Uttarakhand

पलटीमार बाबा रामदेव

स्वामी रामदेव को योग पुरुष ऐसे ही नहीं कहा जाता है, निश्चित तौर पर उन्होंने आम जनमानस तक योग का प्रसार किया। योग के प्रति लोगों को जागरूक करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन इसी के साथ ही बाबा रामदेव बतौर विवादों के गुरु भी जाने जाते है। साल का कोई महीना ही ऐसा होगा जब उनके विवादास्पद बोल पर सियासत गर्म न हुई हो। कई बार तो उन्हें अपने बड़बोलेपन के कारण इतना लज्जित होना पड़ा है कि वे माफी मांगने को मजबूर हुए हैं। ताजा मामला देश की सुप्रीम कोर्ट का है जहां उन्होंने अपनी गर्दन फंसती देख एक बार फिर पलटी जरूर मारी, मगर माफी मांगने के बावजूद राहत नहीं मिली है

वर्ष 2008: स्थान – हरिद्वार
‘मैं शंकराचार्य जी के बारे में कहे गए अपने कथन को वापिस लेता हूं, जिन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं उनके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं।’ ‘दि संडे पोस्ट’ के नोएडा स्थित मुख्यालय में एक ‘टॉक-ऑन टेबल’ कार्यक्रम में योग गुरु रामदेव से जब मीडियाकर्मियों ने सवाल किया कि आदि शंकराचार्य के कथन ‘जगत मिथ्या है और केवल ब्रह्मा ही सत्य’ से आप क्या सहमत हैं? इस पर बाबा रामदेव ने आदि शंकराचार्य के दर्शन ‘ब्रह्मा सत्यम जगत मिथ्या’ को चुनौती देते हुए उसे लोगों को निकम्मा और कामचोर बनाने के लिए जिम्मेदार बताया था। इसके बाद देशभर में साधु-संतों ने रामदेव के खिलाफ प्रदर्शन किए और पुतले फूंके। बाद में उन्हें हरिद्वार में संत सभा में इसके लिए लिखित माफी मांगनी पड़ी और आर्य समाजी होने के बावजूद भी शंकराचार्य की मूर्ति को माल्यार्पण करना पड़ा। तब जाकर ये विवाद शांत हुआ।

26 अप्रैल 2014: स्थान – लखनऊ , उत्तर प्रदेश
‘राहुल गांधी दलितों के घर जाकर हनीमून व पिकनिक मनाते हैं।’ योग गुरु की इस विवादित टिप्पणी का व्यापक विरोध हुआ। तब माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि राहुल गांधी के संदर्भ में स्वघोषित बाबा रामदेव ने असभ्य बयान दिया है जो दलित महिलाओं को अपमानित करने वाला व उनकी प्रतिष्ठा गिराने वाला बयान है। रामदेव के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। अनुसूचित जाति की महिलाओं के विरोध के बाद उनके खिलाफ लखनऊ में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल करने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इस पर योग गुरु ने यूटर्न लिया और कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष गरीबों के घर केवल प्रचार करने के लिए जाते हैं। उनका जाना पिकनिक मनाने जैसा या पर्यटन जैसा होता है। यही उनके कहने का आशय था। लखनऊ में जो बयान दिया था, उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। ‘हनीमून पीरियड’ का इस्तेमाल आमतौर पर राजनीतिक बोलचाल में होता है। उनका राहुल गांधी या दलित समुदाय को अपमानित करने या उन्हें चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। अगर उनकी बातों से किसी को बुरा लगा है तो वह उसके लिए माफी मांगते हैं।
19 सितंबर 2019:
‘जिसको सिद्ध करने में वैज्ञानिकों को 2 साल लगे। करोड़ों रुपए खर्च हुए। यह बातें तो हमारी दादी-नानी हजारों सालों से जानती थी। मतलब हमारे पूर्वज, हमारे स्वदेशी परंपराएं, खान-पान विज्ञान सम्मत है। हमारे पूर्वज अनपढ़ नहीं बल्कि वैज्ञानिक थे। भारत सपेरे गडरियों का देश नहीं वैज्ञानिकों का देश रहा है।’ स्वामी रामदेव के ट्विटर अकाउंट पर उक्त स्टेटमेंट लिखा गया जिससे गडरिया समाज सुलग उठा। देश में निवास करने वाले करोड़ों की तादात में गडरिया समाज के लोगों ने इसको अपने मान सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर देखा। तब देश के हर कोने से गडरिया समाज के लोग बाबा के खिलाफ पुरजोर विरोध करने लगे। फलस्वरूप बाबा ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि अंग्रेज हमारे देश को सपेरा गडरियो का देश कहकर हमारा अनादर करते थे। हम सभी जातियों का आदर करते हैं। हम सभी को एक ईश्वर की संतान सभी समान सभी महान मानते हैं। हम कभी भी जाति के नाम पर भेदभाव नहीं करते। इसे कोई अन्यथा ना लें। यदि किसी की भावनाएं आहत हुई है तो उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं।

24 मई 2021: स्थान – दिल्ली

‘एलोपैथी एक ‘मूर्खतापूर्ण विज्ञान’ है। भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल द्वारा कोरोना के इलाज के लिए रिकमेंड किए गए रेमेडिसविर, फेविफ्लू और अन्य दवाएं जैसी दवाएं कोरोना मरीजों का इलाज करने में विफल रही हैं। लाखों मरीजों की मौत एलोपैथिक दवाएं लेने से हुई है।’

योग गुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथिक चिकित्सा पर दिए गए अपने उक्त बयान को लेकर माफी मांगी और कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर उन्होंने यह बयान दिया है, पर अगर उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो माफी मांगते हैं।

बाबा रामदेव का माफी मांगने वाला बयान तब सामने आया जब एलोपैथिक दवा को ‘बेवकूफ विज्ञान’ बताने वाले रामदेव की टिप्पणी के बाद तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने योग गुरु को पत्र लिखा था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रामदेव के बयान से ना केवल कोरोना योद्धाओं को ठेस पहुंची है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए भी दुखदायी है। डॉ. हर्षवर्धन ने लिखा कि बाबा रामदेव के बयान ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डाल कर काम कर रहे कोरोना योद्धाओं को आहत और अपमान किया है इसलिए बाबा रामदेव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि यह ऐसा समय है जब आधुनिक चिकित्सा ने कई लोगों की जान बचाई है। इससे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी बाबा रामदेव के बयान पर आपत्ति दर्ज करते हुए उन्हें एक कानूनी नोटिस भेजा था और केंद्र से उनके बयान पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी।

29 नवंबर 2022: स्थान – ठाणे , महाराष्ट्र

‘महिलाएं साड़ी में अच्छी लगती हैं, वे सलवार सूट में अच्छी लगती हैं और मेरे विचार में, वे कुछ भी न पहनने पर भी अच्छी दिखती हैं।’ योग गुरु बाबा रामदेव ने महाराष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं पर अपनी उक्त टिप्पणी की तो महिलाआंें में रोष फैल गया। इस पर रामदेव ने खेद व्यक्त किया और माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं पर की गई, उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया। ठाणे में महिलाओं के लिए पतंजलि समूह के मुफ्त योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र ठाणे सांसद श्रीकांत शिंदे और भाजपा के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस और अन्य प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति में रामदेव ने उक्त बयान दिया था। उनकी इस टिप्पणी से राज्य में एक नया विवाद खड़ा हो गया। इसके अलावा, उनके अगले कार्यक्रम के लिए उन्हें धमकाया भी गया।
27 मई 2023: स्थान – भीलवाड़ा, राजस्थान
‘मेरा मंतव्य किसी समाज को ठेस पहुंचाना नहीं था। मैं इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहता था, लेकिन मुंह से निकल गया। इसके लिए माफी मांगता हूं।’ बाबा रामदेव ने क्षत्रिय समाज को लेकर दिए एक बयान पर इस दिन माफी मांगी। रामदेव ने जंतर-मंतर पर धरनारत पहलवानों को लेकर पूछे सवाल पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा था कि भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर दुराचार के आरोप शर्मनाक हैं। उसे तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज देना चाहिए। राष्ट्रीय करणी सेना ने विरोध जताया। इस पर बाबा बैकफुट पर आए और कहा भाई विश्व हिंदू सिंह राठौड़ ने मुझे बताया कि कुछ लोग मेरे बयान को राजपूत समाज के विरोध से जोड़कर देख रहे हैं। यह बात सरासर गलत है। मैं भी क्षत्रिय कुल में जन्मा हूं। मैं क्षत्रिय धर्म के शौर्य और वीरता को समझता हूं जो अन्याय के खिलाफ लड़ता है। महाराणा प्रताप के शौर्य और बलिदान की विरासत हमें राजपूत समाज से ही मिली है। उसका अनादर करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है।
21 मार्च 2024: स्थान – हरिद्वार
भ्रामक विज्ञापन मामले में पतंजलि ने अपने पुराने बयानों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। पतंजलि के एम डी बालकृष्ण द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया गया और कहा कि उन्हें कंपनी के अपमानजनक वाक्यों वाले विज्ञापन पर खेद है। नवंबर 2023 के बाद जारी किए गए विज्ञापनों का उद्देश्य केवल सामान्य बयान था। लेकिन उसमें गलती से अपमानजनक वाक्य शामिल हो गए। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी मंशा सिर्फ देश के नागरिकों को आयुर्वेदिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।

रामदेव और बालकृष्ण द्वारा 2006 में स्थापित पतंजलि आयुर्वेद एक बहुराष्ट्रीय कंपनी समूह है जहां आयुर्वेदिक दवाओं से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों और खाद्य पदार्थ संबंधित ढेर सारे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यह समूह अपने उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में भ्रामक विज्ञापनों को लेकर मुसीबत में फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही के नोटिस का जवाब देने में विफलता का हवाला देते हुए पतंजलि को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने बालकृष्ण और रामदेव को 2 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने को कहा है।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी बालकृष्ण को अदालत में बुलाया था। 27 फरवरी, 2024 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने मधुमेह, बीपी, थायराइड, अस्थमा, ग्लूकोमा और गठिया जैसी बीमारियों से ‘स्थायी राहत, इलाज और उन्मूलन’ का दावा करने वाले पतंजलि के विज्ञापनों को भ्रामक बताया और उनपर रोक लगा दी थी। रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी बालकृष्ण से तीन हफ्ते के अंदर जवाब भी मांगा था। लेकिन अदालत को रामदेव या पतंजलि की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला जिसके बाद 19 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन वाले केस में अवमानना नोटिस जारी किया। साथ ही योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 19 मार्च की सुनवाई में सबसे पहले कोर्ट ने रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी से यही पूछा कि अभी तक जवाब दाखिल क्यों नहीं किया है। जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने तल्ख रवैया अपनाते हुए कहा कि हम रामदेव को पक्षकार बनाएंगे। रामदेव और बालकृष्ण दोनों को अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने कहा कि हम मामले की सुनवाई टालने नहीं जा रहे हैं। ये बात बिल्कुल साफ है।

गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि पतंजलि आयुर्वेद की तरफ से कोविड टीकाकरण अभियान और एलोपैथी दवाओं के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है। पतंजलि की तरफ से जारी किए गए विज्ञापनों में शुगर, बीपी, अस्थमा और कई बीमारियों को पूरी तरह से ठीक करने का दावा किया गया था। उसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण को हाजिर होने का आदेश दिया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इससे पहले पतंजलि ने नवंबर 2023 में भी एक ऐसा ही आश्वासन दिया था कि वो चिकित्सा की किसी भी प्रणाली की निंदा करने से परहेज करेंगे। बावजूद इसके पतंजलि ने भ्रामक विज्ञापनों का सिलसिला जारी रखा। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को नसीहत देते हुए कहा था कि अगर आपके प्रोडक्ट्स का दावा गलत मिला तो 100 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। तब रामदेव ने कहा था, ‘अगर हम गलत हैं तो 100 नहीं 1000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाए। यहां तक कि हमें मौत की सजा दे दी जाए।’

गत् 2 अप्रैल को पतंजलि के को-फाउंडर रामदेव और एमडी बालकृष्ण द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष माफी मांगी गई लेकिन कोर्ट ने माफी अस्वीकार करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने केंद्र के रवैये पर भी आपत्ति जताते हुए कंपनी के विज्ञापनों पर नजर रखने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रामदेव के वकील बलवीर सिंह ने कहा कि योग गुरु माफी मांगने के लिए यहां मौजूद हैं। भीड़ की वजह से कोर्ट रूम नहीं आ पाए। अदालत ने एफिडेविट देखने के बाद फटकार लगाई और कहा कि यह प्रोपर एफिडेविट नहीं है। जब बलवीर सिंह ने माफीनामा पढ़ा तो अदालत ने कहा कि हमें रामदेव के वकील का माफीनामा नहीं सुनना। इस दौरान पतंजलि के वकील न्यायालय के समक्ष बार बार माफी मांगते रहे और कोर्ट को कोई रिसर्च नहीं दिखा पाए।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने कहा, हम दोनों के खिलाफ झूठी बयानबाजी का केस चलाने का निर्देश रजिस्ट्रार को देते हैं। अदालत ने बलबीर सिंह से कहा- आप तैयार रहिएगा। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद रामदेव और बालकृष्ण कोर्ट रूम पहुंचे और रामदेव ने बिना शर्त माफी मांगी। बेंच ने कहा, केवल सुप्रीम कोर्ट नहीं, देश की हर अदालत के आदेश का सम्मान होना चाहिए। आपको अदालत के निर्देशों का पालन करना था और आपने हर सीमा लांघी। अदालत ने कहा कि जब पतंजलि हर कस्बे में जाकर कह रही थी कि एलोपैथी से कोविड में कोई राहत नहीं मिलती तो केंद्र ने अपनी आंखें क्यों बंद कर रखी थीं। सही एफिडेविट फाइल न करने पर केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था।

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