Uttarakhand

हरीश रावत , स्टिंग मामले में सुनवाई आज

देश में इस समय सीबीआई और ईडी सक्रिय दिखाई दे रही है।महीने भर पहले    कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम  और कर्नाटक के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीबीआई और ईडी ने गिरफ्तार किया हुआ है।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में हाईकोर्ट में आज  होने वाली सुनवाई में रावत की ओर से पैरवी करने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताए पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल नैनीताल पहुंचे हैं।

स्टिंग में रावत पर सरकार बचाने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई होनी है। पूर्व में सुनवाई में न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे ने इस मामले को सुनने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मुख्य न्यायधीश ने इस प्रकरण को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ को स्थानांतरित कर दिया था।

चार सितंबर को  उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत पर विधायकों की खरीद.फरोख्त के मामले में सीबीआई एफआईआर दर्ज कराई । सीबीआई ने मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट  के न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष यह जानकारी दी थी । उसके बाद  20 सितंबर को सुनवाई हुई ।मामले के अनुसार 2016 में एक निजी चैनल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग दिखाया था। इस स्टिंग में हरीश रावत सरकार बचाने के लिए विधायकों से सौदेबाजी करते नजर आ रहे थे। इस दौरान कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा में शामिल हो गए और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था। राष्ट्रपति शासन लगाने का मामला पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचाए फलस्वरूप रावत सरकार बहाल हो गई थी।

सरकार बहाली से पहले ही राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल की संस्तुति पर केंद्र ने इस स्टिंग मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश जारी कर दिए थे। रावत सरकार पुनरू बहाल हुई तो कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल की ओर से की गई सीबीआई जांच की संस्तुति को वापस लेने और  मामले की जांच एसआईटी से कराने का निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार से इसे मंजूरी न मिलने पर रावत के खिलाफ सीबीआई की ओर से पीआई ;प्रारंभिक जांचद्ध की जाती  रही।हरीश रावत ने सीबीआई जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई जारी है। भाजपा में शामिल हो चुके पूर्व कांग्रेसी नेता हरक सिंह रावत ने भी इस मामले में एक याचिका दायर की थी। हरीश रावत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कहा था कि सीबीआई जांच रद्द करने संबंधी राज्य कैबिनेट की बैठक विधि मान्य नहीं थी। मामले में 21 अगस्त को हुई सुनवाई में सीबीआई ने स्टिंग मामले की प्रारंभिक जांच पूरी कर लिए जाने की जानकारी अदालत को दी थी और शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था।

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