वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ओंकारनाथ सिंह बता रहे हैं कि विषम परिस्थितियों में नए भारत के निर्माण की नींव रखने वाले जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा के बजाय उनकी कमियां दर्शा प्रधानमंत्री विनम्रता नहीं अहंकार का प्रदर्शन कर रहे हैं
2019 का लोकसभा का चुनाव हो गया। जनता ने भारी बहुमत से भाजपा की सरकार को समर्थन दिया। प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब देते हुए लोकसभा में नए भारत की परिकल्पना की। उन्होंने विपक्ष से इस पर उनका सहयोग भी मांगा पर क्या सहयोग मांगने का उनका तरीका ठीक था। उन्होंने पूरे भाषण में विपक्ष के प्रहारों का जवाब एक प्रधानमंत्री की हैसियत से न देकर एक विपक्षी सदस्य की भांति दिया। बार बार पिछली सरकारों को कोसना और अपनी तारीफ करना यदि नया भारत है तो उन्हें ही मुबारक़। होना तो यह चाहिए था कि प्रधानमंत्री जी को बड़ी ही विनम्रता का परिचय देना चाहिए था। विपक्ष के हमलो का जवाब बड़ी शालीनता से देते हुए अपनी सरकार की योजनाओ की व्यख्या करते और उस पर विपक्ष का सहयोग मांगते। पर इसके विपरीत उन्होंने नेहरू जी की गलतिया निकालना शुरू कर दिया। हमे ऐसा लगा की जैसे कोई लड़का अपने पिता द्वारा बनवाये गए मकान की कड़ी से कड़ी निंदा करे और कहे कि इससे खराब तो कुछ बन ही नही सकता। उसने यह भी यह भी नही सोचा कि किन परिस्थियों उसके पिता ने कैसे कैसे मकान की नींव रखी जिस नींव पर वह नया मकान बनाने जा रहा है। ठीक वही स्थित हमारे प्रधामंत्री मोदी जी की है। जब देश आज़ाद हुआ उस समय भारत किन परिस्थितयो में था वह किसी से छुपा नही है और वैसी स्थिति में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जो भारत के विकास की नींव डाली उसको लेकर इतिहास कारो ने उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा। प्रशासन, सिंचाई, बिजली, स्वास्थ एवम चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, परिवहन, परमाणु, रोज़गार आदि के क्षेत्र में करबद्ध तरीके से भारत के विकास की नींव डाली उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है। भारत उस समय इतना गरीब और पिछड़ा था की सीमित साधनों के ज़रिये नेहरू ने योजना आयोग के माध्यम से धीरे धीरे विकास करना प्रारम्भ किया। जो आज एक समृद्धशाली भारत की ओर ले गया। इस विकास में किसी एक का ही हाथ नही कहा जाएगा यह क्रमबद्ध विकास सबकी मेहनत का नतीजा है। सभी सरकारो द्वारा यदि अच्छे काम किये गए तो कुछ गलतिया भी की गई। जिसे बाद की सरकारों ने उसे निपटाया या सुधार किया।
आज जब नए भारत की परिकल्पना प्रधानमंत्री जी कर रहे है तो यह अच्छी बात है उसका स्वागत किया जाना चाहिए पर वह नया भारत कैसा हो इसकी रूप रेखा अवश्य तय हो जिसमे सबका सहयोग हो न की कोई वर्ग भविष्य में होने वाली अनहोनी से भयभीत हो। मेरे विचार से नए भारत की शुरुआत जनसंख्या कंट्रोल से हो। जब तक सरकार जनसंख्या नियंत्रण पर ज़ोर नही देंगी तब तक कोई भी प्रयोग सफल नही हो पायेगा। आज विश्व में जितने भी खुशहाल और विकसित देश है वह जनसंख्या पर नियंत्रण है। यहां हम चीन को एक ऐसा देश देखते है जो जनसँख्या में अधिक है पर विकसित भी है पर खुशहाल नही है। चीन अनेको आंतरिक समस्याओ से ग्रसित है। इसलिए सरकार का सबसे अधिक ध्यान जन संख्या नियंत्रण पर होना चाहिए। इसके लिए सोच समझ कर नियम बनाये। सबसे पहले लोगो को जन संख्या नियंत्रण पर समझाए और साथ ही कुछ नियम भी बनाये। सबको एक तारीक एक वर्ष के बाद की दे कि उस तारीख के बाद किसी को भो दो बच्चो से अधिक पैदा होता है तो उसे सभी सरकार द्वारा दी गई सुविधाओ से वंचित किया जाएगा। परिवार नियोजन के तरीको को ऐसे समझाया जाय जैसे सरकार ने पोलियो का उन्मूलन करने में समझाया। एक वर्ष का समय देना इसलिए आवष्यक है ताकि भारत का प्रत्येक नागरिक सरकार की ईमानदार नियत को समझ सके की उसने इसे लागू करने में कोई जल्दबाज़ी या नादिर शाही नही दर्शाई है। दूसरी समस्या शिक्षा की है शिक्षा व्यवस्था निश्चित रूप से सुधारने की है। जो सरकार ने टीचरों को रखने के नियम बनाये है उसमे सुधार की आवश्यकता है। अभी प्राथमिक शिक्षा में यह नियम है कि 40 बच्चो पर एक शिक्षक होगा। इन 40 बच्चो में कक्षा एक से पांच तक के बच्चे है और शिक्षक एक है तो ऐसी परिस्थित में एक शिक्षक कैसे सारे बच्चो को पढा पायेगा। इसलिए इसमे सुधार की अति आवश्यकता है। होना तो यह चाहिये कि हर विद्यालय में कम से कम पांच शिक्षक हो ताकि पांचो क्लास के बच्चो को पढाने के लिए अध्यापक उपलब्ध हो। एक विकसित या विकास शील देश के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि कृषि और उद्योग दोनों समान रूप से विकसित हो। भारत में कई उद्योग क्षेत्र ऐसे है जो हर ज़िले में स्थापित तो है पर उद्योग बन्द पड़े है। सरकार को एक स्पष्ट नीति बनानी पड़ेगी जिसमे यदि कोई उद्योग बन्द हो जाता है तो उसको किसी दूसरे इन्वेस्टर को उसकी आवश्यकता के अनुसार दे देना चाहिए। पहले वाले के बकाया और वसूली के अलग से नियम बनाये जाय। होता यह है उस बकाये की वजह से सरकार किसी और को दे नही पाती और दूसरा उसे इसलिए नही ले पाता है की उसका बकाया का भुगतान करने की ज़िम्मेदारी कोई दूसरा ले नही पाता है और वह जगह बंजर की तरह हो जाती है और नए उद्योग के लिए सरकार को दूसरी ज़मीन लेनी पड़ती है। सरकार की इस ढीली नीति के कारण उद्योग लगाने वालो में डर का बोझ नही हो पाता है।इसके लिए एक स्पष्ट और साफ सुथरी नीति के साथ सरकार को आगे आना चाहिए। इसी प्रकार कृषि क्षेत्र में ऐसी नीति बने जिसमे किसान को खेती की लागत कम लगानी पड़े और दाम वाज़िब मिले। स्वास्थ एवम चिकित्सा व्यवस्था में पहले की अपेक्षा बहुत कुछ किया गया है परन्तु अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। गाव का समुचित और समय बद्ध विकास की आवश्यकता है ताकि गावो के पलायन को रोका जा सके।
इसलिए यदि सरकार वास्तव में नए भारत की परिकल्पना कर रही है और सबका सहयोग चाहती है तो लोक सभा और राज्यसभा की एक ज्वाइंट संसदीय कमेटी गठित करे जो सभी क्षेत्रो को विकसित करने के लिए प्रभाव शाली योजना बनाये जिसे माननीय सदस्य पार्टी लाइन छोड़ देश की लाइन पर सोचने की शुरुआत करे तथा सरकार द्वारा नियुक्त विश्व के विशेषग्यो की एक टीम द्वारा प्रारूप की समीक्षा कर अपनी सर्व सम्मति से सहमति कुल तीन महीने में लेकर नए भारत के निर्माण में आगे बढ़े। एक ऐसी योजना जिसमे अधिकार के साथ कर्तव्यों का भी बोध भारत के प्रत्येक नागरिक को हो। हम भी चाहते है की जब कोई टूरिस्ट भारत आये तो वह भारत की एक अच्छी तस्वीर लेकर जाय और हम भी गर्व से कह सके कि हमारा भारत भी किसी से कम नहीं।

