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खतरे में भारत का ओलम्पिक टिकट?

भारतीय टीम के लिए लाॅस एंजिल्स ओलम्पिक 2028 का रास्ता अभी खुला है लेकिन लगातार हार ने उसकी चुनौती बढ़ा दी है। 31 दिसम्बर 2026 की आईसीसी टी-20 रैंकिंग में एशिया की नम्बर-1 टीम बने रहना सीधे क्वालिफिकेशन के लिए बेहद अहम होगा। ऐसे में आने वाले हर टी-20 मुकाबले का असर सिर्फ रैंकिंग पर नहीं बल्कि भारत के ओलम्पिक सपने पर भी पड़ेगा

करीब चार वर्षों तक आईसीसी टी-20 रैंकिंग में नम्बर-1 का ताज अपने नाम रखने वाली भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम अब मुश्किल दौर से गुजर रही है। 2022 से दुनिया की शीर्ष टी-20 टीम रही भारत ने हाल के महीनों में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने उसकी बादशाहत छीन ली है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहले आयरलैंड और फिर इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज गंवाने के बाद भारत न सिर्फ शीर्ष रैंकिंग से नीचे खिसक गया बल्कि लाॅस एंजिल्स ओलम्पिक 2028 के लिए सीधे क्वालिफिकेशन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़े सवाल ये कि क्या लगातार हार भारत को ओलम्पिक से बाहर कर सकती है? क्या है क्वालिफिकेशन का नियम? क्या भारत के पास अभी मौका है जैसे तमाम सवाल इन दिनों क्रिकेट जगत और मीडिया में पूछे जा रहे हैं।

खेल विश्लेषकों और पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का कहना है कि ओलम्पिक से भारत की टीम अभी पूरी तरह बाहर तो नहीं हुई है लेकिन खतरा जरूर बढ़ गया है। अब टीम को सीधे ओलम्पिक में जगह बनाने के लिए 31 दिसम्बर 2026 तक एशिया की नम्बर-1 टी-20 टीम बने रहना होगा। यदि भारत की रैंकिंग लगातार गिरती रही और कोई दूसरी एशियाई टीम उससे आगे निकल गई तो सीधे क्वालिफिकेशन का रास्ता बंद हो सकता है फिलहाल पाकिस्तान एशियाई टीमों में भारत के बाद है और रेटिंग अंकों के मामले में अभी काफी पीछे है लेकिन लगातार हार का सिलसिला जारी रहा तो यह अंतर तेजी से कम हो सकता है। ऐसे में भारत को  ओलम्पिक टिकट के लिए अतिरिक्त क्वालिफायर खेलना पड़ सकता है। चिंता सिर्फ हार की नहीं बल्कि हार के तरीके की है। आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम से सीरीज गंवाना और उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ भी उम्मीदों पर खरा न उतरना बताता है कि भारतीय टीम अभी सही संतुलन नहीं बना सकी है।
श्रेयस अय्यर की कप्तानी में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में कमियां साफ दिखाई दीं। मध्यक्रम दबाव में बिखरता रहा, डेथ ओवरों में गेंदबाजी कमजोर रही और फील्डिंग में भी कई आसान मौके गंवाए गए। इन कमजोरियों का असर सीधे आईसीसी रैंकिंग पर पड़ा। अय्यर को भविष्य का कप्तान माना जा रहा है लेकिन शुरुआती विदेशी दौरों में उनके कई फैसलों पर सवाल उठे हैं। हालांकि केवल कप्तान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। जैसे ओलम्पिक को ध्यान में रखते हुए दुनिया की बड़ी टीमें अपनी टी-20 रणनीति मजबूत कर रही हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके दिए हैं जबकि वेस्टइंडीज फिर से टी-20 विशेषज्ञ खिलाड़ियों पर भरोसा जता रहा है। अमेरिका भी घरेलू लीग और विदेशी मूल के खिलाड़ियों के दम पर अपनी टीम मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए सिर्फ नाम के दम पर जगह बनाना आसान नहीं होगा। टीम प्रबंधन, चयनकर्ता और खिलाड़ियों को अपनी भूमिका निभानी होगी। भारत को जल्द स्थायी टी-20 संयोजन तैयार करना होगा ताकि बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम स्थिरता हासिल कर सके।

राहत की बात यह है कि भारत के पास रैंकिंग सुधारने के लिए पर्याप्त समय और मुकाबले दोनों हैं। इंग्लैंड दौरे के बाद टीम को जुलाई के अंत में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज, अक्टूबर में घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज, अक्टूबर- नवम्बर में न्यूजीलैंड दौरे पर पांच टी-20 मुकाबले और साल के अंत में श्रीलंका के खिलाफ महत्वपूर्ण घरेलू टी-20 सीरीज खेलनी हैं। इन सभी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन भारत को दोबारा मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है। इसके लिए भारतीय टीम को अगले डेढ़ वर्ष में कुछ अहम सुधार करने होंगे। स्थायी कप्तानी, संतुलित प्लेइंग इलेवन, डेथ ओवरों की बेहतर गेंदबाजी, मजबूत फिनिशर और विश्वस्तरीय फील्डिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि टीम लगातार जीत दर्ज करती है तो एशिया की नम्बर -1 टीम बने रहना मुश्किल नहीं होगा।

ओलम्पिक में 128 साल बाद हो रही क्रिकेट की वापसी
वर्ष 1900 के पेरिस ओलम्पिक के बाद पहली बार लाॅस एंजिल्स 2028 ओलम्पिक खेलों का क्रिकेट हिस्सा बनेगा। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में केवल छह-छह टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले टी-20 प्रारूप में खेले जाएंगे। सीमित टीमों के कारण क्वालिफिकेशन बेहद कठिन होगा और हर रैंकिंग अंक की अहमियत बढ़ जाएगी।

क्या है क्वालिफिकेशन का नियम?
आईसीसी द्वारा घोषित प्रारूप के अनुसार पुरुष और महिला वर्ग में छह छह टीमें खेलेंगी। अफ्रीका, एशिया, यूरोप और ओशिनिया से एक-एक टीम को प्रतिनिधित्व मिलेगा। यदि मेजबान अमेरिका 31 दिसम्बर 2026 तक आईसीसी टी-20 रैंकिंग में शीर्ष-15 में रहता है तो उसे स्वतः प्रवेश मिलेगा। बचा हुआ एक स्थान वैश्विक ओलम्पिक क्वालिफायर के जरिए तय होगा। महिला वर्ग में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और ग्रेट ब्रिटेन पहले ही टी-20 विश्व कप के आधार पर क्वालीफाई कर चुके हैं। अब निगाहें भारतीय पुरुष टीम पर हैं।

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