Uttarakhand

मर्म चिकित्सा के मर्मज्ञ जगदीश कलौनी

मर्म चिकित्सा के मर्मज्ञ जगदीश कलौनी महंगी चिकित्सा पद्धति से निजी चिकित्सक मरीजों की जेब ढीली कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उत्तराखण्ड के अधिकतर सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। ऐसे में पिथौरागढ़ के वरिष्ठ पत्रकार जगदीश कलौनी मर्म चिकित्सा के मर्मज्ञ बन निःशुल्क और निःस्वार्थ भाव से लोगों को तत्काल राहत देने का काम कर रहे हैं। मर्म चिकित्सा पद्धति का यह चमत्कार उत्तराखण्ड, खासकर सीमांत की चिकित्सा प्रणाली में नई उम्मीदों को पंख लगाता नजर आ रहा है

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में पिछले तीन चार सालों से मर्म चिकित्सा के ‘चमत्कार’ चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिसके कुछ उदाहरण भी सामने आए हैं। जिनमें पहला उदाहरण पिथौरागढ़ के पलेटा निवासी एक युवक का है। जिन्हें श्री राममूर्ति अस्पताल भोजीपुरा बरेली में लकवाग्रस्त स्थिति में भर्ती कराया गया। वहां महीने भर ईलाज चला, बहुत धन व्यय हुआ लेकिन मरीज की हालत और भी खराब हो गई। जेब भी खाली हो गई तो डॉक्टरों की सलाह पर उसे वापस पिथौरागढ पलेटा स्थित आवास पर लाया गया। अब वह असहाय, लाचार स्थिति में अपने भाग्य को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है। ग्रामीणों की सलाह पर ‘हवा झाड़ने’ वाले को भी लाया गया। महीने भर की झाड़-फूंक, देवी -देवताओं की कृपा भी न हुई तो वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पांडेय ने जगदीश कलौनी को वस्तुस्थिति की जानकारी दी। कलौनी ने गांव पहुंचकर मरीज का मर्म किया और उसके 15 साल के लड़के को मर्म चिकित्सा के टिप्स दिए। अब बेटा घर पर दिन में तीन बार अपने पिता का मर्म करने लगा। एक सप्ताह बाद फिर जगदीश कलौनी वहां पहुंचे और अपने सामने मरीज के बेटे से मर्म कराया, कमियां ठीक कीं और वीडियो बनाकर इसकी बारीकियां समझाई। 25 दिन बाद मरीज ने मोबाइल पर अपना एक वीडियो बनाकर जगदीश कलौनी को भेजा जिसमें वह पलेटा की मुख्य सड़क पर टहल रहे थे। इस दृश्य को देखकर गांव वाले कितने हतप्रभ हुए होंगे, कल्पना ही की जा सकती है।

उदाहरण नंबर -2
: देवलथल के सामाजिक कार्यकर्ता पीएलवी सुरेंद्र बसेड़ा अपने पांच छह सहयोगियों के साथ 27 साल के एक हट्टे कट्टे नौजवान को कंधों पर ढोकर जगदीश कलौनी के धनौड़ा स्थित आवास की चढ़ाई पर जा रहे हैं, रास्ते में आने जाने वाले लोग कौतूहलवश देख रहे हैं। वैसे तो इस रास्ते में ऐसे दृश्य आम हो चले हैं। कुछ दुकानदार कयास लगा रहे हैं कि ये तो चलने फिरने, हिलने डुलने लायक भी नहीं है कैसे ठीक होगा? कुछ लोग अन्य ऐसे मरीजों का उदाहरण प्रस्तुत कर दावा कर रहे हैं कि यह बीस पच्चीस मिनट में चलकर लौटेगा। सभी दर्शक लोग दावे प्रतिदावे कर रहे हैं और करीब बीस मिनट बाद बसेड़ा दौड़कर एक दुकान से एक किलो मिठाई पैक कर कलौनी के आवास की तरफ भाग रहे हैं। दुकानदारों और उनके उस वक्त खड़े ग्राहकों ने जब मरीज की स्थिति के बारे में पूछा तो उनकी आंखें भर आई और बोले वह बिल्कुल फिट हो गया है। यह नौजवान छह महीने से दर्द की अथाह पीड़ा से त्रस्त था, पूरा देवलथल उसकी दर्दनाक परेशानी से दुखी था। यह लड़का अब अपने पैरों से चलकर जा रहा था। कलौनी ने यह मिठाई उन्हीं लोगों में यह कहकर वितरित कर दी कि ‘इसके असली हकदार आप लोग हो मैं नहीं, मैं तो निःशुल्क सेवा करता हूं।’

उदाहरण नंबर -3: 
मूनाकोट ब्लॉक के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र की 17 साल की बालिका को ऐसे रोग ने घेर लिया कि उसे दो कदम चलना मुश्किल हो गया। सातवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ सकी। उसका आधा शरीर सूख गया, उंगलियां टेढ़ी हो गई, उसकी नींद, भूख, मासिक धर्म सब खत्म हो गया। कुछ लोगों की सलाह पर बालिका की दादी ने एक सप्ताह तक अपने रिश्तेदारों के घर पर रहकर बालिका का मर्म चिकित्सा उपचार किया, बाद में वह बालिका खुद अपना उपचार करने लगी और महज दो माह बाद वह पूरी तरह विकार रहित होकर अपने गांव से चार किलोमीटर दूर स्थित स्कूल फिर से जाने लगी, उसके साथी बच्चों, स्कूल शिक्षकों, गांववासियों के लिए यह एक कौतूहल का विषय बनकर रह गया।

उदाहरण -4: 
रई क्षेत्र की एक महिला की गर्दन में अत्यधिक मांस जमा हो गया, वह पीड़ा से कराह उठती, बड़े से बड़े शहरों में बड़े से बड़े डॉक्टरों को दिखाया। तरह-तरह की महंगी जांचें हुई लेकिन उन्हें डॉक्टरों ने तत्काल सर्वाइकल का ऑपरेशन करने की हिदायत दी। किसी व्यक्ति ने उन्हें एक बार जगदीश कलौनी से मर्म चिकित्सा कराने की सलाह दी। केवल दस मिनट के उपचार से उनकी समस्या का शत प्रतिशत उपचार हो गया। अब वह खुद अपने बच्चों, रिश्तेदारों या जरूरतमंद लोगों की मर्म चिकित्सा कर उनको आरोग्य प्रदान कर रही हैं।

उदाहरण – 5:
 प्रसिद्ध पर्वतारोही विश्वदेव पाण्डेय ‘वासू’ के पिताजी पर मर्म चिकित्सा का ऐसा चमत्कार हुआ कि वासू स्वयं हरिद्वार के गैंडीखत्ता में पिछले साल हुए मर्म चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त करने गए और अब अपने संपर्क में पीड़ित लोगों को राहत प्रदान कर रहे हैं।

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