भारतीय स्टार भाला फेंक नीरज चोपड़ा का स्वतंत्रता के बाद लगातार दो ओलंपिक में स्वर्ण और रजत जीतने वाला पहला खिलाड़ी बनना हो, निशानेबाज मनु भाकर का एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनना या फिर पांच दशक बाद हॉकी टीम का लगातार दो ओलंपिक पदक जीतना या अमन सहरावत का ओलंपिक पदक जीतने वाला सबसे युवा खिलाड़ी बनना। भारत के लिहाज से पेरिस में स्वर्ण नहीं जीत पाने की कसक के साथ ही विवादों के लिए याद किया जाएगा
खेलों का महाकुंभ ओलम्पिक 2024 का रंगारंग समापन समारोह के दौरान सभी विजेता खिलाड़ियों का सम्मान किया गया और ओलम्पिक का झंडा लॉस एंजेलिस को सौंपा गया जो साल 2028 में ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक का अगला मेजबान है। भारत की तरफ से मनु भाकर और पीआर श्रीजेश हाथों में तिरंगा थामे उतरे। 2021 टोक्यो ओलम्पिक में एक स्वर्ण सहित सात पदक जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट भी पेरिस में नया इतिहास रचने उतरे थे, लेकिन उनका अभियान एक रजत और पांच कांस्य पदक के साथ कुल 6 पदक पर समाप्त हुआ। वहीं ओलम्पिक के दौरान कुश्ती के फाइनल में महिला पहलवान विनेश फोगाट मैच के कुछ घंटों पहले 100 ग्राम वजन बढ़े होने के कारण न सिर्फ अयोग्य करार दी गईं, बल्कि उन्हें कोई मेडल देने से भी इनकार कर दिया गया। इसके अलावा कई भारतीय एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन किया मगर वह मेडल हासिल करने से चूक गए। हालांकि कुछ खिलाड़ियों का प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
खासकर स्टार भाला फेंक नीरज चोपड़ा का स्वतंत्रता के बाद लगातार दो ओलम्पिक में स्वर्ण और रजत जीतने वाला पहला खिलाड़ी बनना हो या फिर निशानेबाज मनु भाकर का एक ओलम्पिक में दो पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनना या फिर पांच दशक बाद हॉकी टीम का लगातार दो ओलम्पिक पदक जीतना हो या अमन सहरावत का ओलम्पिक पदक जीतने वाला सबसे युवा खिलाड़ी बनना। दूसरी तरफ छह स्पर्धाओं में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गए। अगर ये पदक जीत जाते तो कुल पदकों के मामले में भारतीय दल टोक्यो को पीछे छोड़ सकता था, लेकिन पेरिस में स्वर्ण नहीं जीत पाने की कसक हमेशा ही रहेगी। पेरिस के प्रदर्शन से एथलीटों ने दिखाया कि 2028 लॉस एंजिलिस ओलम्पिक में वे इस कसक को दूर करने का प्रयास करेंगे।

अगर इस बार सबसे ज्यादा पदक जीतने वालों की बात करें तो पदकों की दौड़ में अमेरिका पहले पायदान पर रहा। अमेरिका ने कुल 126 मेडल जीते जिसमें (40 गोल्ड, 44 सिल्वर और 42 ब्रॉन्ज शामिल हैं। जबकि चीन 40 गोल्ड, 27 सिल्वर और 24 ब्रॉन्ज) के साथ कुल 91 मेडल जीत दूसरे तो जापान को 45 पदक मिले जिसमें गोल्ड 20 रजत 12 कांस्य 13 शामिल हैं। इस ओलम्पिक में करीब 114 देश ऐसे हैं जिन्हें कोई भी मेडल नहीं मिला वहीं इस बार के ओलम्पिक खेलों में भारतीय कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट के अयोग्य घोषित होने, मुक्केबाज ईमान खलीफ और लिन यू तिंग के साथ जेंडर विवाद और अर्मीनिया की जिम्नास्ट जॉर्डन चाइल्स से कांस्य पदक छिन जाने आदि कई विवाद सुर्खियों में रहे।
मुकाबले से पहले अयोग्य करार दी गईं विनेश
भारतीय रेसलर विनेश फोगाट ने फाइनल में पहुंचकर सिल्वर मेडल पक्का कर लिया था, लेकिन विनेश को ओलम्पिक के फाइनल मुकाबले में ठीक पहले 50 किलोग्राम से 100 ग्राम ज्यादा होने पर उनको न सिर्फ अयोग्य करार दिया गया था, बल्कि सिल्वर मेडल भी नहीं मिला।
एजेंला करिनी ने छोड़ा मुक़ाबला
महिला बॉक्सिंग के एक मैच में बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब अल्जीरिया की बॉक्सर ईमान खलीफ के खिलाफ रिंग में उतरीं इटली की बॉक्सर एजेंला करिनी ने महज 46 सेकेंड बाद ही मुकाबला छोड़ दिया। खलीफ पेरिस ओलम्पिक की उन दो एथलीट्स में शामिल हैं जिन्हें पिछले साल जेंडर एलिजिबिलिटी टेस्ट में फेल होने के कारण वर्ल्ड चैम्पियनशिप से बाहर कर दिया गया था। हालांकि दोनों को पेरिस ओलम्पिक में खेलने की अनुमति दी गई और ईमान खलीफ ने अपने चीनी प्रतिद्वंद्वी को हराकर गोल्ड मेडल जीता जबकि ताइवान की मुक्केबाज लिन यू-तिंग ने भी पोलैंड की 20 वर्षीय मुक्केबाज जूलिया जेरेमेटा को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जेंडर विवाद का असर अगले लॉस एंजेलिस ओलम्पिक पर भी पड़ सकता है, क्योंकि दोनों खिलाड़ी फिर रेस में होंगे।
खराब अम्पायरिंग
तीसरा प्रमुख विवाद रहा आर्मेनियाई जिम्नास्ट जॉर्डन चाइल्स को लेकर जो शुरुआत में पांचवें स्थान पर रहीं लेकिन रोमानिया की ओलम्पिक कमेटी ने अमेरिकी टीम के बताए स्कोर को चुनौती दी थी। क्योंकि आर्मेनियाई जिम्नास्ट टीम के बताए अनुसार ही चाइल्स के स्कोर को 13.666 से 13.766 कर दिया गया था और वो पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर आ गई थीं। लेकिन रोमानिया की जिम्नास्ट बारबोसू का स्कोर 13.7 था और उनकी ओर से इस फै़सले को चुनौती दी गई थी जिसे बाद में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने स्वीकार कर लिया।
अंतिम पंघाल पर हुई अनुशासनहीनता की कार्यवाही
पेरिस ओलम्पिक में खेलों के खेल गांव में अनुशासनहीनता के कारण विवादों में घिरी भारतीय महिला पहलवान अंतिम पंघाल स्वदेश लौट आईं। यह पहलवान तब चर्चा में आ गई थी जब उन्होंने अपने एक्रीडिटेशन कार्ड पर अपनी बहन को खेल गांव में प्रवेश करवाने की कोशिश की थी और बाद में पुलिस ने उन्हें बुलाया। इस घटना ने देश को शर्मसार किया और भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) ने अंतिम और उनके सहयोगी स्टाफ को तुरंत ही स्वदेश वापस भेजने का निर्णय किया। विश्व चौंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता अंतिम ने कहा कि उनका कुछ भी गलत करने का इरादा नहीं था लेकिन खेल गांव के नियमों का उल्लंघन करने के लिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
लुआना अलोंसो को भारी पड़ी सुंदरता
पैराग्वे की तैराक लुआना अलोंसो को ओलम्पिक विलेज में अपनी ग्लैमरस उपस्थिति से ध्यान भटकाने के आरोप में अपनी पेरिस यात्रा समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पैराग्वे टीम मैनेजर ने दल के भीतर अनुचित माहौल बनाने का आरोप लगाने के बाद 20 वर्षीय तैराक को वापस घर भेज दिया। अलोंसो ने पेरिस खेलों में महिलाओं की 100 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में भाग लिया। वह केवल 0.24 सेकंड से सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। प्रतियोगिता से बाहर होने के बावजूद, एथलीटों को ओलम्पिक खेलों के अंत तक विलेज में रहने की अनुमति है। लेकिन इस युवा खिलाड़ी को अपना अपार्टमेंट खाली करने के लिए कहा गया था क्योंकि उसकी टीम के साथी उसकी खूबसूरती से विचलित हो रहे थे। निष्कासन की खबर आने के बाद लुआना अलोंसो ने प्रतिस्पर्धी तैराकी से संन्यास लेने की चौंकाने वाली घोषणा की। जिस पर काफी बबाल हुआ।
भाारत के लिए अच्छा-बुरा दोनों रहा पेरिस ओलम्पिक
भारत ने एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक अपने नाम किए। हालांकि भारत इन खेलों में एक भी स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका। भारत के लिए पेरिस ओलम्पिक मनु भाकर की उपलब्धियों से लेकर विनेश फोगाट के विवाद के लिए याद किया जाएगा। टोक्यो में भारत ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और एक स्वर्ण, दो रजत, चार कांस्य सहित कुल सात पदक जीते थे। भारत टोक्यो में 48वें स्थान पर रहा था, लेकिन इस बार वह पदक तालिका में 71वें स्थान पर रहा।
पेरिस ओलम्पिक में भाला फेंक नीरज चोपड़ा का रजत पदक उम्मीदों से कमतर रहा, जबकि विनेश फोगाट का फाइनल से पहले अयोग्य ठहराया जाना निराशाजनक रहा जिसमें छह खिलाड़ियों के चौथे स्थान पर रहे। ओलम्पिक के शुरू में पदक तालिका में दोहरे पदकों तक पहुंचना बहुत महत्वाकांक्षी लग रहा था लेकिन कई खिलाड़ियों के करीब से चूकने का काफी असर पड़ा। इन सभी चीजों ने काफी सवाल खड़े किए क्योंकि इस बार देश को एथलीटों से दोहरे अंक में पदक लाने की उम्मीद थी, लेकिन भारतीय दल टोक्यो ओलम्पिक के प्रदर्शन की भी बराबरी नहीं कर सका।
भारत की झोली में कुछ और पदक आ सकते थे, लेकिन छह खिलाड़ी चौथे स्थान पर रहे और देश के लिए कांस्य लाने से चूक गए। बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन कांस्य पदक मैच में हार गए थे, जबकि मीराबाई चानू सिर्फ एक किलोग्राम से कांस्य पदक लाने से चूक गई थीं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पदक के बिना विदा होंगे। देश के 117 सदस्यीय दल में महज छह पदक आना अच्छा नहीं हैं लेकिन भारत के लिए इस दौरान खुशी, उम्मीद, निराशा और दुख के पल भी आए। अगर चौथे स्थान पर रहने वाले छह खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहते तो तालिका में दोहरे पदकों की संख्या संभव थी।
पुरुष हॉकी टीम के ओलम्पिक में लगातार दूसरा पदक जीतने की क्षमता पर सवाल बने हुए थे। टीम टोक्यो में जीते गए पदक के रंग को बेहतर नहीं कर सकी, लेकिन जिस तरह से उसने ऑस्ट्रेलिया , बेल्जियम, जर्मनी और ब्रिटेन के खिलाफ दबाव झेला, उससे पता चलता है कि हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली यह टीम मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है। ऐसे में कहा जा सकता है कि भारतीय टीम अंडरडॉग की तरह शामिल हुई लेकिन चैम्पियन की तरह खेली। गोलकीपर पीआर श्रीजेश का संन्यास लेने के लिए यह बिलकुल सही समय था, जिन्होंने टोक्यो कांस्य से पहले अपनी पहचान हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे खेल के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भाग्य ने श्रीजेश को शानदार विदाई दी, लेकिन पहलवान विनेश फोगाट अपनी आत्मा पर कभी नहीं भरने वाला घाव लेकर मंच से चली गईं। एक मुश्किल मुकाबले के बाद एक मामूली हार और एक चुनौतीपूर्ण हार दोनों ही हो सकती है, लेकिन उनके मामले में वह जीतने के बावजूद हार गईं।
युवा मनु भाकर की अगुआई में निशानेबाजों का प्रदर्शन भारत के लिए राहत भरा रहा क्योंकि छह में से तीन पदक निशानेबाजी से आए। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि 22 वर्षीय भाकर ने अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से भारत का मान बचाया। उन्होंने मिश्रित टीम 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में सरबजोत सिंह के साथ मिलकर एक और कांस्य पदक जीता। जब एक पदक भी स्टारडम की गारंटी देता है तो मनु के दोहरे पदक ने उन्हें एक अलग ही श्रेणी में ला खड़ा किया है।
कोई भी मुक्केबाज पदक दौर में नहीं पहुंच सका लेकिन निशांत देव की हार सबसे ज्यादा खलेगी। एक अन्य दावेदार निकहत जरीन भी रो पड़ीं। हालांकि पहलवान अमन सहरावत ने सुनिश्चित किया कि कुश्ती से पदक मिले। टीम में शामिल एकमात्र भारतीय पुरुष पहलवान उम्मीदों पर खरा उतरा। 57 किग्रा वर्ग में रवि दहिया की जगह लेने के पीछे भी कुछ कारण था और उन्होंने इसे साबित भी किया। कुश्ती ने लगातार पांचवें ओलम्पिक में पदक जीता। सबसे निराशाजनक प्रदर्शन अंतिम पंघाल और अंशु मलिक का रहा। उनकी फिटनेस हमेशा संदेह के घेरे में रही।

