राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों के मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रखने वाली प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी उत्तराखण्ड में कांग्रेस के महिला चेहरे के तौर पर जानी जाती हैं। मौजूदा भाजपा सरकार की नीतियों और नियत पर कांग्रेस की रुख और पार्टी का पक्ष रखने में गरिमा अव्वल रही हैं। चाहे सरकार की नीतियों का सवाल हो या मंत्रियों पर लग रहे घोटाले के आरोप हों, हर मामले में निर्भीक और त्वरित टिप्पणी करके सरकार को घेरने का काम गरिमा करती रही हैं। कांग्रेस पार्टी और उसकी चुनावी रणनीति पर ‘दि संडे पोस्ट’ के प्रमुख संवाददाता कृष्ण कुमार ने गरिमा माहरा दसौनी से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश
कांग्रेस पार्टी प्रदेश की राजनीति की धुरी रही है। राज्य बनने से लेकर अब तक कांग्रेस ने दो बार प्रदेश की सत्ता की बागडोर सम्भाली है। अब लेकिन बीते कुछ वर्षों से कांग्रेस अपना जनाधार खोती नजर आने लगी है ऐसा क्यों?
निश्चित रूप से मैं यह नहीं कहूंगी कि कांग्रेस पार्टी परफेक्ट है और उसमें कोई भी बुराई नहीं है या कोई भी ऐसी बात नहीं है कि जिसे सुधारा नहीं जा सकता। कमियां हर दल में होती हैं, हर दल के अनुशासन में होती है। अगर मैं यह कहूं कि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में काम नहीं किया जिससे उसका यह हश्र हुआ तो यह पूरी तरह से गलत होगा। पहली निर्वाचित सरकार कांग्रेस की बनी और हमारी सरकार ने ही उत्तराखण्ड प्रदेश के विकास की बुनियाद रखी। राज्य के 24 वर्षों के राजनीतिक इतिहास की पहली ऐसी सरकार रही जो कि पूरे पांच साल तक चली जबकि इसके बाद कोई भी ऐसा समय नहीं आया है जिसमें मुख्यमंत्री नं बदले गए हों। फिर हमारा 2012 से 17 तक का कार्यकाल आया जिसमें पहले दो वर्ष विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री रहे और फिर तीन साल हरीश रावत मुख्यमंत्री रहे। दोनों के ही कार्यकाल में विकास कार्यों का आधारभूत ढांचा खड़ा किया गया। पंडित नारायण दत्त तिवारी जी प्रदेश में निवेश लाए जिससे मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सिडकुल, उद्योगों की स्थापना हुई। हरीश रावत जी ने अपने अल्प कार्यकाल में ही विकास का बड़ा ढांचा खड़ा किया। सड़क, अस्पताल, महाविद्यालय, उद्योग का ढांचा हरीश रावत की सरकार में खड़ा हुआ। गैरसैंण में इंफ्रास्ट्रक्चर का जितना काम हमारी सरकार ने किया उतना किसी और सरकार ने नहीं किया। गैरसैंण में भव्य विधानसभा भवन का निर्माण हो या अन्य निर्माण सभी कांग्रेस सरकार की ही देन है। जबकि भाजपा ने गैरसैंण को लेकर कुछ भी नहीं किया, केवल जुबानी जमा ही खर्च किया। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई लेकिन उसमें सुविधाओं और अवस्थापना के कार्यों में एक भी पैसा खर्च नहीं किया है। गैरसैंण कितनी राजधानी है, कितनी नहीं यह मैं जनता के विवेक पर छोड़ती हूं।
आपने गैरसैंण की बात कही है तो कांग्रेस का गैरसैंण को लेकर क्या रुख है? क्या कांग्रेस पार्टी गैरसैंण को राज्य की राजधानी बनाने के प्रति गम्भीर है या यह सिर्फ चुनावी दावा ही है?
हमने गैरसैंण का रोडमैप तैयार किया, हमने ही गैरसैंण को दिशा दी है। कांग्रेस ने ऐसी स्थिति बना दी है कि अब आने वाले समय में हर किसी को गैरसैंण का रुख करना ही होगा, कोई गैरसैंण से अलग नहीं हो सकता। हम पूरा जोर लगा देंगे गैरसैंण को प्रदेश की राजधानी बनाने के लिए। हजार करोड़ का खर्च चाहिए गैरसैंण को पूरी तरह से राजधानी बनाने के लिए। वहां ऑफिस बनेंगे, सचिवालय बनेगा, कर्मचारियों के आवास, स्कूल, अस्पताल आदि बनाए जाने हैं। एक नगर बसेगा जिसमें सभी आधारभूत सुविधाएं जुटाई जानी हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की मदद के बिना कोई भी राज्य सरकार इतना खर्च नहीं कर सकती। अब भाजपा सरकार तो डबल इंजन नहीं ट्रिपल इंजन की सरकार है। केंद्र में भाजपा है तो राज्य में दो टर्म से भाजपा की ही सरकार है। तो क्यों नहीं भाजपा डबल इंजन का फायदा उठा रही है। करे भाजपा राजधानी पर खर्च। घोषित करे स्थाई राजधानी। आज देश में केवल उत्तराखण्ड एक ऐसा प्रदेश है जिसकी अपनी कोई राजधानी नहीं है, हम किसे राजधानी कहें? देहरादून को कहें या रायपुर को कहें या गैरसैंण को राजधानी कहें। हमें शर्म महसूस होती है कि जब कोई हमसे हमारी राजधानी पूछता है, हम किसे अपनी राजधानी बताएं। चुनाव में कहा गया था कि आप हमें चुनाव में जितवाइए, हम विकास का पहिया प्रदेश में दौड़ा देंगे। लेकिन आज तक न तो हमें पूर्णकालिक राजधानी मिली है और न ही हमारी परिसम्पत्तियों का बंटवारा हो पाया है। आज न पानी हमारा है और न ही बिजली हमारी। गैरसैंण इस प्रदेश की आत्मा है। ‘कोदा, झिंगोरा खाएंगे गैरसैंण को राजधानी बनाएंगे’ यह राज्य आंदोलन का नारा था। इसे कैसे भूल सकते हैं? गैरसैंण पूर्णकालिक स्थाई राजधानी बनेगी और कांग्रेस पार्टी की सरकार ही बनाएगी। भाजपा से हमें और प्रदेश की जनता को तो कोई उम्मीद ही नहीं हैं।
गैरसैंण में शीतकालीन सत्र के समय में करीब 40 विधायकों ने ठंड होने का हवाला देकर देहरादून में ही सत्र करवाए जाने के लिए पत्र लिखा। उसमें कांग्रेस के भी कई विधायकों ने हस्ताक्षर किए थे। कांग्रेस के विधायक भी गैरसैंण जाना नहीं चाहते तो फिर आपका दावा कैसे सही माना जा सकता है?
नहीं, नहीं… यह बिल्कुल भी एक्सेपटेबल नहीं है, कतई स्वीकार्य नहीं है। पृथक पहाड़ी राज्य मांगा है हमने, पहाड़ी राज्य है तो बर्फ भी गिरेगी, ठंड भी होगी बारिश भी होगी। इसके डर से आप पीठ नहीं दिखा सकते। गैरसैंण की जनता वहां कैसे रहेगी जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों को गैरसैंण में ठंड लग रही हो। मुझे लगता है कि भाववश में हमारे विधायकों ने सिग्नेचर कर दिए लेकिन बाद में पछतावा और अत्मग्लानि उनको भी हुई है।
कांग्रेस भाजपा से क्यों पिछड़ गई। क्या कांग्रेस मतदाताओं तक अपनी बात नहीं पहुंचा पा रही है?
आजकल भाजपा एक नैरेटिव चला रही है छद्म हिंदुवाद, छद्म राष्ट्रवाद की राजनीति कर रही है। हिंदुस्तान की जनता बहुत भावुक है खासतौर पर उत्तराखण्ड की जनता बहुत ही भावुक है। वह आसानी से इस तरह के मुद्दों पर भावनाओं में बहकर प्रभावित हो जाती है। यह नहीं देखते कि जो लोग इस तरह की बातें करते हैं उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है? उनके खुद के चाल, चरित्र और चेहरे में कितना फर्क है। बात करते हैं हिंदुत्व की, केदारनाथ में कितनी बड़ी चोट पहुंचा दी। 228 किलो सोना चोरी करवा दिया और आप चुप हैं? क्यूआर कोड का मामला हुआ तो आप कहते रहे हमारा है ही नहीं। हम अगर पिछडे़ हैं तो हम अपनी गलतियों से नहीं पिछडे हैं। जनता ने उन पर ज्यादा विश्वास किया है। जनता को शायद विकास नहीं चाहिए। जनता को महंगाई, रोजगार से मतलब नहीं है। उनको तो बस जिस रंग में भारतीय जनता पार्टी ने ढाल रखा है वह उसी रंग में रहना चाह रही है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि कुछ दिनों के बाद जनता रियलाइज करेगी कि राजनीेतिक दल विकास के लिए चुने जाते हैं, मंदिर और मस्जिद के लिए नहीं चुने जाते। न ही धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए चुने जाते हैं। इसके लिए तो हमारे ऊपर शंकराचार्य जैसी विभूतियां हैं जो धर्म का प्रचार-प्रसार के लिए हैं। राजनीतिक दल इसके लिए नहीं बने हैं। भाजपा सब काम कर रही है। धर्मांतरण की बात करवा लो, लव जेहाद, लैंड जेहाद की बात करवा लो, धर्म की बात करवा लो लेकिन जिस विकास के पहिए को सरपट दौड़ाने के लिए उनको सत्ता मिली है वही काम भाजपा से नहीं होता।
मुख्यमंत्री धामी ‘थूक जेहाद’, ‘लैंड जेहाद’, ‘लव जेहाद’ पर बयान दे रहे हैं। भाजपा कह रही है कि इस तरह के काम प्रदेश में बाहर से आने वाले मुसलमान कर रहे हैं। प्रदेश के मुसलमान ऐसा काम नहीं करते। कांग्रेस इन बयानों को कैसे देखती है?
मैं माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी से कहना चाहती हूं कि जल्दी कीजिए, आपने कहा है कि ऐसे लोगांे को बख्शा नहीं जाएगा। हम भी चाहते हैं कि ऐसे लोगों को चिन्हित करें क्योंकि ऐसी कुत्सित मानसिकता के लोग जो षड्यंत्र रच रहे हैं, उत्तराखण्ड की शांतवादियों में जहर घोल रहे हैं। यहां के सौहार्द, सामाजिक ताने-बाने से छेड़छाड़ कर रहे हैं, उनका सामने आना बहुत जरूरी है। लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी आपको यह बात समझनी होगी कि सिर्फ जेहाद शब्द कह देने से अपराध खत्म नहीं होंगे। अपराध खत्म होने से पहले आपको जड़ में जाना होगा कि आपकी ही सरकार में ऐसे अपराध क्यों हो रहे हैं? ‘भूतो न भविष्यति’। आपसे पहले की सरकारों में तो इस तरह के कुत्सित अपराध कभी नहीं हुए। उत्तराखण्ड में पहले भी अपराध होते रहे हैं लेकिन वर्तमान सरकर के समय में तो बाढ़ आ गई है। महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्याएं, नशे का कारोबार आपकी सरकार में सबसे ज्यादा बढ़ा है। यह जो ‘थूक जेहाद’, ‘लव जेहाद’, ‘लैंड जेहाद’ है इस तरह की घटनाएं तो कभी उत्तराखण्ड में देखी ही नहीं गई। इससे आपको सबसे पहले आत्मलोकन करना होगा कि आपको यहां के लोग, यहां के अपराधी बहुत ही हल्के में ले रहे हैं। आपका और आपकी सरकार का अपराधियों पर कोई खौफ नहीं है। कोई भी कैसा भी बड़ा से बड़ा अपराध प्रदेश में कर देता है। उसके मन में आपका कोई डर तक नहीं रह गया है। अगर सेहरा आप अपने माथे पर लगाना पंसद करते हैं तो यह काला धब्बा भी आपके माथे पर आपको लगाना ही होगा कि आपकी सरकार में अपराधियों में कोई भय या कानून का डर नहीं रहा गया है।
आप और आपकी पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट कहते हैं कि बाहर से आए मुसलमान ही इस तरह के अपराध कर रहे हैं। उत्तराखण्ड का
मुसलमान यह काम नहीं कर सकता। मैं पूछना चाहती हूं महेंद्र भट्ट जी से यह खालिद मंसूरी कौन है? जिस पर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने लम्बे समय से इनामी राशि घोषित की हुई है, आपने उसे विकास नगर की मस्जिद का सदर बना दिया। उसे यूपी पुलिस उठाकर ले गई है। आप ही तो बाहरी लोगों को राज्य में लाकर पद दे रहे हैं। आपकी सरकार ने ऐसे अपराधियों का बैकग्राउंड तक चेक नहीं किया और उसे मस्जिद का सदर बना दिया। ये मुफ्ती शामू काजमी कौन हैं? यह बाहरी हैं या उत्तराखण्ड का। हमने जब इसका बैकग्राउंड निकाला तो वह बिजनौर के रहने वाला निकला। आप ही बाहरी लोगों को अपनी गोद में बैठाने का काम करते हैं और फिर इस तरह के बाहरी का आरोप लगा रहे हैं। आप जनता की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। आपके ही प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कोरोनाकाल में कहा था कि दुकान पर बाल कटवाने जाओ तो सबसे पहले तो दुकान में भगवान की तस्वीर देखकर या मूर्ति देखकर ही जाना। महेंद्र भट्ट ने यह बयान किन मुसलमानों के लिए दिया था। क्या वह बयान बाहरी मुसलमानों के लिए दिया था कि उत्तराखण्ड के मुसलमानों के लिए? आज प्रदेश में निकाय, पंचायत और केदारनाथ उपचुनाव होने हैं तो आप प्रदेश के मुसलमानों को नाराज नहीं करना चाहते इसलिए आप और आपके महेंद्र भट्ट इस तरह के बयान दे रहे हैं।
कांग्रेस केदारनाथ उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। ऑबजर्वरों की टीम बना ली गई है। भाजपा किस मुंह से केदारनाथ की जनता से वोट मांगेगी? भाजपा को हार का डर सता रहा है। जिस तरह से अयोध्या के बाद बदरीनाथ सीट पर भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ है उसी तरह से केदारनाथ उपचुनाव में जनता भाजपा को करारी मात देने वाली है। केदारनाथ के मामले में तो भाजपा पूरी तरह से नग्न अवस्था में आ गई है। पहले तो करोड़ों का सोना चोरी करवाया फिर क्यूआर कोड से केदारनाथ में लूट करवाई। दिल्ली में केदारनाथ धाम का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने तब किया जब उनकी ही पार्टी की विधायक स्वर्गीय शैलारानी रावत की अंत्येष्टी हो रही थी। मुख्यमंत्री को इतनी भी समझ नहीं कि उनकी केदारनाथ की विधायक का अंतिम संस्कार चल रहा है और वे बेशर्मी से फर्जी केदारनाथ धाम का शिलान्यास कर रहे हैं। जब आपदा आई तब सरकार और उसके मंत्री केदानाथ नहीं गए। अब हर नेता और सरकार केदारनाथ जा रही है। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि भाजपा को केदारनाथ सीट पर हार का पूरा अंदेशा है और इससे बचने के लिए अब जी-तोड़ काशिशें की जा रही हैं। लेकिन जनता ने अपना मन बना लिया है और बदरीनाथ की ही तरह केदारनाथ से भी भाजपा को उखाड़ फेंकने वाली है
कांग्रेस लगातार दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव हार चुकी है। इसके क्या कारण आप मानती हैं?
कई मर्तबा गलत प्रचार-प्रसार से भी चुनाव में हार-जीत का फर्क पड़ जाता है। विधानसभा चुनाव में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का एक गुब्बार सत्तारूढ़ दल द्वारा फैलाया गया जिसमें खोदा पहाड़ और निकली चुहिया था और कुछ भी नहीं। एक कार्यकर्ता ने अपना मांग पत्र दिया था जैसे हर पार्टी का कार्यकर्ता अपनी पार्टी को देता है। जरूरी नहीं कि उस मांग पत्र में लिखी हर मांग को माना जाए। उसमें कई मांगे थीं जिसमें उनके द्वारा मुस्लिम यूनिवर्सिटी की भी मांग रखी गई थी। हमारे किसी बड़े नेता ने उसका समर्थन नहीं किया है। हमारे मैनोफेस्टो में मुस्लिम युनिवर्सिटी का जिक्र नहीं था। सिर्फ उस कार्यकर्ता के मांग पत्र को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं ने झूठ पर झूठ बोल कर, उस बात को बार-बार रीपीट कर मतदाताओं को बरगला 2022 में हमारे हाथ से हमारी जीत को छीन लिया। लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट कौन है इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है, संगठन पर बहुत कुछ निर्भर करता है। देश का क्या माहौल है इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। मैं इस हार को इस रूप में लूंगी कि इसमें हार आखिरकार जनता की ही हुई है, कांग्रेस की हार नहीं हुई है। क्योंकि बार-बार पांच साल से आप ऐसे लोगों को ही अपना सांसद चुन रहे हैं जो सिर्फ चुनाव के लिए सांसद हैं, प्रदेश के विकास के लिए उनका कोई विजन तक नहीं है। वे पांच साल तक नदारत रहे हैं, जो गांव वे गोद ले रहे हैं वे जस के तस ही हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड हो या अग्निवीर योजना का विरोध, चुनाव में मतदाताओं ने इन मुद्दों पर कांग्रेस का साथ नहीं दिया। गढ़वाल लोकसभा सीट पर अंकिता भंडारी और अग्निवीर का मुद्दा चुनाव में खूब उछाला गया लेकिन कांग्रेस सभी सीटों पर बुरी तरह से चुनाव हार गई। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी अग्निवीर मुद्दा नहीं चला?
बिल्कुल सही बात कही आपने। मैं इसमें इतना ही कहना चाहती हूं कि ‘जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’। अगर कांग्रेस की नीतियों पर शंका करेंगे तो फिर यही मिलेगा जो मिल रहा है। यही कुशासन मिलेगा जो आपको मिला हुआ है। फिर किसी को दोष देने की जरूरत नहीं है। सच स्वतः बाहर आता है। आज जनता को भाजपा का असली चेहरा समझ में आने लगा है। भाजपा का नकाब उतर गया है और सबको उसका सच सामने आता दिख रहा है। भाजपा नेता तो बड़े-बड़े वादे, दावे करके बरगला तो देते हैं लेकिन खरे एक पर भी नहीं उतरते हैं। हिमाचल, तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें बनी और लोगों ने देखा कि कांग्रेस पार्टी ही विकास की बात करती है। सच को ज्यादा देर तक छुपाया नहीं जा सकता। सत्य लेकिन पराजित नहीं हो सकता। वह बाहर आ ही जाता है। कांग्रेस और जनता के बीच दूरी बनाने के लिए कई षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। आप देखिए कि अच्छी खबर से ज्यादा बुरी खबर तेजी से फैलती है। अंकिता भंडारी को आज भी न्याय नहीं मिला है। यह बहुत ही दुख की बात है। कांग्रेस सकारात्मक राजनीति करती है। हम जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे इसमें हम कभी पीछे नहीं हटने वाले। जनता को भी अब रियलाईज हो रहा है कि कांग्रेस ही है जो माला की तरह पिरोकर देश को एक रख सकती है। कांग्रेस ही है जो जनता के हक के लिए लड़ सकती है। मुझे पूरा भरोसा है कि जनता अब कांग्रेस का ही साथ देगी।
कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात तो करती है लेकिन सड़कों पर नजर नहीं आ रही है। विरोध-प्रदर्शन कांग्रेस भवन से लेकर ऐस्लेहाल चौक तक ही सिमट कर रहा गया है?
नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। कांग्रेस जनता के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ सदन से लेकर सड़कों पर उतरती रही है। सरकार की प्रदेश के खिलाफ नीतियों पर कांग्रेस का विरोध हमेशा से रहा है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों के मामले में हमने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया, सचिवालय का घेराव किया। जिस मुद्दे पर हमें लगा कि किस तरह से विरोध करना है हमने वैसा ही किया। एक बात तो साफ है कि 365 दिन और 24 घंटे कांग्रेस सड़कों पर नहीं बैठ सकती लेकिन जो मुद्दे हमको लगते हैं उस पर डेफिनेटली हम चोट करते हैं।
उत्तराखण्ड में पहले भी अपराध होते रहे हैं लेकिन वर्तमान सरकार के समय में तो बाढ़ आ गई है। महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्याएं, नशे का कारोबार आपकी सरकार में सबसे ज्यादा बढ़ा है। यह जो ‘थूक जेहाद’, ‘लव जेहाद’, ‘लैंड जेहाद’ है इस तरह की घटनाएं तो कभी उत्तराखण्ड में देखी ही नहीं गई। इससे आपको सबसे पहले आत्मलोकन करना होगा कि आपको यहां के लोग, यहां के अपराधी बहुत ही हल्के में ले रहे हैं। आपका और आपकी सरकार का अपराधो पर कोई खौफ नहीं है। कोई भी कैसा भी बड़ा से बड़ा अपराध प्रदेश में कर देता है। उसके मन में आपका कोई डर तक नहीं रह गया है। अगर सेहरा आप अपने माथे पर लगाना पंसद करते हैं तो यह काला धब्बा भी आपके माथे पर आपको लगाना ही होगा कि आपकी सरकार में अपराधियों में कोई भय या कानून का डर नहीं रहा गया है
कांग्रेस के कई बड़े नेता कह चुके हैं कि हम भाजपा का कुप्रचार का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। टीवी चैनलों में भी कांग्रेस के प्रवक्ताओं पर भाजपा प्रवक्ता हावी होते दिखाई देते हैं। क्या कांग्रेस वास्तव में भाजपा का मुकाबला दमदार तरीके से नहीं कर पा रही है?
नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेसी प्रवक्ता टीवी चैनलों में भाजपा प्रवक्ताओं से कम नजर आ रहे हैं। हमारे सभी प्रवक्ता पूरी जानकारी और पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों पर अपनी बात को मजबूती के साथ रखते रहे हैं और रख रहे हैं। हमारे हर प्रवक्ता या नेता सभी अनुभवी और पढ़े-लिखे हैं। उनकी बौद्धिक क्षमता और स्तर पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। भाजपा नेता फर्जी नैरेटिव और आंकड़ेबाजी का सहारा लेकर झूठ परोसते रहते हैं जिनकी कांग्रेस प्रवक्ताओं ने जमकर बक्खियां उधेड़ी हैं। इतना जरूर है कि भाजपा के नेता हंगामा और अससंदीय शब्दों का प्रयोग करते हैं, जो कांग्रेस के प्रवक्ता कभी नहीं कर सकते। इस मामले में आप कह सकते हैं कि असंसदीय शब्दों और झूठ परोसने में कांग्रेसी प्रवक्ता भाजपा के प्रवक्ताओं से पीछे हैं।
केदारनाथ उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। अब चुनाव सिर पर आ गया है तो भाजपा अपनी पूरी टीम पहले ही मैदान में उतारकर चुनावी रणनीति बना चुकी है, कई कैबिनेट मंत्रियों को जिम्मेदारी दी जा चुकी है लेकिन कांग्रेस ने अभी तक इस पर कोई रणनीति तक नहीं बना पा रही है। ऐसा क्यों हैं क्या कांग्रेस केदारनाथ उचुनाव को हल्के में ले रही है?
कांग्रेस केदारनाथ उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। ऑबजर्वरों की टीम बना ली गई है। भाजपा किस मुंह से केदारनाथ की जनता से वोट मांगेगी? भाजपा को हार का डर सता रहा है। जिस तरह से अयोध्या के बाद बदरीनाथ सीट पर भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ है उसी तरह से केदारनाथ उपचुनाव में जनता भाजपा को करारी मात देने वाली है। केदारनाथ के मामले में तो भाजपा पूरी तरह से नग्न अवस्था में आ गई है। पहले तो करोड़ों का सोना चोरी करवाया फिर क्यूआर कोड से केदारनाथ में लूट करवाई। दिल्ली में केदारनाथ धाम का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने तब किया जब उनकी ही पार्टी की विधायक स्वर्गीय शैलारानी रावत की अंत्येष्टी हो रही थी। मुख्यमंत्री को इतनी भी समझ नहीं कि उनकी केदारनाथ की विधायक का अंतिम सस्कार चल रहा है और वे बेशर्मी से फर्जी केदारनाथ धाम का शिलान्यास कर रहे हैं। जब आपदा आई तब सरकार और उसके मंत्री केदानाथ नहीं गए। अब हर नेता और सरकार केदारनाथ जा रही है। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि भाजपा को केदारनाथ सीट पर हार का पूरा अंदेशा है और इससे बचने के लिए अब जी-तोड़ काशिशें की जा रही हैं। लेकिन जनता ने अपना मन बना लिया है और बदरीनाथ की ही तरह केदारनाथ से भी भाजपा को उखाड़ फेंकने वाली है।
कांग्रेस छोड़कर जाने वाली महिला नेताओं का कहना है कि पार्टी में महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता। टिकट देने पर आखिर में कांग्रेस को पुरुष नेता ही मिलते है, महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाता। इसमें कितनी सच्चाई है?
सम्मान होता किस चिड़िया का नाम है? क्या कांग्रेस पार्टी किसी के घर गई थी कि आओ कांग्रेस में आओ। पार्टी ने पद और सम्मान दिया, फिर भी किसी को लगता है कि उसे सम्मान नहीं मिल रहा है तो क्या कह सकते हैं। आप किसी पार्टी से उसकी विचारधारा उसके सिद्धांतों के कारण जुड़ते हैं। मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस से ज्यादा किसी अन्य पार्टी में महिलाओं को सम्मान मिलता हो। भाजपा की कोर कमेटी में बताइए न कौन महिला है? भाजपा के किसी भी प्रदर्शन या कार्यक्रम में कितनी महिलाओं को बोलने दिया जाता है? भाषण तक नहीं देने दिया जाता। टिकट भी कितनी महिलाओं को दिया जाता है? सिर्फ और सिर्फ परिवारवाद पर भाजपा पल्लवित और पुष्पित हो रही है। भाजपा से पूछो कि विजय बहुगुणा औेर उनके पुत्र कहां है? प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत कहां है? मुन्नी देवी कहां है? बीसी खण्डूड़ी के पुत्र और पुत्री कहां हैं? पार्वती दास आर्य कहां है? यह सभी भाजपा के परिवारवाद के ही प्रमाण हैं। कांग्रेस पर भाजपा परिवारवाद का आरोप लगाती है लेकिन जब टिकट देना होता है तो बड़े नेताओं के बच्चों को ही आगे करके टिकट थमा दिया जाता है। क्यों नहीं पार्टी के अन्य महिला नेताओं को टिकट देती है भाजपा। फिर भी आपको भाजपा में महिलाओं का सम्मान नजर आ रहा है।
प्रदेश में बढ़ते महिला अपराध और सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपका क्या कहना है?
मैं बहुत दुखी हूं इस भाजपा सरकार से। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा लेकिन सरकार और उसके मंत्री आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। जब विजिलेंस विभाग मंत्री गणेश जोशी पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सरकार से अनुमति मांगता है तो सरकार अनुमति नहीं देती। उद्यान विभाग में घोटालों पर सीबीआई जांच का आदेश हाईकोर्ट देता है तो मंत्री गणेश जोशी जांच रूकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं जहां से उनको बुरी तरह से लताड़ लगती है। भाजपा का भ्रष्टाचार मुक्त शासन एक बड़ा झूठ है। हम नहीं कहते कि गणेश जोशी दोषी हैं लेकिन जांच तो होने दो। तीन महीने का समय भी आपको पूरा नहीं पड़ा विजिलेंस विभाग को अनुमति देने के लिए। आपकी पार्टी के चमोली जिले के भाजपा पदाधिकारी का बेटा लाखों रुपए घूस लेे रहा है, सरकारी ठेके और नौकरी दिलवाने के नाम पर। आप पूरी तरह से भ्रष्टाचार में घिरे हुए हैं। भर्ती घोटाले का मुख्य आरोपी हाकम सिंह हो या अन्य कोई सभी में भाजपा के ही नेता रहे हैं। पूर्व में आपकी पार्टी के संगठन महामंत्री संजय कुमार पर भाजपा की महिला कार्यकर्ता पर यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं। आपके महानगर अध्यक्ष अनिल गोयल महिला कार्यकर्ताओं को कहते हैं कि अच्छे घरों की महिलाएं राजनीति में नहीं आती हैं जो आती हैं उनको इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रह कर आना चाहिए। यह क्या दिखाता है। भाजपा का असली चेहरा उनके पदाधिकारियों के अपराध हैं जो सामने आते रहते हैं।
यही हाल प्रदेश में महिलाओं पर अपराधों का भी है। जितने अपराध भाजपा सरकार में महिलाओं पर हो रहे हैं उतना कभी किसी सरकार में नहीं हुए। आपके मंडल अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, दुग्ध संघ के अध्यक्ष पर महिलाओं से बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों में आरोपी हैं। अंकिता भंडारी के मामले में भी आपकी ही विधायक द्वारा घटनास्थल पर बुल्डोजर चलवाकर सबूत मिटाने का काम किया क्योंकि अंकिता भंडारी का आरोपी भाजपा नेता का बेटा था। आज जब मैं आपको इंटरव्यू दे रही हूं तो देहरादून में एक मूक बधिर बालिका के साथ बलात्कार की घटना हो चुकी है। बलात्कार, महिलाओं पर हिंसा और यौन शोषण धामी सरकार में एक बड़ा धब्बा है। अब नारा ‘बेटियों को भाजपा के नेताओं से बचाओ’ का चलने लगा है।
क्या कांग्रेस एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करेगी या जैसा है वैसा ही चलेगा?
बदलाव होना तो प्रकृति का नियम है। बदलाव होने भी चाहिए। आने वाले समय में आपको अनुशासन पर काम होता दिखेगा। आपको यूथ अग्रणी पंक्ति में दिखेगा। आज की जो युवा पीढ़ी है जो फर्स्ट टाईम वोटर बनी है उसने कांग्रेस का शासन बहुत कम देखा है, आज के युवा ने राजीव गांधी जी, इंदिरा जी, नरसिंम्हा राव या डॉक्टर मनमोहन सिंह का कार्यकाल नहीं देखा। उस युवा पीढ़ी को हमने अगर आकर्षित करना है तो युवा पीढ़ी को ही राजनीति में उतारना पड़ेगा। अब निकाय और पंचायत चुनाव भी होने वाले हैं तो बूथ स्तर, ब्लॉक स्तर पर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ हर चुनाव में भाजपा को टक्कर देगी और चुनाव में जीत हासिल करेगी। अब कांग्रेस अभी से 2027 विधानसभा और 2029 लेाकसभा चुनाव की रणनीति और तैयारी के साथ नजर आएगी।
बदलाव होना तो प्रकृति का नियम है। बदलाव होने भी चाहिए। आने वाले समय में आपको अनुशासन पर काम होता दिखेगा। आपको यूथ अग्रणी पंक्ति में दिखेगा। आज की जो युवा पीढ़ी है जो फर्स्ट टाईम वोटर बनी है उसने कांग्रेस का शासन बहुत कम देखा है, आज के युवा ने राजीव गांधी जी, इंदिरा जी, नरसिंम्हा राव या डॉक्टर मनमोहन सिंह का कार्यकाल नहीं देखा। उस युवा पीढ़ी को हमने अगर आकर्षित करना है तो युवा पीढ़ी को ही राजनीति में उतारना पड़ेगा। अब निकाय और पंचायत चुनाव भी होने वाले हैं तो बूथ स्तर, ब्लॉक स्तर पर कमेटियों का गठन किया जा रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ हर चुनाव में भाजपा को टक्कर देगी और चुनाव में जीत हासिल करेगी

