सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह समलैंगिक सेक्स को अपराध मानने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर पुनर्विचार करेगा. इस मामले में फिर से सुनवाई 10 जुलाई से शुरू होगी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को बरकरार रखने वाले अपने पहले के आदेश पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा, “हमारे पहले के आदेश पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है.” अदालत ने यह आदेश 10 अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि आईपीसी की धारा 377 अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.
You may also like
Latest news
अभिनेता से नेता बने कमल हासन पर बुधवार शाम तिरुप्परनकुंदरम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान मदुरै में चप्पलें फेंकी गईं. कमल हासन...
Read More
Latest news
चुनाव आयोग इस बात की जांच करेगा कि उपग्रह भेदी मिसाइल के सफल इस्तेमाल की जानकारी देश को देने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री...
Read More
Latest news
पश्चिम बंगाल में हड़ताली डॉक्टरों ने मुख्यमंत्रीममता बनर्जी की बात नहीं सुनी है. ममता बनर्जी ने कल दोपहर 2 बजे तक काम पर लौटने...
Read More
Latest news
Author दि संडे पोस्ट डेस्क
झारखंड में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘रेप इन इंडिया’ बयान पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग...
Read More