ललित मोहन रयाल के कार्यभार सम्भालते ही नैनीताल जनपद में प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट सुधार दिखाई देने लगा है। जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र, विरासत चढ़ाना और दाखिल-खारिज जैसे वर्षों से लम्बित मामलों पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने ‘नो डिले’ नीति लागू की है जिससे जवाबदेही तय हुई और फाइलों की धूल साफ होने लगी है। तय समय-सीमा, साप्ताहिक समीक्षा और अनावश्यक आपत्तियों पर रोक का असर जमीनी स्तर पर अब दिख रहा है। बिचैलिया तंत्र पर प्रभावी अंकुश लगा डीएम रयाल ने आम जनता का दिल जीत लिया है। खनन सत्र से पहले समुचित तैयारियों, श्रमिकों के लिए मूलभूत सुविधाओं और पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम यह रहा कि इस सत्र में फरवरी तक 46 करोड़ रुपए से अधिक का रिकाॅर्ड राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रशासनिक सख्ती, सतत् निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण से नैनीताल में शासन पर जनता का भरोसा मजबूत होने के पीछे नए जिलाधिकारी की शानदार कार्यशैली को बताया जा रहा है
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा नैनीताल जिले की कमान सम्भालते ही जिले की प्रशासनिक तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विरासत चढ़ाने और दाखिल-खारिज जैसी बुनियादी प्रशासनिक सेवाओं में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं पर अब सख्ती के साथ अंकुश लगता दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा लागू ‘नो डिले’ नीति ने जहां निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर अफसर की जवाबदेही तय कर दी हैं, वही फाइलों पर जमी धूल भी साफ होने लगी है। जिलाधिकारी की नई पहल से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त हुई है बल्कि प्रमाणपत्रों के लिए इधर-उधर भाग रही जनता को भी बड़ी राहत मिली है।
जिलाधिकारी ने पद सम्भालने के तुरंत बाद साफ शब्दों में निर्देश दिए कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के मामलों में अनावश्यक देरी, अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और बिचैलियों की भूमिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी नगर निकायों, ग्राम पंचायतों और सम्बंधित रजिस्ट्रार कार्यालयों को तय समय-सीमा के भीतर आवेदनों का निस्तारण अनिवार्य रूप से करने के भी आदेश दिए गए। ललित मोहन रयाल के जिलाधिकारी बनने के बाद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, विरासत चढ़ना और दाखिल खारिज के आंकड़े बताते हैं कि इन निर्देशों का कैसा और कितना असर हुआ है। उनकी इस पहल की मुख्य सचिव व शासन के उच्च अधिकारी भी सराह रहे हैं।
आखिर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विरासत और दाखिल खारिज प्रक्रियाओं को लेकर जारी सख्ती के आदेशों की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब जिला प्रशासन के आंकड़ों से पता चलता है। बताया जाता है कि 3800 से अधिक मामले विरासत के लंबित पड़े थे। जिनमें 6 माह से अधिक पुराने मामले 1450 और 1 वर्ष से अधिक वाले मामले 620 थे और बिना उल्लेखित कारण के आपत्ति वाले कैसे 40 प्रतिशत और आदेश के बाद भी अवलम्बित 22 प्रतिशत थे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी की हकीकत का विवरण देखें तो औसत इसकी वैधानिक सीमा 7 से 21 दिन है लेकिन इसका जो वास्तविक औसत समय 30 से 45 दिन और जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जो देरी हुई उसमें 55 प्रतिशत आवेदन लम्बित थे। अतिरिक्त दस्तावेज मांगी जाने की शिकायत पर लगभग 1100 मामले प्रतिवर्ष आते हैं। ग्रामीण स्तर पर जानकारी का भाव और कर्मचारियों की कमी के चलते आम नागरिकों को तहसील और नगर निकाय के चक्कर काटने पड़ते थे। यही वजह है कि डीएम ने जवाबदेही तय करने और साप्ताहिक समीक्षा को आदेश का हिस्सा बनाया।
आंकड़े बताते हैं कि नैनीताल में समस्या व्यक्तिगत नहीं वरन सिस्टम जनित थी इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी रयाल ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि
विरासत मामलों में अनावश्यक आपत्तियां न लगाई जाएं, वैध दस्तावेज उपलब्ध होने पर निर्धारित समय में आदेश पारित किए जाएं, सभी लम्बित मामलों की साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि लापरवाही, जान-बूझकर देरी या मनमानी पाए जाने पर सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
गौरतलब है कि 14 अक्टूबर 2025 को नैनीताल के जिलाधिकारी का पद सम्भालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बता दी थी, जिनमें अंतिम पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ पहुंचाना मुख्य रूप से शामिल था। कार्यभार सम्भालने के तीन दिन बाद ही उन्होंने 17 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत, नगर निगम और नगर पालिका तथा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु को स्पष्ट लिखा कि इनमें अनावश्यक आपत्ति न लगाई जाए और अनावश्यक विलम्ब न किया जाए। साथ ही उन्होंने व्यवस्था की कि ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायत अधिकारी अपने क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत में घर-घर से जन्म मृत्यु की सूचना एकत्रित करेंगे और सम्बंधित परिवार से सम्पर्क करते हुए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की कार्रवाई करेंगे। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी उनको आवंटित ग्राम पंचायत में उपस्थित रहते हुए यह कार्य करेंगे। इसी प्रकार के निर्देश शहरी क्षेत्र में भी जन्म-मृत्यु के रजिस्ट्रार को जारी किए गए। इससे आम जनता को काफी राहत मिली है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 14 अक्टूबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 1628 जन्म प्रमाण पत्रों के आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें हल्द्वानी विकासखंड में 203, कोटाबाग में 310, ओखलकांडा में 191, भीमताल में 65, रामगढ़ में 79, रामनगर में 308, बेतालघाट में 245 और धारी ब्लाॅक में 227 कुल मिलाकर 1628 आवेदन प्राप्त हुए इनमें से सभी आवेदनों का निस्तारण 31 जनवरी 2026 तक कर दिया गया। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्रों की बात करें तो इसके लिए 1113 प्राप्त हुए आवेदनों में शतप्रतिशत काम हुआ। इनमें हल्द्वानी ब्लाॅक में 226, कोटाबाग में 278, ओखलकांडा में 89, भीमताल में 101, रामगढ़ में 65, रामनगर में 176, बेतालघाट में 113 और धारी में 65 कुल मिलाकर 1113 मामले मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आए और 31 जनवरी तक 1113 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसी प्रकार जिन विरासतों के चढ़ने पर कोई विवाद नहीं था और यह लम्बे समय से लम्बित थे तो उसमें 7070 मामलों को निस्तारित किया गया जिसमें सबसे ज्यादा नैनीताल तहसील में 2227, हल्द्वानी में 726, रामनगर में 1280, कालाढूंगी में 767, धारी में 695, कैंची धाम में 405, लालकुआं में 355 बेतालघाट में 298 धारी में 325 इस प्रकार कुल 7070 विरासत के मामले आए। इसमें खास बात यह थी कि इनको चौपाल लगाकर किया गया। इसी प्रकार राजस्व प्रकृति के जो विवाद थे और जो न्यायालय के अधीन नहीं थे उनमें से 1640 प्रकरणों में से 1473 को निपटाया गया जिनमें मार्ग पर अवैध कब्जा सिंचाई गोल पर अतिक्रमण मार्ग निर्माण में बाधा नाम संशोधन जैसे मामले शामिल थे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिले के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अब पहले की तुलना में कम समय में और बिना अनावश्यक अड़चनों के बन रहे हैं। वहीं, दाखिल-खारिज मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा तय होने से लोगों को राहत मिली है।
ग्रामीण इलाकों में पंचायत स्तर पर कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिससे आम लोगों को तहसील मुख्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। इस पूरी पहल का एक प्रमुख उद्देश्य इन प्रक्रियाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और बिचैलिया तंत्र पर प्रभावी रोक लगाना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर अवैध वसूली या जान-बूझकर देरी की शिकायत सामने आती है तो सम्बंधित कर्मी या अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जन्म प्रमाणपत्र, विरासत और दाखिल-खारिज जैसी सेवाएं आम नागरिक के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं। नैनीताल जिलाधिकारी की यह सख्त पहल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। यदि यह व्यवस्था इसी तरह लागू रहती है तो जिले में राजस्व और नगर निकाय सेवाओं पर जनता का भरोसा और अधिक मजबूत होना तय है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की इस अभिनव पहल का शासन स्तर पर सराहना हुई है।
जिले में खनन की बात करें तो चुगान की तिथि नजदीक आने तक पूर्व के वर्षों में खनन की तैयारी पूरी नहीं रहती थीं लेकिन जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सुनिश्चित किया कि खनन शुरू होने से पूर्व सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएं। सारे निकासी गेटों पर कांटे, चुगान कार्यों में लगे श्रमिकों का विशेष ख्याल रखा गया। खनन कार्य के चुगान में लगे श्रमिकों को उनके सुरक्षात्मक उपकरण, कम्बल, बायोटोयलेट्स और पानी के छिड़काव का कार्य समय से शुरू करवा दिया गया। जिलाधिकारी रयाल बताते हैं कि इस खनन सत्र में कई सकारात्मक परिणाम आए हैं। उपखनिज की निकासी की मात्रा के साथ राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। गौला क्षेत्र में अक्टूबर से 6 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो 2022-23 में गौला क्षेत्र से एक करोड़ 68 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था, 23-24 में 15 करोड़ 78 लाख, 2024-25 में 6 करोड़ 36 लाख और अब इस वर्ष 6 फरवरी 2026 राजस्व बढ़कर 46 करोड़ 80 लाख तक पहुंच गया है। नंधौर में 2023-24 में 2 लाख 76 हजार और 2025-26 में 6 फरवरी तक 4 करोड़ 17 लाख का राजस्व और इसी प्रकार कोसी नदी में 2022-23 में 4 करोड़ 40 लाख 23-24 में एक करोड़ 68 लाख 24 25 में 2 करोड़ 10 लाख और 25-26 में फरवरी 6 फरवरी 26 तक 8 करोड़ 10 लाख का राजस्व प्राप्त हो चुका।
कुल मिलाकर नैनीताल का जिलाधिकारी बनकर आने के बाद ललित मोहन रयाल की नजर हर विभाग पर है, चाहे वो आबकारी विभाग हो, परिवहन विभाग हो या फिर विकास से जुड़ी सारी एजेंसियां। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की लगाम कसी है, फील्ड पर उतरने को प्रेरित किया है, जिससे दुरुस्त होती प्रशासनिक व्यवस्था साफ नजर आती दिख रही है।
राजस्व मामले हों, भूमि विवाद के मसले हों या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विरासत चढ़ाना या फिर दाखिल खारिज हो, उनकी सतत निगरानी, सतत समीक्षा और जितने राजस्व न्यायालय हैं, उनमें अधिकारी नियत समय पर बैठें, साप्ताहिक जितने दिन भी बैठेते हों, बैठें। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। अगर निरंतर सतत् रूप से आप अपना काम दे रहे हैं तो प्रतिफल अच्छा रहता है और इसके आशाजनक परिणाम आते हैं। सबसे बड़ी बात है वादियों को राहत मिलती है। खनन के मामले में भी हमने नियत समय पर गेटों का खुलना उपखनिज निकालने से पहले जो प्राॅपर तैयारी होनी है, गेटों पर इलेक्ट्राॅनिक कांटे लगाना। हमें मानवीय मूल्यों की ओर भी ध्यान देना है इस लिए चुगान में लगे मजदूरों के लिए जो मूलभूत सुविधाएं हैं, जैसे बायोटाॅयलेट का निर्माण, उनको कम्बल वितरण करना, ग्लव्स वितरण करना, वो सब इस सत्र की शुरुआत से पहले हमने कर दिया था। जिसका परिणाम आज सामने है कि इस बार पिछले चार खनन सत्रों में फरवरी तक का सबसे ज्यादा राजस्व 46 करोड़ से ज्यादा हमें प्राप्त हुआ है।
आखिर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विरासत और दाखिल खारिज प्रक्रियाओं को लेकर जारी सख्ती के आदेशों की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब जिला प्रशासन के आंकड़ों से पता चलता है। बताया जाता है कि 3800 से अधिक मामले विरासत के लंबित पड़े थे। जिनमें 6 माह से अधिक पुराने मामले 1450 और 1 वर्ष से अधिक वाले मामले 620 थे और बिना उल्लेखित कारण के आपत्ति वाले कैसे 40 प्रतिशत और आदेश के बाद भी अवलम्बित 22 प्रतिशत थे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी की हकीकत का विवरण देखें तो औसत इसकी वैधानिक सीमा 7 से 21 दिन है लेकिन इसका जो वास्तविक औसत समय 30 से 45 दिन और जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जो देरी हुई उसमें 55 प्रतिशत आवेदन लम्बित थे। अतिरिक्त दस्तावेज मांगी जाने की शिकायत पर लगभग 1100 मामले प्रतिवर्ष आते हैं। ग्रामीण स्तर पर जानकारी का भाव और कर्मचारियों की कमी के चलते आम नागरिकों को तहसील और नगर निकाय के चक्कर काटने पड़ते थे। यही वजह है कि डीएम ने जवाबदेही तय करने और साप्ताहिक समीक्षा को आदेश का हिस्सा बनाया।
आंकड़े बताते हैं कि नैनीताल में समस्या व्यक्तिगत नहीं वरन सिस्टम जनित थी इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी रयाल ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि
विरासत मामलों में अनावश्यक आपत्तियां न लगाई जाएं, वैध दस्तावेज उपलब्ध होने पर निर्धारित समय में आदेश पारित किए जाएं, सभी लम्बित मामलों की साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि लापरवाही, जान-बूझकर देरी या मनमानी पाए जाने पर सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
गौरतलब है कि 14 अक्टूबर 2025 को नैनीताल के जिलाधिकारी का पद सम्भालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बता दी थी, जिनमें अंतिम पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ पहुंचाना मुख्य रूप से शामिल था। कार्यभार सम्भालने के तीन दिन बाद ही उन्होंने 17 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत, नगर निगम और नगर पालिका तथा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु को स्पष्ट लिखा कि इनमें अनावश्यक आपत्ति न लगाई जाए और अनावश्यक विलम्ब न किया जाए। साथ ही उन्होंने व्यवस्था की कि ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायत अधिकारी अपने क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत में घर-घर से जन्म मृत्यु की सूचना एकत्रित करेंगे और सम्बंधित परिवार से सम्पर्क करते हुए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की कार्रवाई करेंगे। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी उनको आवंटित ग्राम पंचायत में उपस्थित रहते हुए यह कार्य करेंगे। इसी प्रकार के निर्देश शहरी क्षेत्र में भी जन्म-मृत्यु के रजिस्ट्रार को जारी किए गए। इससे आम जनता को काफी राहत मिली है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 14 अक्टूबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 1628 जन्म प्रमाण पत्रों के आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें हल्द्वानी विकासखंड में 203, कोटाबाग में 310, ओखलकांडा में 191, भीमताल में 65, रामगढ़ में 79, रामनगर में 308, बेतालघाट में 245 और धारी ब्लाॅक में 227 कुल मिलाकर 1628 आवेदन प्राप्त हुए इनमें से सभी आवेदनों का निस्तारण 31 जनवरी 2026 तक कर दिया गया। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्रों की बात करें तो इसके लिए 1113 प्राप्त हुए आवेदनों में शतप्रतिशत काम हुआ। इनमें हल्द्वानी ब्लाॅक में 226, कोटाबाग में 278, ओखलकांडा में 89, भीमताल में 101, रामगढ़ में 65, रामनगर में 176, बेतालघाट में 113 और धारी में 65 कुल मिलाकर 1113 मामले मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आए और 31 जनवरी तक 1113 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसी प्रकार जिन विरासतों के चढ़ने पर कोई विवाद नहीं था और यह लम्बे समय से लम्बित थे तो उसमें 7070 मामलों को निस्तारित किया गया जिसमें सबसे ज्यादा नैनीताल तहसील में 2227, हल्द्वानी में 726, रामनगर में 1280, कालाढूंगी में 767, धारी में 695, कैंची धाम में 405, लालकुआं में 355 बेतालघाट में 298 धारी में 325 इस प्रकार कुल 7070 विरासत के मामले आए। इसमें खास बात यह थी कि इनको चौपाल लगाकर किया गया। इसी प्रकार राजस्व प्रकृति के जो विवाद थे और जो न्यायालय के अधीन नहीं थे उनमें से 1640 प्रकरणों में से 1473 को निपटाया गया जिनमें मार्ग पर अवैध कब्जा सिंचाई गोल पर अतिक्रमण मार्ग निर्माण में बाधा नाम संशोधन जैसे मामले शामिल थे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिले के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अब पहले की तुलना में कम समय में और बिना अनावश्यक अड़चनों के बन रहे हैं। वहीं, दाखिल-खारिज मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा तय होने से लोगों को राहत मिली है।
ग्रामीण इलाकों में पंचायत स्तर पर कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिससे आम लोगों को तहसील मुख्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। इस पूरी पहल का एक प्रमुख उद्देश्य इन प्रक्रियाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और बिचैलिया तंत्र पर प्रभावी रोक लगाना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर अवैध वसूली या जान-बूझकर देरी की शिकायत सामने आती है तो सम्बंधित कर्मी या अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जन्म प्रमाणपत्र, विरासत और दाखिल-खारिज जैसी सेवाएं आम नागरिक के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं। नैनीताल जिलाधिकारी की यह सख्त पहल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। यदि यह व्यवस्था इसी तरह लागू रहती है तो जिले में राजस्व और नगर निकाय सेवाओं पर जनता का भरोसा और अधिक मजबूत होना तय है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की इस अभिनव पहल का शासन स्तर पर सराहना हुई है।
जिले में खनन की बात करें तो चुगान की तिथि नजदीक आने तक पूर्व के वर्षों में खनन की तैयारी पूरी नहीं रहती थीं लेकिन जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सुनिश्चित किया कि खनन शुरू होने से पूर्व सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएं। सारे निकासी गेटों पर कांटे, चुगान कार्यों में लगे श्रमिकों का विशेष ख्याल रखा गया। खनन कार्य के चुगान में लगे श्रमिकों को उनके सुरक्षात्मक उपकरण, कम्बल, बायोटोयलेट्स और पानी के छिड़काव का कार्य समय से शुरू करवा दिया गया। जिलाधिकारी रयाल बताते हैं कि इस खनन सत्र में कई सकारात्मक परिणाम आए हैं। उपखनिज की निकासी की मात्रा के साथ राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। गौला क्षेत्र में अक्टूबर से 6 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो 2022-23 में गौला क्षेत्र से एक करोड़ 68 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था, 23-24 में 15 करोड़ 78 लाख, 2024-25 में 6 करोड़ 36 लाख और अब इस वर्ष 6 फरवरी 2026 राजस्व बढ़कर 46 करोड़ 80 लाख तक पहुंच गया है। नंधौर में 2023-24 में 2 लाख 76 हजार और 2025-26 में 6 फरवरी तक 4 करोड़ 17 लाख का राजस्व और इसी प्रकार कोसी नदी में 2022-23 में 4 करोड़ 40 लाख 23-24 में एक करोड़ 68 लाख 24 25 में 2 करोड़ 10 लाख और 25-26 में फरवरी 6 फरवरी 26 तक 8 करोड़ 10 लाख का राजस्व प्राप्त हो चुका।
कुल मिलाकर नैनीताल का जिलाधिकारी बनकर आने के बाद ललित मोहन रयाल की नजर हर विभाग पर है, चाहे वो आबकारी विभाग हो, परिवहन विभाग हो या फिर विकास से जुड़ी सारी एजेंसियां। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की लगाम कसी है, फील्ड पर उतरने को प्रेरित किया है, जिससे दुरुस्त होती प्रशासनिक व्यवस्था साफ नजर आती दिख रही है।
बात अपनी-अपनी
राजस्व मामले हों, भूमि विवाद के मसले हों या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विरासत चढ़ाना या फिर दाखिल खारिज हो, उनकी सतत निगरानी, सतत समीक्षा और जितने राजस्व न्यायालय हैं, उनमें अधिकारी नियत समय पर बैठें, साप्ताहिक जितने दिन भी बैठेते हों, बैठें। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। अगर निरंतर सतत् रूप से आप अपना काम दे रहे हैं तो प्रतिफल अच्छा रहता है और इसके आशाजनक परिणाम आते हैं। सबसे बड़ी बात है वादियों को राहत मिलती है। खनन के मामले में भी हमने नियत समय पर गेटों का खुलना उपखनिज निकालने से पहले जो प्राॅपर तैयारी होनी है, गेटों पर इलेक्ट्राॅनिक कांटे लगाना। हमें मानवीय मूल्यों की ओर भी ध्यान देना है इस लिए चुगान में लगे मजदूरों के लिए जो मूलभूत सुविधाएं हैं, जैसे बायोटाॅयलेट का निर्माण, उनको कम्बल वितरण करना, ग्लव्स वितरण करना, वो सब इस सत्र की शुरुआत से पहले हमने कर दिया था। जिसका परिणाम आज सामने है कि इस बार पिछले चार खनन सत्रों में फरवरी तक का सबसे ज्यादा राजस्व 46 करोड़ से ज्यादा हमें प्राप्त हुआ है।