, राष्ट्रवादी रिजनल पार्टी उत्तराखण्ड
उमेश शर्मा काऊ जी का जो भी कार्यकाल है वह घोटालों और रायुपर विधानसभा की जनता को प्रताड़ित करने का कार्यकाल रहा है। उग्र होना और जनता से बदसलूकी करने का इनका अपना रिकाॅर्ड है। जमीनों के घपले, खरीद-फरोख्त और अवैध खनन इस क्षेत्र में जमकर किया जा रहा है जिनका पूरा संरक्षण विधायक द्वारा किया जाता है यही नहीं अनेक अवैध कामों में हिस्सेदारी उमेश शर्मा काऊ जी की है। यह कोई एक आरोप नहीं लगा रहा हूं बकायदा जितने भी काम किए जाते हैं उनमें काऊ जी के ही अपने लोगों को ठेका दिया जाता है। अगर कोई दूसरा व्यक्ति ठेका लेने का प्रयास करता है तो उसे ठेका नहीं दिया जाता फिर भी कोई ठेका हासिल कर भी लेता है तो विधायक काऊ जी के समर्थक उसे काम नहीं करने देते। पूरी रायपुर विधानसभा में अवैध खनन का काम विधायक के संरक्षण में किया जा रहा है। दो-तीन साल पहले उमेश शर्मा काऊ कहा करते थे कि सौंग नदी का सीमांकन होना चाहिए और नदी में कहीं भी खनन नहीं होना चाहिए। इससे दून घाटी के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है लेकिन वही विधायक जमकर खनन की पैरवी कर रहा है और अपने लोगों को खनन के पट्टे दिलवा रहा है। कहा जा रहा है कि उमेश शर्मा काऊ विकास पुरुष हैं लेकिन सारे विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढे हुए हैं जो सड़कें बन रही है उनकी गुणवत्ता निम्न स्तर की है। अगर कोई व्यक्ति गुणवत्ता को लेकर शिकायत करता है तो विधायक जी के चेले और ठेकेदार उस व्यक्ति को डरा-धमका कर चुप करवा देते हंै। विभागीय अधिकारी भी विधायक के दबाब में चुप्पी साधे हुए हैं। केसरवाला का सम्पर्क मार्ग 15 सालांे से पक्का होने की आस में है लेकिन विधायक जी उसे भी पूरा नहीं करवा पाए हैं जबकि 2022 में अमित शाह जी रायपुर क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए आए थे और उन्होंने चुनावी मंच से ही कहा था कि अगर काऊ चुनाव जीतते हैं तो दो महीने में ही केसरवाला की सड़क पक्की हो जाएगी। चार साल हो गए लेकिन उस सड़क पर विधायक जी कोई बात तक नहीं करते हैं। हर साल 5 करोड़ की विधायक निधी मिलती है उससे तो लीपापोती ही हो रही है। लेकिन काम जो हो रहे हैं वह तो राज्य सेक्टर, जिला योजना से हो रहे हैं उन पर विधायक अपना दखल देकर फंड को हड़पने का काम तो कर ही रहे हैं, साथ ही विधायक काऊ जी उन सभी कामों को अपने काम में जोड़कर जनता को दिग्भ्रमित करने का काम 15 सालों से कर रहे हैं। विधायक जी यह बता दे कि 15 सालों में वे एक ऐसा काम बता दे जो उनकी बड़ी योजना में रहा है। पूरे रायपुर क्षेत्र में सिर्फ केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय का एक संस्थान आॅर्डिनेंस फैक्टरी ही है इस क्षेत्र में कोई भी एक कारखाना तक नहीं खुल पाया है। बेरोजगारों के लिए कोई रोजगार के साधन विकसित तक नहीं किए। रायपुर में जमीनों की कमी नहीं है लेकिन आज तक विधानसभा क्षेत्र में सिडकुल के माध्यम से कोई औद्योगिक क्षेत्र तक नहीं बन पाया है तो यह विधायक के 15 सालों की नाकाम ही तो है। विधायक का कोई विजन ही नहीं है। इन 15 सालों में विधानसभा में अपने क्षेत्र की बात तक विधायक ने नहीं की है। आप रिकॉर्ड उठाकर देख सकते हैं कि विधानसभा सत्र में काऊ जी ने कितनी बात अपने क्षेत्र के मुद्दों को लेकर बात की हो।
सूरत सिंह नेगी, पूर्व ग्राम प्रधान व वरिष्ठ कांग्रेस नेता, रायपुर
- सड़क व सम्पर्क मार्ग अधिकांश क्षेत्रों में सड़कों, सम्पर्क मार्गों व इंटरलाॅकिंग का व्यापक निर्माण, कुछ स्थानों पर गुणवत्ता और ठेकेदारी पर सवाल 7/10
- स्वास्थ्य सेवाएं सीएचसी मौजूद, स्टाफ लगभग पूरा, लेकिन आईसीयू, विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी और नया भवन अधूरा 6/10
- शिक्षा व उच्च शिक्षा स्नातकोत्तर महाविद्यालय मौजूद, पर सीमित विषय, कई विषय व व्यावसायिक कोर्स अब तक शुरू नहीं 5/10
- रोजगार व उद्योग स्थानीय स्तर पर बड़े उद्योगों का अभाव, ठेकेदारी आधारित काम, रोजगार के स्थायी अवसर सीमित 4/10
- पलायन एवं युवा स्थिति शहर के नजदीक होने से पलायन कम लेकिन गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सीमित 6/10
- खेल तथा बुनियादी ढांचा खेल सुविधाओं पर विशेष काम नहीं, बुनियादी ढांचे में असंतुलन 4/10
- प्रशासनिक व्यवस्था शहरी क्षेत्र होने से सुविधाएं उपलब्ध लेकिन आरटीआई व पारदर्शिता पर सवाल 5/10
- ग्रामीण/शहरी समस्याएं नगर निगम में शामिल क्षेत्रों में अनियोजित शहरीकरण, सफाई व मूलभूत सुविधाओं की कमी 5/10
- कानून व्यवस्था और पर्यावरणीय मुद्दे खनन, डम्परों की आवाजाही और दुर्घटनाओं से खतरा, बाढ़ प्रबंधन में कमी 4/10
- जनसम्पर्क एवं राजनीतिक सक्रियता विधायक का मजबूत जनाधार, सक्रियता, लेकिन व्यवहार व दबंग छवि पर विवाद 7/10
आपका विधायक का 14 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इन वर्षों में आपके द्वारा अपने क्षेत्र में बड़ी और दीर्घकालीन योजनाएं कौन सी हैं जो आप अपनी उपलब्धि मानते हैं?
जब आप मेरे क्षेत्र में जाओगे तो आपको हर जगह मेरे कार्यकाल में काम हुआ दिखाई देगा। मैं आपको मुख्य-मुख्य कुछ बड़ी योजनाओं के बारे में बात देता हूं। जब मैं 2012 में पहली बार विधायक बना तो मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी कि पूरे रायपुर क्षेत्र में पेयजल की समस्या का निस्तारण करना। इसके लिए मैंने सबसे पहले काम किया। इन वर्षों में मैं 90 से अधिक ट्यूबवेल और 35 ओवर हैड टैंकों का निर्माण रायपुर विधानसभा के हर क्षेत्र में करवा चुका हूं। इनमें से करीब सभी पूरे हो चुके हैं और सिर्फ तीन-चार पर काम चल रहा है। मेरी विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी समस्या सड़कों और सम्पर्क मार्गों की थी। रायपुर से देहरादून शहर के लिए केवल एक ही मेन रोड थी। मैंने देहरादून आने जाने के लिए गूलर घाटी से छह नम्बर पुलिया तक जो अब मेन रोड बन गई है इसे पहले कार्यकाल में ही बना दिया था। सहस्रधारा से रायपुर, आईटी पार्क से रायपुर, आईटी पार्क से अस्थल होते हुए रायपुर मोटर मार्ग भी मेरे ही कार्यकाल में बना है। कई सम्पर्क मार्गों का निर्माण हुआ। इसके अलावा पांच महत्वपूर्ण पुलों, जिसमें छह नम्बर पुल, डील काली मंदिर का पुल, नरूरखेड़ा पुल, दीप नगर-केदापुरम को जोड़ने के लिए पुरानी पुलिया की जगह बड़े पुल का निर्माण के साथ-साथ कई छोटे पुलों का निर्माण भी करवाया।
मेरे क्षेत्र में तीसरी बड़ी समस्या सीवर लाईन सिस्टम की थी जिसे दुरुस्त करने के लिए मैंने नेहरू काॅलोनी की पुरानी लाईन की मरम्मत और नई लाईन का निर्माण,चकशाह नगर और हरिद्वार रोड के लिए पूर्व की सीवर लाईन से जोड़ने के लिए लाईन, राज्य सेक्टर से नाबार्ड के सहयोग से सरस्वती विहार सी ब्लाॅक और गणेश विहार में सीवर लाईन का काम, देवभूमि इंक्लेव और धर्मपुर के छूटे हुए हिस्सों के लिए सीवर लाईन का निर्माण तथा अधोईवाला सरस्वती विहार के लिए सीवर लाईन का काम मेरे ही कार्यकाल में हुआ और हो रहा है। आम वाला सहस्रधारा के 18 करोड़ की सीवर लाईन योजना के लिए चीफ सैकेट्री जी के प्रस्ताव पर बात हो चुकी है और मंजूरी भी मिल चुकी है। जल्द ही इसका शासनादेश भी आ जाएगा और काम शुरू हो जाएगा। सड़कों, पार्कों का निर्माण और सौंदर्यीकरण भी मेरी विधानसभा में सबसे ज्यादा हुआ है। मियांवाला में दो बड़े पार्क, डिफेंस काॅलानी में गौरा देवी पार्क का निर्माण, सहस्रधारा रोड का सौंदर्यीकरण और कई क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा सौंदर्यीकरण, पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना में कई करोड़ के काम हो चुके हैं और कई कार्य चल रहे हैं। आईटी पार्क से रायपुर वाली नई रोड का सौंदर्यीकरण का काम का टेंडर भी हो चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। सौंग डैम भी पूरा होने वाला है। इसके बनने के बाद रोजगार के साधन बढ़ेंगे तथा पर्यटक हब बनेगा।
समस्या यह है कि मालदेवता में सौंग नदी का क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र में आता है इसलिए वहां खनन की अनुमति आज तक नहीं मिल पाई है। हम प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए हमारी सरकार केंद्र सरकार से बात कर रही है। हमने इसके लिए किसी भी तरह से चैनलाइजेशन करवाने के लिए पत्र भी भेजा है। फाॅरेस्ट से अनुमति लेकर इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाना है। सिर्फ यही एक बड़ा कारण है जिसके कारण मालदेवता में सौंग नदी पर काम नहीं हो पा रहा है। मालदेवता में डिग्री काॅलेज का निर्माण और नया भवन, रायुपर सामुदायिक स्वास्थ्य कंेद्र की नई बिल्डिंग का काम भी मेरे ही द्वारा करवाया गया है।
यह भी सच है कि आज भी डिग्री काॅलेज में कई विषय पढ़ाए ही नहीं जा रहे हैं और रायुपर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सुविधाएं पूरी नहीं मिल पा रही है?
डिग्री काॅलेज का नया भवन बन गया है अब सभी विषयों के साथ कई नए विषय भी पढ़ाए जाएंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है अब वह अति आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला है। इसके पूर्ण हो जाने के बाद किसी भी मरीज को देहरादून इलाज करवाने के लिए नहीं आना पड़ेगा।
मेरे क्षेत्र में कुछ ही इलाके नगर निगम में आए हैं। अब इसके लिए नगर निगम को ही काम करना है। आप इस बारे में नगर निगम से ही बात करें। नगर निगम अलग संस्था है वहां मेयर और पार्षद होते हैं उनसे बात कीजिए। मैं तो अपने क्षेत्र में काम कर ही रहा हूं। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्षेत्र निगम का है और कौन निगम से बाहर का। मेरे लिए सभी एक समान हैं। जहां जैसी जरूरत होगी, लोगों की मांग होगी, मैं तो काम करवाऊंगा ही। इसी वित्तीय वर्ष में छह नम्बर वाला क्षेत्र हो या अजबपुर मंडल क्षेत्र हो या तपोवन मंडल का क्षेत्र हो, मंैने 12 वार्डों में 21 करोड़ के काम सेंक्शन करवाए हैं। इन क्षेत्रों में जितने भी नालियों आदि के काम हो रहे हैं वह मेरे ही बजट से हो रहे हैं। काम तो मैं करता हूं निगम तो नाम करता है।
इनमें सबसे बड़ी समस्या सेना की शूटिंग रेंज की है। सेना की चांदमारी से ही केसरवाला के लिए रास्ता है। इसमें कुछ लोगों ने राजनीति की है। आरोप लगाया कि सेना ने उनकी जमीन हड़प ली है जिससे सेना नाराज हो गई। मैंने इसके लिए बहुत प्रयास किए, सेना से बातचीत की, सेना मान भी गई लेकिन जान-बूझकर सेना पर आरोप लगा दिया कि सेना ने जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इससे सेना प्रशासन नाराज हो गया। इसके बाद भी मैंने मुख्यमंत्री जी से इस रोड की घोषणा करवा दी। अब यह सड़क मुख्यमंत्री की घोषणा में आ चुकी है और इसके लिए गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही केसरवाला रोड बनेगी।
जब यह घोषणा हुई तब मैं कांग्रेस पार्टी छोड़ चुका था। राजपुर के विधायक राजकुमार इस कमेटी के अध्यक्ष थे, उन्होंने काम करवाना था। आप उनसे पूछिए कि क्यों काम नहीं हुआ। वह अपने मकान को क्यों नहीं नियमितकरण में ला पाए। हमारी सरकार ने जीओ करवा कर मलिन बस्तियों को राहत दी है। एलिवेटेड रोड जिस भी व्यक्ति की जमीन, मकान का अधिग्रहण होगा उसके लिए हमारा पहला प्रयास है कि उसका पुनर्वास किया जाए।’