देवभूमि में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। इस यात्रा का प्रथम पड़ाव धार्मिक नगरी हरिद्वार है लेकिन यहां आजकल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। यातायात और सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है
चारधाम यात्रा शुरू होते ही उत्तराखण्ड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा शुरू हो चुका है। हर वर्ष की भांति इस बार भी देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री देवभूमि की ओर रुख कर रहे हैं, जिनका पहला पड़ाव अक्सर हरिद्वार होता है लेकिन इस बार प्रशासन और नगर निगम द्वारा किए गए तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा भी यात्रा से पूर्व व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों की बैठकों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजनाएं बनाई गई थीं। लेकिन इन योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पाया है। नतीजा यह है कि यात्रा के पहले ही चरण में व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
चारधाम यात्रा जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र धाम शामिल हैं, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। यदि उन्हें बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो इसका सीधा असर राज्य की छवि और आय पर पड़ेगा। चारधाम यात्रियों का प्रथम पड़ाव हरिद्वार होने के चलते श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और मूलभूत सुविधा चरमरा जाती है।
हरिद्वार के कनखल को संतों की नगरी, भगवान शिव की ससुराल और पौराणिक महत्त्व के लिए जाना जाता है। यहां स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर देशभर से आने वाले यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था और माता सती ने अपने प्राण त्यागे थे। ऐसे पवित्र स्थल की वर्तमान स्थिति बेहद निराशाजनक है।
चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह आस्था, संस्कृति और परम्परा का प्रतीक है। ऐसे में तीर्थस्थलों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी बनती है। दक्ष नगरी कनखल जैसे पवित्र स्थल की वर्तमान स्थिति न केवल चिंताजनक है बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और भी गम्भीर हो सकती है।
श्रद्धालु, जो आस्था और श्रद्धा के साथ हरिद्वार पहुंचते हैं, उनका स्वागत गंदगी और अव्यवस्था से हो रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है बल्कि शहर की धार्मिक पर्यटन की छवि को भी धूमिल करती है।
नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ रखने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। समय-समय पर सफाई अभियान चलाने की बातें कही जाती हैं लेकिन धरातल पर इनका असर दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं और कूड़ा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है।
यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी स्वच्छता को लेकर हो रही है। कई श्रद्धालुओं ने शिकायत की है कि उन्हें साफ-सुथरे शौचालय नहीं मिल रहे हैं और जहां शौचालय उपलब्ध हैं, वहां भी सफाई का अभाव है। इसके अलावा कूड़े के ढेरों के कारण सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो रहा है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भी विकट हो जाती है क्योंकि दुर्गंध और गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय संतों और महंतों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है।