ब्रिटेन द्वारा चीन को हांगकांग सौंपते वक्त स्वायत्तता की शर्त रखी गयी थी लेकिन नए प्रत्यर्पण बिल से लोगों की चिंता बढ़ गई । शर्त के मुताबिक यदि कोई शख्स अपराथ कर हांगकांग वापस आ जाता है तो उसे मामले की सुनवाई के लिए ऐसे देश प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता जिसके साथ इसकी संधि नहीं है। चीन भी अब तक इस संधि से बाहर है। लेकिन नया बिल इस कानून में विस्तार कर संदिग्धों को प्रत्यर्पण की अनुमति देगा। प्रदर्शनकारी मानते हैं कि इससे हांगकांग के नागरिकों की आजादी खत्म होगी। इसी कारण हांगकांग के लोग सड़क पर उतर कर इसका विरोध लगातार कर रहे है।
हाल ही में हांगकांग में दंगा रोधी पुलिस द्वारा २८ जुलाई, रविवार को बीजिंग कार्यालय के पास लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां दागी गयी । हांगकांग में जहां कई सप्ताह से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। यह झड़प उस लायजन ऑफिस के पास आवासीय इलाके के नजदीक हुई जो कि यहां बीजिंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस कार्यालय पर पिछले सप्ताह अंडे और पेंट फेंके गए थे। शहर में हजारों प्रदर्शनकारियों द्वारा मार्च किए जाने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई घंटे गतिरोध रहा। करीब 200 प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने शेउंग वान जिला स्थित लायजन ऑफिस की ओर मार्च किया, जहां उनका सामना दंगा रोधी पुलिस से हुआ। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों से अवैध सभा समाप्त करने की लाउडस्पीकर से अपील की गयी थी ।बाद में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और रबर की गोलियां भी दागी गईं। प्रदर्शनकारियों ने इसका जवाब में ईंटें फेंकी और पथराव किया। वहीं दंगा रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज के जरिए प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेला गया।
पिछले सात सप्ताह से हो रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत एक विवादास्पद विधेयक को लेकर हुई थी, जिसका उद्देश्य चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देना था। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन अब व्यापक लोकतांत्रिक सुधारों की मांग में तब्दील हो गया है। इससे पहले भी एक जुलाई 1997 को ब्रिटिश उपनिवेश हांगकांग चीन के सुपुर्द किया गया, जिस दिन को हैंडओवर दिवस के रूप वार्षिकोत्सव मनाता है। इसी दौरान विधेयक का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी लेजिस्लेटिव काउंसिल (विधायिका परिषद) में घुसने की कोशिश करने लगे।प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस की उनसे झड़प हो गईं और पुलिस द्वारा मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया गया था । तभी वे और भड़क उठे और उन्होंने इमारत में प्रवेश का कांच का दरवाजा तोड़ डाला गया था। 22वें वार्षिकोत्सव पर जहां एक तरफ चीन विक्टोरिया पार्क में ‘ग्रेटर बे फेस्टिवल’ के साथ पूरे हांगकांग में सिलसिलेवार गतिविधियां आयोजित कर रहा था वहीं सोमवार को प्रदर्शनकारी हजारों की संख्या में जुटे और रैली निकालने लगे। तड़के निकल रही इस रैली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई।
पिछले सात सप्ताह से हो रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत एक विवादास्पद विधेयक को लेकर हुई थी, जिसका उद्देश्य चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देना था। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन अब व्यापक लोकतांत्रिक सुधारों की मांग में तब्दील हो गया है। इससे पहले भी एक जुलाई 1997 को ब्रिटिश उपनिवेश हांगकांग चीन के सुपुर्द किया गया, जिस दिन को हैंडओवर दिवस के रूप वार्षिकोत्सव मनाता है। इसी दौरान विधेयक का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी लेजिस्लेटिव काउंसिल (विधायिका परिषद) में घुसने की कोशिश करने लगे।प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस की उनसे झड़प हो गईं और पुलिस द्वारा मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया गया था । तभी वे और भड़क उठे और उन्होंने इमारत में प्रवेश का कांच का दरवाजा तोड़ डाला गया था। 22वें वार्षिकोत्सव पर जहां एक तरफ चीन विक्टोरिया पार्क में ‘ग्रेटर बे फेस्टिवल’ के साथ पूरे हांगकांग में सिलसिलेवार गतिविधियां आयोजित कर रहा था वहीं सोमवार को प्रदर्शनकारी हजारों की संख्या में जुटे और रैली निकालने लगे। तड़के निकल रही इस रैली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई।
पिछले तीन सप्ताह से हजारों लोग प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। बिल को स्थगित करने के फैसले के बावजूद प्रदर्शनकारियों की नाराजगी चीन समर्थित सर्वोच्च नेता कैरी लेम से है जिन्होंने 2012 में सत्ता में आने के बाद से हांगकांग के लिए कई चुनौतियां खड़ी की हैं।प्रदर्शनकारियों की भीड़ के साथ कुछ लोगों ने इमारत के कांच के पैनल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था । गुस्साई भीड़ द्वारा एक कार्गो कार्ट को लेजिस्लेटिव काउंसिल के कांच के द्वार में घुसा दिया गया था। प्रदर्शनकारियों में कई छात्र शामिल थे जो काले कपड़े, फेस मास्क और हैट पहनकर रैली करते रहे। पुलिस ने इन पर मिर्च स्प्रे का उपयोग किया और दंगा पुलिस द्वारा उन्हें खदेड़ते हुए बल प्रयोग की धमकी दी गयी। हांगकांग के बढ़ते तनाव ने अब भीषण रूप धारण कर लिया है और सरकार कुछ भी नहीं कर पायी है।
माना जा रहा है की जनता के बीच अभूतपूर्व गुस्से के बावजूद शहर का चीन समर्थित नेतृत्व इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कदम नहीं उठा पा रहा है, या फिर वह ऐसा करने के प्रति अनिच्छुक है।