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शुरू होने से पहले हुआ प्रेरणा ऐप का विरोध,शिक्षकों का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल

 ना किसी की गाड़ी पंचर होगी, ना कोई बहाना होगा। तुझे प्रेरणा की कसम, रोज सुबह स्कूल आना होगा। प्रेरणा नामक भयानक नागिन से, कौन बच पाएगा…देखना न भूलें पांच सितंबर से पहला एपिसोड

कुछ इसी तरह के जोक्स आजकल सोशल मीडिया पर चल रहे है। यह जोक्स उत्तर प्रदेश सरकार की प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही प्रेरणा ऐप के विरोध में है। गौरतलब है की 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार सभी सरकारी विधालयो में प्रेरणा ऐप के जरिए अध्यापको की अनुपस्थिति दर्ज कराने की शुरआत करने जा रही है।

प्रदेश के अधिकतर शिक्षकों ने इस ऐप के जरिए पांच सितंबर से दी जाने वाली लाइव सेल्फी को ऐप पर अपलोड करने से ही साफ इनकार कर दिया है। यही नहीं बल्कि शिक्षकों ने इस दिन को शिक्षक सम्मान बचाओ दिवस मनाने का निर्णय लिया है। प्रदेश के शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोल आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।  शिक्षकों का मानना है कि सरकार केवल प्राइमरी शिक्षकों को ही निशाना बना रही है जबकि और भी शिक्षक और विभाग हैं सभी प्रेरणा के दायरे से बाहर क्यों हैं? साथ ही इस एप में डाला गया डॉटा सुरक्षित रहेगा। इसकी गारंटी कौन देगा?

बहरहाल , प्राइमरी एवं जूनियर स्तर के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए लागू प्रेरणा ऐप का अध्यापकों ने विरोध प्रारंभ कर दिया है। इसको लागू करने की निर्धारित तिथि पर प्रदेश के अधिकतर अध्यापक अपने अपने जिला मुख्यालय पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

 

बेसिक शिक्षा परिषद के इस प्रेरणा एप और सेल्फी विद अटेंडेंस को लेकर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं में रोष व्याप्त है। बीएसए दफ्तरो  में सर्वपल्ली राधाकृष्ण के चित्र पर माल्यर्पण करने के बाद शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश भर के शिक्षक-शिक्षिकाएं जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय सहित जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। फिर डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। साथ ही इस दिन को शिक्षक सम्मान बचाओ दिवस भी मनाया जाएगा। जिसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

दिनेश चंद शर्मा,  प्रदेश अध्यक्ष शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश


दरअसल सरकार ने परिषदीय स्कूलों में अध्यापकों की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरणा ऐप को लॉन्च किया है। इसका शुभारंभ 5 सितंबर को किया जाएगा। प्रेरणा ऐप में अध्यापक को स्कूल की प्रार्थना सभा, मिड डे मील एवं छुट्टी के समय बच्चों के बीच में खड़े होकर बच्चों के साथ स्मार्टफोन से सेल्फी लेनी होगी और इसके बाद एप पर डाउनलोड करना होगा। जो भी शिक्षा का बच्चों के साथ सेल्फी प्रेरणा ऐप डाउनलोड नहीं करेगा उसको गैरहाजिर मान लिया जाएगा। अध्यापकों की ओर से प्रेरणा ऐप का विरोध प्रारंभ हो गया है।
अध्यापको का तर्क है कि ड्यूटी वक्त में अध्यापक स्कूल में पढ़ाई के बजाय सेल्फी की उधेड़बुन में लगा रहेगा। सभी अध्यापकों के पास स्मार्टफोन नहीं है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्र के दूरदराज स्थिति स्कूलों में नेटवर्क की सुविधा भी नहीं है ऐसे में अध्यापकों का सेल्फी लेकर प्रेरणा एप पर डाउनलोड करना बहुत ही मुश्किल होगा। इसके साथ ही उन्होंने सिर्फ अध्यापकों पर प्रेरणा ऐप लागू करने की मंशा पर भी सवाल उठाया है कहां की प्रेरणा ऐप इतना अच्छा है तो सभी सरकारी विभागों में क्यों नहीं लागू कर दिया जाता। इन समस्याओं और सवालों को लेकर अध्यापकों ने कल 5 सितंबर को जिला मुख्यालय पहुंचकर  विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है। याद रहे कि जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन का यह निर्णय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के आह्वान पर लिया गया है।

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