भाजपा का मुस्लिम चेहरा समझे जाते रहे पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री शाहनावाज हुसैन इन दिनों पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा के चलते बेहद व्यथित बताए जा रहे हैं। 2014 के आम चुनाव में मोदी लहर के बावजूद मामूली अंतर से चुनाव हारे शाहनावाज हुसैन वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। जानकारों की मानें तो हुसैन पिछले पांच सालों में लगातार भागलपुर क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास था कि पार्टी इन आम चुनावों में उन्हें ही यहां से प्रत्याशी बनाएगी, लेकिन गठबंधन की मजबूरियों के चलते भाजपा ने सीट जद (यू) को दे दी है। ऐसे में बेचारे शाहनावाज लोकसभा चुनाव न लड़ने के लिए विवश हैं। उनके समर्थकों में पार्टी के इस निर्णय के चलते भारी नाराजगी बताई जा रही है। भागलपुर में उनके चाहने वाले खुलकर मोदी के नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर प्रश्न उठा रहे हैं। हालांकि ऐसा केवल शाहनावाज के संग ही नहीं हुआ है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सीट नवादा से इस बार रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़ने जा रहा है। गिरिराज भी पार्टी के इस निर्णय से बेहद खफा बताए जा रहे हैं।
शाहनवाज का दर्द

