आम चुनाव के बाद क्या राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष का चेहरा बदला जाएगा? इस बात को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चला है। वर्तमान में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी से इशारा मिलने की चर्चा भी है। प्रदेश में नए सियासी संतुलन के लिहाज से बदलाव पर सबकी निगाहें टिकी हैं। गौरतलब है कि
गोविंद सिंह डोटासरा ने 2020 में सियासी संकट के बीच राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान संभाली थी। उनका तीन साल का कार्यकाल पिछले साल खत्म हो गया, लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें बरकरार रखा गया। ऐसे में अब एक बार फिर इस बात को लेकर सुगबुहाट तेज है कि गोविंद सिंह डोटासरा को फिर मौका मिलेगा या प्रदेश कांग्रेस का चेहरा बदल जाएगा। कहा जा रहा है कि आलकमान इस पर लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद फैसला लेगा। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कांग्रेस के इतिहास में कई प्रदेशाध्यक्ष ऐसे रहे हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा बार राजस्थान कांग्रेस की कमान संभाली है। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता परसराम मदेरणा, गिरधारी लाल व्यास और गिरिजा व्यास के नाम सबसे लंबे समय तक कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड है। सचिन पायलट को भी दूसरी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वे अपना दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। ऐसे में लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो डोटासरा को दुबारा मौका मिल सकता है। विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 71 सीट मिली थी। अब लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर भी कांग्रेस का खेमा खासा उत्साहित नजर आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस में नेताओं और उनके समर्थकों के बीच गुटबाजी और खेमेबंदी का लंबा इतिहास रहा है। गोविंद सिंह डोटासरा से पहले सचिन पायलट कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे। उनका दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं होने का प्रमुख कारण भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच आपसी खींचतान रही है, लेकिन गोविंद डोटासरा के अध्यक्ष रहते कुछ हद तक कांग्रेस में गुटबाजी पर लगाम लगी है और विधानसभा चुनाव में भी इसका असर देखने को मिला था।
डोटासरा को फिर मिल सकती है कमान

