इंडिया गठबंधन के नेताओं समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र – एक चुनाव’ का नया संकट बतौर चुनौती परोस दिया है। तार्किक तौर पर इस मुद्दे की कोई काट विपक्षी दल कर नहीं पा रहे हैं। उन्हें आशंका है कि इस दांव को चल भाजपा विपक्ष शासित राज्यों की सरकारों का कार्यकाल कम करने और एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव करा आम जनता को प्रभावित करने वाले असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम कर रही है। उन्हें यह भी डर है कि यदि भविष्य में ऐसा होता है तो अपने अपार संसाधनों के बल पर भाजपा न केवल केंद्र में चौथी बार सरकार बनाने में सफल हो जाएगी, बल्कि उन राज्यों में भी फिर से सत्ता हासिल कर लेगी जहां वर्तमान में विपक्षी दलों की सरकारें हैं। दिल्ली के सत्ता गलियारों से लेकर विभिन्न प्रदेशों की राजधानियों तक अब ‘वन नेशन – वन इलेक्शन’ एक बड़ा मुद्दा बन उभरने लगा है। यूं तो प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग आठ बरस पहले यह शिगूफा छोड़ा था लेकिन तब विपक्षी दलों ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया। अब लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत् सप्ताह इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार यह साफ कर दिया है कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर गम्भीर है और आने वाले संसद सत्र में इस बाबत संविधान संशोधन विधेयकों को लाने की कवायद वह शुरू भी कर देगी।
गौरतलब है कि कोविंद समिति ने 15 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने, इन चुनावों के ठीक सौ दिन बाद स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाने की सिफारिश की गई है। कोविंद समिति ने इसके लिए 18 संवैधानिक संशोधनों को चिन्हित भी कर दिया है। इनमें से अधिकांश संशोधन संसद द्वारा ही किए जा सकते हैं। एक सामान्य मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र तैयार करने के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की सहमति लेकिन जरूरी होगी।
केंद्र सरकार का मानना है कि विकास को तेज करने, खर्चा कम करने और चुनाव ड्यूटी में सुरक्षा बलों का समय बचाने के लिए एक साथ चुनाव कराए जाने जरूरी हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 सितम्बर को मोदी मंत्रिमंडल द्वारा कोविंद समिति की सिफारिशों को स्वीकारने की जानकारी साझा करते हुए कहा कि ‘आज का युवा और आज का भारत तेजी से विकास की आकांक्षा रखता है जिसे कई चुनावी प्रक्रियाओं से बाधित नहीं किया जाना चाहिए।’
मोदी मंत्रिमंडल के इस फैसले बाद अब इंडिया गठबंधन खासा सतर्क हो गया है। खबर जोरों पर है कि केंद्रीय विधि आयोग 2029 से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और नगर पालिकाओं तथा पंचायतों के एक साथ चुनाव कराए जाने की सिफारिश कर सकता है। हाल- फिलहाल विपक्षी दल मोदी के इस दांव की काट तलाश पाने में विफल बताए जा रहे हैं।

