Uttarakhand

पाठक परिवार की अनसुनी पुकार

देश में सेना और रेलवे के बाद सबसे बड़ा जमीनों का मालिक वक्फ बोर्ड है। हैरत की बात यह है कि जमीन मिल्कियत ‘दिन दूनी, रात चौगुनी’ की तर्ज पर तेजी से बढ़ रही है। वक्फ बोर्ड के कब्जे की जमीनों का रकबा सिर्फ 13 साल में दोगुना से भी ज्यादा हो गया है। सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रहे वक्फ के जमीनी सच का एक पहलू नैनीताल जिले के रामनगर में सामने आया है। यहां कभी एक प्रधान ने कब्रिस्तान के लिए एक बीघा जमीन दी थी। लेकिन आज वक्फ बोर्ड एक बीघा के सहारे 15 बीघा जमीन पर कब्जा जमाए बैठा है। यह तो जांच का विषय है ही लेकिन उस पाठक परिवार की पीड़ा की पुकार भी अनसुनी हो रही है जो पिछले 100 सालों से यहां अपनी जमीन पर काबिज है। वक्फ बोर्ड जमीन पर अपना अधिकार जताकर पाठक परिवार को बेदखल करने पर अमादा है। पाठक परिवार के पक्ष में पूर्व कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी वक्फ बोर्ड के सीईओ को पत्र लिख चुके हैं। इसी जमीन पर सरकार द्वारा भी पाठक परिवार को मुआवजा दिया जा चुका है। पीड़ित परिवार उजड़ने के डर से नेताओं के दर पर अपनी फरियाद लेकर जाता है लेकिन उसे कोई सहायता नहीं मिल रही है, फिलहाल यह परिवार न्यायालय की शरण में है

‘वक्फ बोर्ड अपनी मनमानी पर उतर आया है। वह जहां भी चाहे अपना दावा ठोक देता है चाहे जमीन किसी की भी हो। उसके पास यह अधिकार है कि अगर वह किसी जगह को अपना बता दे तो जिस व्यक्ति की वह है उसकी पूरी जिंदगी निकल जाएगी कोर्ट कचहरी का चक्कर काटते लेकिन न्याय नहीं मिलेगा। हमारे नगर का भी ऐसा ही एक पाठक परिवार है। यह परिवार जिस जमीन पर सौ साल से रह रहा था अचानक वक्फ बोर्ड ने उस पर अपना दावा कर दिया। इससे परिवार सकते में है। साथ ही यह परिवार गुरवत के दिनों में जी रहा है। पूर्व में मैं जब अमृता रावत रामनगर विधायक थी तब मैं उनका प्रतिनिधि रहते इस परिवार की आवाज को सरकार के समक्ष उठाया था। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज जी ने शासन को पत्र लिखा था तब वक्फ बोर्ड के सीईओ इकबाल अहमद ने पीड़ित परिवार की पीड़ा सुनी थी और कुछ दिनों के लिए उन्हें राहत भी दी थी। लेकिन इसके बाद वक्फ बोर्ड फिर से पाठक परिवार के लिए परेशानी का सबब बन गया है। आए दिन उनके घर वक्फ बोर्ड के अधिकारी आ धमकते हैं और उन्हें अपनी जमीन बताकर वहां से हट जाने को बोलते हैं जबकि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है ही नहीं। यहां वक्फ बोर्ड की सिर्फ एक बीघा जमीन थी लेकिन अब वह 16 बीघा जमीन पर दावा कर रहा है। इसमें पाठक परिवार भी प्रभावित हो रहा है।’ यह कहना है भारत नंदन भट्ट का। यह पाठक परिवार को न्याय दिलाने के लिए कई वर्षों से उनका साथ दे रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड के हिटलरशाही फरमान के आगे पाठक परिवार असहाय नजर आ रहा है।

रामनगर के ग्राम गौजानी का पाठक परिवार, वक्फ बोर्ड की जमीनी लूट का सामना कर रहा है। मामला यूं है कि नैनीताल जिले के रामनगर के बेहद शांत समझे जाने वाले ग्राम गौजानी में रह रहा पाठक परिवार उस समय सुन्न रह जाता है, जब उन्हें पता चलता है कि वह जिस भूमि पर रह रहे हैं, उसे वक्फ बोर्ड अपनी संपत्ति बता रहा है। दरअसल, यह उस 16 बीघा जमीन से जुड़ा मामला है, जो रामनगर के ग्राम गौजानी में कॉर्बेट नेशनल पार्क की सीमा से लगते रामनगर से कोटद्वार को जोड़ने वाले कंडी मार्ग के समीप की भूमि है।

बताया जाता है मामला सन् 1950 के आस-पास का है। ज्ञानदेव नामक शख्स की यह भूमि थी, उनके एकमात्र पुत्र जयबल्लभ थे जिनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने इस भूमि का कुछ हिस्सा एक सादे इकरारनामे पर अपने एक मित्र हीरा बल्लभ पाठक के नाम कर दिया। हीरा बल्लभ पाठक अपने परिवार के साथ इसी भूमि पर रहने लगे। जय बल्लभ और हीरा बल्लभ पाठक में पारिवारिक सम्बंध थे। समय के साथ दोनों ही शख्स स्वर्ग सिधार गए। हीरा बल्लभ पाठक के पुत्र रमेश चंद्र पाठक जिनका जन्म और शिक्षा गौजानी गांव में ही हुई, वह बाद में अपने परिवार के साथ इसी भूमि पर रहने लगे।

वर्ष 1995 की बात है एक दिन उनके इस घर में अचानक आग लग गई। उस समय रामनगर, अविभाजित उत्तर प्रदेश में काशीपुर परगना के तहत आता था। आग लगने से उनके सभी दस्तावेज जल कर खाक हो गए। जिसके बाद रमेश चंद्र पाठक ने मुआवजे की मांग की। काशीपुर परगना से मुआयना करने के बाद पाठक परिवार को 1700 रुपए मुआवजा मिला। जिसमें उनके इस भूमि पर रहने की पुष्टि की गई है। लेकिन उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद एक दिन अचानक पाठक परिवार को पता चलता है कि उनकी भूमि पर वक्फ बोर्ड अपना दावा जता रहा है, और उन्हें भूमि खाली करने के आदेश दे रहा है। अचानक इस नोटिस को पढ़कर पाठक परिवार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। रमेश चंद्र पाठक की पत्नी मंजू पाठक बताती हैं कि दावा किया जाता है कि यह भूमि कब्रिस्तान के लिए है। स्थानीय ग्रामीणों के हस्तक्षेप से इस भूमि पर से वक्फ बोर्ड उन्हें हटा नहीं पाया है। आर्थिक तौर पर मुफलिसी का सामना करने वाले पाठक परिवार के समक्ष वक्फ बोर्ड से जमीन छुड़ाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। इसी दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व विधायक अमृता रावत के प्रतिनिधि रहे भरतनंदन भट्ट इस परिवार के लिए देवदूत बनते हैं और पूरा मामला हल्द्वानी में हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली के समक्ष ले जाते हैं। लेकिन उधर वक्फ इस भूमि पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता। भारत नंदन भट्ट बताते हैं कि वर्ष 2022 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रयासों से मानवीय आधार पर पाठक परिवार को इस भूमि पर काबिज करने के लिए कैबिनेट मंत्री ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखा। जिसके बाद से पाठक परिवार उक्त भूमि में सिर्फ जिस जगह पर काबिज है, उसी भूमि पर निवास कर रहा है, मामला फिलहाल यथास्थिति पर है।

वर्ग 8 की है जमीन
दरअसल, श्रेणी-आठ की जमीन मौरूशी काश्तकार की जमीन होती है। इस पर खेती, पट्टा आदि तो होता है, लेकिन इसकी खरीद- फरोख्त नहीं हो सकती। जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत जमीन का मालिकाना हक जमींदारों अथवा जमींदारों द्वारा दिए गए पट्टेधारकों का होता है। इसमें कृषि उपयोग की भूमि के मालिकाना हक को बदलने का प्रावधान नहीं है। धामी सरकार के आदेश पर दो साल पहले रुद्रपुर के तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने राजस्व उपनिरीक्षकों, सर्वे लेखपालों को कई ग्रामों में वर्ग 8 की भूमि का सत्यापन करने के आदेश जारी किए थे। ये गांव तहसील सितारगंज के ग्राम अरविंदनगर, निर्मलनगर, राजनगर, सुरेंद्रनगर, गुरुग्राम, देवनगर, बैकुण्ठपुर, रूद्रपुर, टैगोरनगर, गोविंदनगर है। जहां वर्ग 8 में दर्ज पटटेदारों, कब्जेदारों को भूमिधरी अधिकार देने का जीओ जारी किया गया है। इसमें कई पट्टाधारकों को भूमिधरी अधिकार दिया जा चुका है। तहसील रुद्रपुर के अधिकारियों के अनुसार जीओ के पैरा 2 के अनुसार पूर्वी पाकिस्तान यानी वर्तमान बांग्लादेश से वर्ष 1971 से पूर्व आए शरणार्थी और जिन्हें वर्ष 1980 से पूर्व भारत सरकार की पुनर्वास योजना के तहत कृषि भूमि के पट्टे आवंटित किए थे उन्हें वर्ग 8 के भूमिधरी अधिकार दिए गए हैं।

इसी नियम के तहत जय बल्लभ पुत्र ज्ञानदेव के नाम पर की गई। बताया जा रहा है कि जय बल्लभ को कोई संतान नहीं थी उन्होंने अपनी जमीन में से कुछ हिस्सा हीरा बल्लभ पाठक को दे दिया। वर्ग 8 की मोरुशी काश्तकार की यह जमीन किसी को बेची नहीं जा सकती है। इस नियम के तहत कृषि उपयोग की भूमि के मालिकाना हक को बदलने का प्रावधान न होना भी एक कारण रहा कि हीरा बल्लभ पाठक को यह जमीन जय बल्लभ द्वारा दान स्वरूप दी गई।

यह जमीन हीरा बल्लभ पाठक को जय बल्लभ द्वारा दी तो गई थी दान स्वरूप लेकिन भारत सरकार की पुनर्वास योजना के तहत जो व्यक्ति किसी जमीन पर 30 साल से अधिक समय से काबिज है उस पर उसी का अधिकार होगा। इस योजना के तहत हीरा बल्लभ को मिली वर्ग 8 की यह जमीन अब उनके खाते में है।

बात अपनी-अपनी
इस मामले की मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। वक्फ बोर्ड के द्वारा रामनगर वाले इस मामले की जांच कराई जाएगी। पीड़ित कोई भी हो उसे न्याय मिलेगा।
शादाब शम्स, अध्यक्ष, बक्फ बोर्ड उत्तराखण्ड

वक्फ की जमीन वह होती है जो अल्लाह के नाम पर दान दी गई है। लेकन देखने में आ रहा है कि वक्फ बोर्ड में बैठे कुछ माफिया गरीब लोगों की जमीनों को कब्जा रहे हैं। ऐसे लोग जिनकी कोई पौरवी करने वाला भी न हो वे वक्फ से कानूनी लड़ाई भी लड़ने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे लोगों को ही अधिकतर निशाना बनाया जाता है। वक्फ बोर्ड जिस तरह से बिना जांच पड़ताल उन लोगों पर नोटिस जारी करता है उससे वक्फ की भी भूमिका संदिग्ध लगने लगी है। वक्फ के मुल्तिव की भूमिका संदेहास्पद हो रही है। सरकार को सबसे पहले ऐसी विवादास्पद प्रोपर्टी का सर्वे कराया जाना आवश्यक है इससे दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
दुष्यंत मैनाली, वरिष्ठ अधिवक्ता हाईकोर्ट

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