सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित नाबालिग लड़कियों का खतना किए जाने की प्रथा पर सवाल उठाए हैं। सोमवार को कोर्ट ने कहा कि शादी के अलावा भी महिलाओं का दायित्व है। इस तरह की प्रथा महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है और स्वास्थ्य ने लिए खतरनाक भी हो सकता है। सर्वोच्च अदालत ने आगे कहा कि यह किसी भी व्यक्ति के पहचान का केंद्र बिंदु होता है और यह खतना उसके पहचान के खिलाफ है।