भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन आज का है। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। 30 जनवरी, 1948 की अपराह्न गांधी जी सरदार पटेल से बातचीत में इतने रम गए कि समय का बोध ही गंवा बैठे और यह भी कि प्रार्थना सभा में देरी हो रही है!
पांच बजे मतलब पांच बजे! ना एक मिनट कम ना एक मिनट ज़्यादा. नित्यप्रति ठीक पांच बजे प्रार्थना सभा आरम्भ हो जाती थी, और राजा हो या रंक, किसी के लिए रुकती ना थी।
किंतु उस दिन दस मिनट ऊपर हो गए। जब मनु और आभा ने आख़िरकार कहा कि बापू पांच बजकर दस मिनट हो गया है, तो गांधी जी तुरंत उठे और अपराध बोध से भर गए।

तस्वीर : बिड़ला हाउस की छवि
प्रार्थना सभा में दस मिनट की देरी उनके लिए पाप से कम नहीं थी। तो सभा में जल्दी पहुँचने की गरज़ से गांधी जी रोज़ की तरह मुख्य द्वार से बाहर नहीं निकले, बल्कि अपने कमरे के बग़ल वाली लम्बी सी खिड़की को फर्लांग कर ही प्रार्थना के लिए चल पड़े। यह एक महान जीवन का अंतिम सजग निर्णय था। वैसा करके गांधी जी ने कितना समय बचा लिया होगा? एक मिनट?
जबकि 170 गज के फ़ासले पर अनन्तकाल उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। 170 गज के बाद समय का कोई अस्तित्व नहीं रह जाने वाला था। गांधी की अहिंसा की यह पराकाष्ठा है कि उन्होंने अपने हत्यारे को भी एक मिनट कम इंतज़ार करवाया।
स्टोरी : अरुण कुमार ,लेखक

