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किसान आंदोलन को देश-विदेश से मिल रहा समर्थन

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसान लगातार सातवें दिन भी कृषि कानूनों के विरोध में डटे हुए हैं। सरकार ने किसानों से बातचीत के रास्ते को सटीक रास्ता बताया है। हालांकि अभी तक किसान नेताओं और सरकार के बीच तीन बार वार्ता हो चुकी है। लेकिन बातचीत किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंची। सरकार और किसानों के बीच बातचीत को लेकर कोई सटीक तालमेल भी नहीं बैठ रहा। अभी सरकार की तरफ से कहा गया है कि किसान अपने 4-5 प्रतिनिधियों का समूह बनाए जो हमसे बात करें, लेकिन किसानों ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्हें शंका है कि सरकार इस बहाने उनका आंदोलन तोड़ने के मूड में है। किसान आंदोलन के नारे अब विदेशों में भी गूजने लगे है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी अब भारतीय किसानों के समर्थन में उतर आए हैं।

गुरुनानक देव के 551वें प्रकाश पर्व पर एक ऑनलाइन इवेंट के दौरान टूडो ने कहा कि किसान हमेशा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं याद दिलाना चाहता हूं कि कनाडा ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध- प्रदर्शन का समर्थन किया। विश्व सिख ऑर्गनाइजेशन ने एक वीडियो जारी किया। इसमें टूडो ने कहा। हम बातचीत का महत्व जानते हैं और यही वजह है कि हमने इस बारे में भारत सरकार को अपनी चिंताओं के बारे में बता दिया है। यह सभी के साथ आने का मौका है।

कनाडा के अलावा यूके के नेता भी किसान समर्थन में उतरे हैं। यूके लेबर पार्टी के एमपी तनमनजीत सिंह ढेसी ने किसानों का समर्थन करते हुए ट्वीट किया कि ”उन्हें पीटने और दबाने का आदेश देने वालों को खिलाने में एक खास तरह के लोग लगते हैं। मैं अपने परिवार और मित्रों सहित पंजाब और भारत के अन्य भागों के किसानों के साथ खड़ा हूं, जो किसान बिल 2020 (अब कानून) के अतिक्रमण निजीकरण के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हैं।

लेबर पार्टी की सांसद प्रीत कौर गिल ने ट्वीट कर कहा कि ”दिल्ली से चौंकाने वाले दृश्य, किसान शांतिपूर्वक विवादास्पद बिलों (अब कानून) का विरोध कर रहे हैं जो उनकी आजीविका को प्रभावित करेंगे। उन्हें चुप कराने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है।”

पिछले साल कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुईं प्रियंका चतुर्वेदी को जस्टिन टूडो का बयान नागवार गुजरा। उन्होंने इसे भारत के मामलों में दखलंदाजी बताया। कनाडाई पीएम को टैग करते हुए प्रियंका ने सोशल मीडिया पर लिखा, डियर टूडो, आपकी फिक्र समझ सकती हूं। लेकिन अपनी सियासत चमकाने के लिए दूसरे देश की सियासत में दखलंदाजी सही नहीं है। मेहरबानी करके उस परंपरा का पालन कीजिए जो हम दूसरे देशों के मामले में करते हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी से भी अपील करती हूं कि इस मसले को सुलझाएं ताकि दूसरे देशों का टांग अड़ाने का मौका न मिले।

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