हरियाणा के दूसरी बार सीएम बने मनोहर लाल खट्टर इन दिनों गहरे संकट में बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी से निकटता का लाभ खट्टर ने जमकर उठाया। जनाधारविहीन खट्टर ने जब पहली बार हरियाणा की कमान संभाली तो उनके नाम से हरियाणा में बहुत कम परिचित थे।
सीएम पद की दौड़ में शामिल बड़े नेताओं को दरकिनार कर मोदी-शाह ने अपनी टीम के विश्वसनीय साथी को सीएम तो बना दिया। लेकिन खट्टर की प्रशासनिक अक्षमता पार्टी पर भारी पड़ गई। कहां अमित शाह नब्बे में से पचहत्तर सीट जीतने का दावा कर रहे थे, नतीजे आए तो सरकार बनाने के लाले पड़ गए। अब लेकिन खबर है कि खट्टर से मोदी-शाह का वरदहस्त हट चुका है।
जानकारों का दावा है कि प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज के सीएम खिलाफ बगावती सुरों को दिल्ली दरबार का संरक्षण प्राप्त है। गृह मंत्री ने राज्य पुलिस के खुफिया विभाग सीआईडी को सीएम के अधीन किए जाने का इस कदर विरोध कर डाला कि बेचारे खट्टर को दिल्ली दरबार की शरण में जाना पड़ा।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि विज के बजाए दरबार ने खट्टर को ही नसीहतों का पहाड़ा पढ़ा डाला। खबर यह भी है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी खट्टर के तौर तरीकों से खफा हैं। बहुत संभव है दिल्ली चुनाव बाद खट्टर पैदल हो जाएं।

