पिछले कुछ समय से कयास लगाए जा रहे थे कि आगामी आम चुनाव से पहले भाजपा पंजाब में खुद को मजबूत करने के लिए शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ गठजोड़ कर सकती है। यहां तक कहा जा रहा था कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल का श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में बेअदबी मामलों में ‘पंथ’ से माफी मांगने से पंजाब के राजनीति समीकरण बदलने वाले हैं। लेकिन अब पंजाब किसान यूनियनों की ओर से ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन से भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। फिलहाल प्रदर्शनकारी किसानों और बीजेपी शासित केंद्र सरकार के बीच बातचीत चल रही है। भाजपा और शिअद दोनों ही इस पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिअद की एक बार फिर से एनडीए में वापसी होगी या नहीं, यह काफी हद तक इस बातचीत पर निर्भर करेगा। सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व वाला शिरोमणि अकाली दल (बादल) में विलय का ऐलान कर सकता है। अगर इन दोनों दलों का विलय हुआ तो फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन होने की पूरी संभावना बन जाएगी। सुखदेव सिंह ढींडसा का इस समय भाजपा के साथ गठबंधन है। विलय होने के बाद वही शिअद और भाजपा के गठबंधन के सूत्रधार बनेंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD