उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधायकों को सहयोग न करने की शैली को लेकर विधायकों में आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के विधायक अपनी ही सरकार की घेराबंदी करने पर लगे हुए हैं। अभी पिछले 3 दिन से डीडीहाट के पांच बार के विधायक बिशन सिंह चुफाल के नेतृत्व में दर्जनों विधायक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ एकजुट हो गए हैं ।

यहां तक की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक से चुफाल ने मुलाकात कर सरकार का सारा चिट्ठा खोल दिया है । यहां तक की चुफाल ने यह भी कह दिया है कि 2022 में उन्हें त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव नहीं लडना है। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का नेतृत्व भाजपा विधायकों को नही भा रहा है। चुफाल के साथ ही करीब दो दर्जन ऐसे विधायक हैं जो इस समय मुख्यमंत्री के खिलाफ आक्रोश प्रकट कर रहे हैं। इससे प्रदेश में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल जारी है ।

इसी दौरान रायपुर के भाजपा विधायक उमेश शर्मा उर्फ काऊँ ने भी अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखते हुए अपनी आपबीती बताई है। काऊँ ने कहा है कि सरकार में रहकर वह अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए कोई विकास कार्य नहीं करा पाए है। इसके लिए उन्होंने विकास न करने का ठीकरा नौकरशाही पर फोडा है और कहा है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है । जिसके चलते अधिकारी विकास कार्यों की तरफ से लगातार लापरवाही बरत रहे हैं । इसके चलते उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सामने जाने तक में परेशानी होने लगी है ।
फिलहाल काऊँ के इस पत्र में मुख्यमंत्री खेमे में बेचैनी पैदा कर दी है । हो सकता है काऊँ की तरह भी कई विधायक सामने आए, जो किसी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्यादातर विधायक 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले हटाने के इच्छुक हैं। वह चाहते हैं कि अगर त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री की सीट से हट जाए और कोई नया मुख्यमंत्री बन जाए तो 2022 में उनकी वापसी संभव है । नहीं तो सरकार के लिए वापसी करना कड़ी चुनौती होगा।