गोदी मीडिया लाख दावा करे भाजपा की हालत इन चुनावों में खासी टाइट है। उत्तर प्रदेश में तो सबसे ज्यादा बुरा हाल है जहां टिकट काटे जाने से नाराज निवर्तमान सांसद खुलकर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में आ चुके हैं। अन्य राज्यों में भी पार्टी अपनी पुरानी परफॉरमेंस दोहरा पाने में असमर्थ नजर आने लगी है। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का थिंकटैंक लगातार नए नारे गढ़ने में दिन-रात लगा हुआ है। चुनाव के पहले चरण में नारों का फोकस मोदी रहे। पहला नारा बनाया गया- ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ फिर लगा कि कुछ मामला जम नहीं रहा तो नया नारा उछाला गया। ‘मोदी है तो मुमकिन है।’ राहुल गांधी का ‘चौकीदार चोर है’ ने जोर पकड़ा तो उसकी काट के लिए ‘चौकीदार मोदी’ ईजाद किया गया। चुनाव के तीसरे चरण तक पहुंचते-पहुंचते भाजपा नेतृत्व की घबराहट बढ़ने लगी है। अब प्रचार का फोकस मोदी से हटा कर राष्ट्रवाद की तरफ किया जा रहा है। लेटस्ट नारा है ‘काम रुके नहीं, देश झुके नहीं।’ संकट लेकिन यह कि वोटर इस नारे की बावत पार्टी प्रत्याशियों से पूछ रहा है कि काम हुआ क्या जो रुकेगा? अब इसका जवाब तो शायद मोदी-शाह भी ना दे सकें तो बेचारे प्रत्याशी हाथ जोड़ आगे बढ़ने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।

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