राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संसद में हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर परिवारवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उनहोंने कहा कि कांग्रेस में परिवार से बाहर किसी को कुछ नहीं मिलता। उन्होंने प्रणब मुखर्जी को दिए गए भारतरत्न के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि हम ये नहीं देखते कि वह किस पार्टी से थे। कुछ लोगों को लगता है कि देश का विकास केवल चुनिंदा लोगों द्वारा किया गया है। इसलिए वह सिर्फ उन्हीं नामों को सुनना पसंद करते हैं बाकियों का जिक्र भी उन्हें पसंद नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि परंतु हमारी सोच ऐसी नहीं है हम मानते हैं कि देश के विकास में सभी नागरिकों का परस्पर योगदान है।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चैधरी के भाषण का जिक्र भी प्रधानमंत्री द्वारा करते हुए कहा गया कि सदन में कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस की ऊंचाई से किसी की तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन हम ऐसी गलती नहीं करते। हम किसी की लकीर को छोटा करने में नहीं, अपनी लकीर को बढ़ाने में विश्वास रखते हैं।
कांग्रेस पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतनी ऊपर चली गई है कि उन्हें जमीन दिखनी बंद हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा सदन में सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई गई और कांग्रेस पर तीखा प्रहार भी किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हाथ आए सभी मौकों को गंवाया। उन्होंने लैंगिक समानता, शाहबानो जैसे उदाहरण से यह स्पष्ट किया।
मोदी जी द्वारा आपातकाल को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा गया कि कई लोगों को तो जानकारी भी नहीं है कि 25 जून 1975 को क्या हुआ था? अगल-बगल पूछना पउ़ता है। ऐसे में याद दिलाना जरूरी है कि 25 जून 1975 की रात को देश की आत्मा को कुचल दिया गया था। केवल सत्ता खो जाने के डर से पूरे देश को जेल खाना बना दिया गया था। लोकसभा सदन में कांग्रेस नेता अधीर रंजन द्वारा सवाल उठाया गया था कि 2जी मामले में यदि भ्रष्टाचार हुआ था तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जेल में क्यों नहीं डाला गया? इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा कि यह एमरजेंसी नहीं जो किसी को भी जेल में डापल दिया जाए। यह लोकतंत्र है। यह काम न्यायपालिका का है और हम कानून से चलने वाले लोग है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं है कि पहले की सरकारों ने देशहित में कार्य नहीं किया। लेकिन अगर संसद में बाबा अंबेडकर का भी जिक्र होता तो अचछा लगता। उनहोंने तीन तलाक विधेयक का उल्लेख भी करते हुए कहा कि हम एक बार फिर विधेयक लाए है, और इसे किसी संप्रदाय मात्र से जोड़कर न देखा जाए।

